कोडरमा में दशलक्षण महापर्व का चौथा दिन उत्तम शौच धर्म के रूप में मनाया
कुंडलपुर से आई गुणमाला दीदी का हुई प्रवचन
कोडरमा: श्री दिगम्बर जैन समाज के अंतर्गत श्री दिगम्बर जैन दोनों मंदिर में पर्युषण महापर्व बहुत ही भक्ति भाव के साथ मनाया जा रहा है, जिसमें आज चौथा दिन उत्तम शौच का दिन उत्तम शौच धर्म के रूप में मनाया गया। इस अवसर पर श्री दिगंबर जैन बड़ा मंदिर के सरस्वती भवन में कुंडलपुर से आई गुणमाला दीदी ने उत्तम शौच के बारे में बताते हुए कहा कि---*उत्तम शौच लोभ परिहारी, संतोषी गुण रतन भंडारी।' अर्थात
जिस व्यक्ति ने अपने मन को निर्लोभी बना लिया है, संतोष धारण कर लिया है, उसका जीवन परम शांति को उपलब्ध हो जाता है। जो व्यक्ति उत्तम शौच धर्म को धारण करता है उसकी आत्मा लोभ ओर लालच जैसे मल का त्याग कर परम् उज्ज्वलता को प्राप्त होती है। उस व्यक्ति के मन में संतोष गुण तथा अनेक गुण रत्नों के भंडार प्राप्त होते है, उसका जीवन परम शांति को उपलव्ध होता है।
इससे पहले बुधवार सुबह नया मंदिर में प्रथम अभिषेक शांतिधारा का सौभाग्य मूल चंद सुशील सुमित जैन छाबडा और बड़े मंदिर जी में के मूलवेदी में अभिषेक शांति धारा अमरेश-विनित जैन गंगवाल,1008 श्री पुष्पदंत नाथ भगवान का श्री विहार ओर प्रथम अभिषेक ओर शांतिधारा सुबोध-आकाश जैन गंगवाल,ओर स्वर्ण झारी से अजय-प्रशम जैन सेठी, 1008 श्री आदिनाथ भगवान के वेदी पर 1008 श्री शांतिनाथ भगवान का प्रथम अभिषेक अशोक,विनोद,अर्हम,कथान्ध अजमेरा कोडरमा,बेंगलोर को प्राप्त हुआ।


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