धर्म
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Read More... सरहुल: एक ऐसा पर्व जो सिखाता है जिंदगी जीने का सही तरीका
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By Mohit Sinha
सरहुल झारखंड का एक प्रमुख आदिवासी पर्व है, जो प्रकृति और मानव के गहरे संबंध का प्रतीक है। साल वृक्ष की पूजा के माध्यम से यह पर्व जल, जंगल और जमीन के प्रति आभार प्रकट करता है। उरांव, मुंडा और हो जनजाति इसे पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाती हैं। Chaitra Amavasya 2026: 18 या 19 मार्च? जानिए सही तिथि, स्नान-दान का समय और पितृ कर्म का शुभ मुहूर्त
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By Samridh Desk
समृद्ध डेस्क: चैत्र अमावस्या 2026 को लेकर हर तरफ चर्चा जोरों पर है, खासकर 18 और 19 मार्च के बीच तिथि को लेकर थोड़ा कन्फ्यूजन बना हुआ है। पंचांग के मुताबिक, इस बार अमावस्या तिथि 18 मार्च सुबह 8:26 बजे... Char Dham Yatra 2026: ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन शुरू, 19 अप्रैल से खुलेंगे कपाट
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By Samridh Desk
देहरादून: उत्तराखंड में चारधाम यात्रा की शुरुआत होने वाली है, जो हर साल लाखों श्रद्धालुओं को अपनी ओर खींचती है। इस बार 19 अप्रैल से यमुनोत्री और गंगोत्री धाम के कपाट खुलेंगे, उसके बाद 22 अप्रैल को केदारनाथ और 23... महाशिवरात्रि 2026: 15 या 16 फरवरी? सही तारीख, मुहूर्त और पूजा विधि पूरी जानकारी
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By Samridh Desk
समृद्ध डेस्क: महाशिवरात्रि 2026 को लेकर भक्तों में खासी उत्सुकता है, खासकर यह जानने को कि आखिर 15 फरवरी को मनाई जाएगी या 16 फरवरी को। दृक पंचांग के मुताबिक फाल्गुन कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि 15 फरवरी शाम 5:04... Mahashivratri special 2026 : तांडव की लय और मांदर की थाप
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By Mohit Sinha
यह लेख मांदर की थाप और शिव तांडव के माध्यम से आदिवासी संस्कृति, प्रकृति और जीवन की लय के बीच के संबंध को दर्शाता है। इसमें बताया गया है कि नृत्य और संगीत केवल कला नहीं, बल्कि जीवन की गति और सामूहिक चेतना का उत्सव हैं। लेख मनुष्य और प्रकृति के बीच के प्राचीन संबंध को पुनः समझने का संदेश देता है। धर्म–आस्था का अनूठा संगम: देवघर में भव्य श्रीमद्भागवत कथा और अतिरुद्र महायज्ञ, संतों की उपस्थिति से गूंजा वातावरण
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By Anshika Ambasta
देवघर के सर्राफ स्कूल मैदान में 108 कुण्डीय अतिरुद्र महायज्ञ और श्रीमद्भागवत कथा का नौ दिवसीय भव्य आयोजन हो रहा है, जिसमें भारी संख्या में भक्त उमड़ रहे हैं। वैदिक ऊर्जा और दिव्यता से पूरा वातावरण आध्यात्मिक रंग में रंगा है। Indresh Upadhyay Wedding: पौष मास की शुरुआत में क्यों है शादी, जानें असली ज्योतिषीय वजह
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By Samridh Desk
कथा वाचक इंद्रेश उपाध्याय की शादी 5 दिसंबर 2025 को जयपुर के ताज आमेर होटल में हो रही है, जिसके लिए उनकी भव्य बारात मथुरा से जयपुर पहुंच चुकी है। इस विवाह को लेकर सबसे बड़ी चर्चा यह है कि... तुलसी विवाह 2025: जानिए कब है शुभ तिथि, पूजन विधि, मुहूर्त और पौराणिक कथा
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By Samridh Desk
समृद्ध डेस्क: हिंदू धर्म में तुलसी विवाह का पर्व अत्यंत पवित्र और शुभ माना जाता है। यह पावन अनुष्ठान कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि पर मनाया जाता है, जब तुलसी माता का विवाह भगवान विष्णु के शालिग्राम... Chhath Puja Vrat: छठी मैया की कथा, पूजा विधि, पढ़ें पूरी कहानी और जानें छठ पूजा का महत्व
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By Samridh Desk
समृद्ध डेस्क: छठ पूजा व्रत कथा का महत्व और पूरी कहानी भारतीय संस्कृति में छठ पूजा एक अत्यंत पावन पर्व है, जिसे विशेष रूप से उत्तर भारत, बिहार, झारखंड और उत्तर प्रदेश में भक्ति भाव से मनाया जाता है। इस... दीपावली कल, वृष लग्न शाम 6.51 से रात 8.48 बजे तक मां लक्ष्मी की सर्वश्रेष्ठ पूजा
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By Samridh Desk
कार्तिक कृष्ण पक्ष त्रयोदशी 18 अक्टूबर को धनतेरस का त्योहार मनाया गया और इसके साथ ही दीपोत्सव की शुरुआत हुई। इस वर्ष दीपावली 20 अक्टूबर को मनाई जाएगी, जो रात्रि व्यापिनी अमावस्या के दिन पड़ेगी। ज्योतिष आचार्य प्रणव मिश्रा के अनुसार, माता लक्ष्मी की पूजा के लिए वृष लग्न सबसे शुभ माना गया है। घरों और मंदिरों में विधिवत पूजा-अर्चना की जाएगी, जिसमें गणेशजी और लक्ष्मीजी की प्रतिमा स्थापित कर पंचामृत और गंगाजल से अभिषेक, शृंगार, भोग और आरती शामिल है। पूजा के दौरान शुभ मुहूर्त और चौघड़िया का पालन किया जाएगा। यह पर्व जीवन में समृद्धि, सौभाग्य, यश और प्रेम बढ़ाने का संदेश देता है। दीपावली पर दीप जलाने की परंपरा: आस्था और शुभता का अद्भुत संगम
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By Mohit Sinha
दीपावली पर दीप जलाना आस्था, परंपरा और शुभता का प्रतीक है। धनतेरस की शाम यम दीपदान से अकाल मृत्यु का भय दूर होता है, जबकि घर के विभिन्न स्थानों पर दीप जलाने से समृद्धि, सकारात्मक ऊर्जा और ग्रह शांति प्राप्त होती है। धनतेरस: समृद्धि, स्वास्थ्य, आस्था और वैश्विक सांस्कृतिक एकता का प्रतीक पर्व
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By Mohit Sinha
धनतेरस भारत का केवल धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि समृद्धि, स्वास्थ्य, पर्यावरणीय संतुलन और सामाजिक एकजुटता का वैश्विक प्रतीक बन चुका है। वर्ष 2025 में यह पर्व 18 अक्टूबर को मनाया जाएगा। वैदिक परंपरा से जुड़ा यह दिन भगवान धन्वंतरि के प्रकट होने का प्रतीक है, जो आयुर्वेद और आरोग्य के देवता माने जाते हैं। आधुनिक युग में धनतेरस आर्थिक उत्सव के रूप में भी उभरा है, जहाँ सोना, चांदी, बर्तन और इलेक्ट्रॉनिक वस्तुओं की खरीद शुभ मानी जाती है। यह दिन “ग्रीन धनतेरस” और “ग्लोबल आयुर्वेदा वैलनेस डे” जैसी पहलों से पर्यावरण और स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता फैलाता है। साथ ही डिजिटल युग में यह त्योहार ऑनलाइन व वित्तीय निवेश के नए स्वरूपों से जुड़ गया है। धनतेरस आज नारी सशक्तिकरण, वित्तीय साक्षरता और वैश्विक भारतीय संस्कृति का प्रतीक बनकर नई चेतना और साझा समृद्धि का संदेश दे रहा है। 