Article- Latest News & Updates | Samridh Jharkhand
<% catList.forEach(function(cat){ %> <%= cat.label %> <% }); %>
<%- node_title %>
Published On
By <%= createdBy.user_fullname %>
<%- node_title %>
Published On
By <%= createdBy.user_fullname %>
<% if(node_description!==false) { %> <%= node_description %>
<% } %> <% catList.forEach(function(cat){ %> <%= cat.label %> <% }); %>
Read More... Success Story: दूरदराज के गांवों से 20,000 फीट ऊंची हिमालयी चोटी तक, दृष्टिबाधित पर्वतारोहियों ने रचा इतिहास
Published On
By Mohit Sinha
पश्चिमी सिंहभूम के दूरदराज गांवों से निकले दृष्टिबाधित पर्वतारोही शेखर गोप और धीरोज कुमार ने लद्दाख में अपने साहस और दृढ़ संकल्प की मिसाल पेश की। टाटा स्टील फाउंडेशन की ‘सबल’ पहल से ब्रेल, मोबिलिटी और डिजिटल कौशल सीखने वाले शेखर ने समुद्र तल से 20,000 फीट से अधिक ऊंची जो-जोंगो चोटी पर सफलतापूर्वक पहुंचकर तिरंगा लहराया। Sumitra Reincarnation Case: जब सुमित्रा की मौत हुई और वह शिवा बनकर लौटी
Published On
By Samridh Media Desk
यह मामला "Scientific Evidence for Reincarnation, NDEs and Karma with Personal Stories" नाम की मुफ़्त किताब से लिया गया है। इस किताब में पुनर्जन्म और NDE (मृत्यु के निकट अनुभव) से जुड़े कई मामले शामिल हैं। आप "Scientific Evidence for Reincarnation, NDEs and Karma with Personal Stories" किताब को सीधे इंटरनेट या इस वेबसाइट: https://evidence-for-reincarnation.weebly.com से मुफ़्त में डाउनलोड कर सकते हैं। 15 अगस्त सिर्फ उत्सव नहीं, राष्ट्रनिर्माण और जिम्मेदारी का संकल्प दिवस भी है
Published On
By Suman Kumari
स्वतंत्रता दिवस केवल तिरंगा फहराने और देशभक्ति के गीत गाने का पर्व नहीं, बल्कि उन वीर शहीदों के बलिदान को याद करने और राष्ट्रनिर्माण का संकल्प लेने का अवसर है। 15 अगस्त 1947 को मिली आजादी अनगिनत स्वतंत्रता सेनानियों के त्याग और संघर्ष का परिणाम थी। तिरंगा केवल आकाश में नहीं, हमारे आचरण में भी लहराए
Published On
By Suman Kumari
स्वतंत्रता दिवस केवल तिरंगा फहराने, राष्ट्रगान गाने और देशभक्ति के गीतों तक सीमित नहीं है। राष्ट्रीय ध्वज भारत के संघर्ष, बलिदान, लोकतांत्रिक मूल्यों और बेहतर भविष्य के सपनों का प्रतीक है। उल्टी चाल चलती दुनिया! क्या हम पर्यावरण की बात करने के अधिकारी भी हैं?
Published On
By Mohit Sinha
धरती पर बढ़ता पर्यावरणीय संकट केवल सरकारों, उद्योगों या बड़ी कंपनियों की जिम्मेदारी नहीं है। हमारी अपनी जीवनशैली और लगातार बढ़ता उपभोग भी इस संकट को गहरा कर रहा है। अधिक उत्पादन के लिए अधिक ऊर्जा, अधिक परिवहन और अधिक प्राकृतिक संसाधनों का इस्तेमाल होता है। Sahibganj News: श्रावणी मेला 2026: शिवगादी धाम के विकास को मिलेगी नई रफ्तार, रोपवे-हेलीपैड की तैयारी
Published On
By Susmita Rani
साहिबगंज के बरहेट स्थित प्रसिद्ध शिवगादी बाबा गजेश्वरनाथ धाम में श्रावणी मेले 2026 का शुभारंभ विधिवत पूजा-अर्चना के साथ हुआ। उद्घाटन समारोह में जिला प्रशासन, जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। उपायुक्त दीपक कुमार दुबे ने श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुविधाओं को प्राथमिकता बताते हुए स्वास्थ्य, पुलिस और मोबाइल मेडिकल यूनिट की व्यवस्था की जानकारी दी। सारकोमा का इलाज अब पहले से अधिक प्रभावी, जागरूकता और समय पर उपचार से बढ़ी उम्मीद
Published On
By Mohit Sinha
जुलाई माह विश्वभर में सारकोमा जागरूकता माह के रूप में मनाया जाता है। सारकोमा एक दुर्लभ लेकिन गंभीर कैंसर है, जो शरीर के कनेक्टिव टिश्यू और हड्डियों में विकसित होता है। विशेषज्ञों का कहना है कि बढ़ती गांठ, लगातार सूजन या हड्डियों में बिना कारण दर्द जैसे लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। पॉलीमर नोटों की ओर बढ़ता भारत, सुरक्षित और टिकाऊ मुद्रा की नई शुरुआत
Published On
By Mohit Sinha
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने मुद्रा प्रणाली को अधिक सुरक्षित और टिकाऊ बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल करते हुए 10 और 20 रुपये के पॉलीमर (प्लास्टिक आधारित) नोटों के बड़े पैमाने पर फील्ड ट्रायल की तैयारी शुरू की है। हर दिल में बसने वाले नायक: जेआरडी टाटा की मानवीय विरासत आज भी प्रेरणास्रोत
Published On
By Mohit Sinha
जेआरडी टाटा केवल एक सफल उद्योगपति नहीं, बल्कि मानवीय मूल्यों, नैतिक नेतृत्व और राष्ट्र निर्माण के प्रतीक थे। उन्होंने कर्मचारियों के सम्मान, नवाचार, सामाजिक उत्तरदायित्व और उत्कृष्ट कार्यसंस्कृति को हमेशा प्राथमिकता दी। हरमू नदी की दर्दभरी कहानी: कभी जीवनदायिनी, आज गंदे नाले में तब्दील
Published On
By Mohit Sinha
रांची की ऐतिहासिक हरमू नदी पर आधारित इस विचारोत्तेजक लेख में लेखक अरविंद शर्मा ने नदी की बदहाल स्थिति पर गंभीर चिंता व्यक्त की है। कभी स्वच्छ जल, बाढ़ और सामाजिक जीवन का केंद्र रही हरमू आज गंदे नाले में बदल चुकी है। दुनिया वैसी ही बन जाती है, जैसी हम चाहते हैं
Published On
By Mohit Sinha
दुनिया वैसी ही बन जाती है, जैसी हम चाहते हैं—राजीव थेपड़ा का यह विचारपरक लेख इंसानी इच्छाओं, लालच, अहंकार, हिंसा, शोषण और सामाजिक विसंगतियों के बीच आत्ममंथन का आह्वान करता है। 