समाज
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Read More... जमुआ: एक्साइज इंस्पेक्टर सुबोध कुशवाहा की ‘प्रयास पहल’ संस्था से संवर रहा हजारों बच्चों का भविष्य, बरगद के पेड़ से शुरू हुआ सफर
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By Mohit Sinha
जमुआ में एक्साइज इंस्पेक्टर सुबोध कुशवाहा द्वारा शुरू की गई ‘प्रयास पहल’ आज ग्रामीण शिक्षा के क्षेत्र में एक बड़ी मिसाल बन चुकी है। कोरोना काल में बरगद के पेड़ के नीचे शुरू हुई यह पहल अब 10 शिक्षण केंद्रों तक फैल चुकी है। संस्था हजारों बच्चों को निशुल्क शिक्षा, पुस्तकालय सुविधा, खेल, स्वास्थ्य शिविर और पौधारोपण जैसे अभियानों से जोड़ रही है। गाँव की चौपाल से डिजिटल समाज तक: बदलते भारत की नई कहानी
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By Mohit Sinha
भारतीय समाज की पहचान सदियों तक गाँवों की चौपालों, सामूहिक जीवनशैली और आत्मीय संबंधों से रही है। लेकिन तकनीकी क्रांति और डिजिटल युग ने समाज की संरचना को तेजी से बदल दिया है। अब संवाद चौपालों से निकलकर मोबाइल स्क्रीन और सोशल मीडिया तक पहुंच गया है। साइबर ठगी में गया पैसा वापस पाने का सरकारी रास्ता, जिससे आज भी अनजान हैं अधिकांश लोग
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By Mohit Sinha
देश में बढ़ते साइबर अपराध के बीच अब ठगी का पैसा वापस पाने का सरकारी रास्ता भी मौजूद है। गृह मंत्रालय के राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल और 1930 हेल्पलाइन के जरिए पीड़ित समय रहते शिकायत दर्ज कर अपने पैसे को फ्रीज करवा सकते हैं। बेज़ुबानों को पिला रहे पानी, इंसानियत की मिसाल बनी “दाना-पानी” पहल
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By Mohit Sinha
भीषण गर्मी में जब इंसान सुरक्षित स्थानों और पानी की व्यवस्था कर लेता है, वहीं बेजुबान पक्षी और जानवर प्यास से बेहाल रहते हैं। इसी संवेदनशीलता को समझते हुए शहर की संस्था बीइंग रेस्पॉन्सिबल द्वारा “दाना-पानी” अभियान चलाया जा रहा है। इस वर्ष संस्था ने 200 से अधिक मिट्टी के सकोरे और दाने वितरित किए हैं। बैंक के भीतर से बढ़ता साइबर खतरा: हालिया मामलों ने क्यों बढ़ाई चिंता
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By Mohit Sinha
भारत में साइबर फ्रॉड के मामलों में लगातार वृद्धि हो रही है, लेकिन अब एक नया खतरा सामने आया है—बैंकिंग सिस्टम के भीतर से होने वाला इनसाइडर फ्रॉड। हालिया मामलों में बैंक कर्मचारियों की मिलीभगत से म्यूल अकाउंट के जरिए करोड़ों रुपये की ठगी को अंजाम दिया गया। अंधविश्वास पर हर साल 2 करोड़ खर्च, फिर भी नहीं थम रही मौतें; जानिए 4 साल में कितनी जानें गईं
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By Samridh Media Desk
समृद्ध डेस्क: झारखंड में अंधविश्वास आज भी एक बड़ी सामाजिक समस्या बना हुआ है, जहां हर साल कई निर्दोष लोग इसकी भेंट चढ़ जाते हैं. सरकारी स्तर पर जागरूकता और रोकथाम के लिए करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं,... “बस देख लेंगे”: भारतीय टालमटोल संस्कृति पर तीखा व्यंग्य
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By Mohit Sinha
“बस देख लेंगे” शीर्षक यह व्यंग्यात्मक लेख भारतीय समाज में प्रचलित उस मानसिकता पर रोशनी डालता है, जहाँ समस्याओं का समाधान करने की बजाय उन्हें टालने की प्रवृत्ति अधिक दिखाई देती है। घर के छोटे कामों से लेकर दफ्तर और राजनीति तक, यह तीन शब्दों का वाक्य अक्सर जिम्मेदारियों को आगे बढ़ाने का माध्यम बन जाता है। कुपोषण और आदिवासी बच्चे: योजनाएं कागजों पर ही? NFHS-5 आंकड़े चौंकाने वाले
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By Sujit Sinha
समृद्ध डेस्क: झारखंड के आदिवासी इलाकों में कुपोषण आज भी एक गंभीर चुनौती बना हुआ है, जहां सरकारी योजनाएं कागजों पर तो चमक रही हैं, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयान करती हैं। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (एनएफएचएस-5) के... सोशल मीडिया ट्रोलिंग: अभिव्यक्ति की आज़ादी या डिजिटल बदतमीज़ी? ट्रोलिंग केस और कानून
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By Samridh Media Desk
समृद्ध डेस्क: सोशल मीडिया ट्रोलिंग आज हर आम इंसान से लेकर बड़े सेलिब्रिटी तक की जिंदगी में घुस चुकी है। ये सवाल उठता है कि क्या ये सिर्फ अपनी राय रखने की आजादी है या फिर डिजिटल दुनिया में बेलगाम... दृष्टिकोण: वर्ष बहुत कुछ सिखाते हैं, जो दिन कभी नहीं जानते
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By Sujit Sinha
समृद्ध डेस्क: समय सिर्फ़ बीतता नहीं है, वह इंसान को गढ़ता और परखता भी है। हर दिन हमें छोटे-छोटे अनुभव देता है, लेकिन पूरे साल के गुज़र जाने के बाद जो परिपक्वता, धैर्य और संतुलन हमें मिलता है, वह किसी... दृष्टिकोण: विचार एक दुनिया खोजता है और एक बनाता भी है
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By Sujit Sinha
समृद्ध डेस्क: इंसान की सबसे बड़ी ताकत उसके विचारों में छिपी है। यह विचार ही हैं जो उसे बाकी जीव-जंतुओं से अलग बनाते हैं। विचार केवल वास्तविकता को समझते नहीं, बल्कि नई वास्तविकताएँ गढ़ते भी हैं। यही कारण है... दृष्टिकोण: अपराध और समाज व्यवस्था, क्या अपराधी समाज की उपज है या उसकी विफलता?
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By Sujit Sinha
समृद्ध डेस्क: अपराध मानव समाज की सबसे पुरानी और पेचीदा समस्याओं में से एक है। समाज में अपराध के विभिन्न रूप देखने को मिलते हैं चोरी, हत्या, धोखाधड़ी, बलात्कार, और अन्य अपराध। प्रश्न उठता है कि क्या अपराधी वास्तव में... 