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Read More... राज्यसभा चुनाव में बड़ा खेल! क्रॉस वोटिंग से पलट सकता है पूरा समीकरण, नाथवानी की बढ़ी बढ़त?
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By Mohit Sinha
झारखंड राज्यसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। भाजपा समर्थित निर्दलीय प्रत्याशी परिमल नाथवानी की संभावित जीत और क्रॉस वोटिंग की चर्चाओं ने चुनावी मुकाबले को रोचक बना दिया है। इतिहास नहीं, जनता को जवाब चाहिए; भाजपा के 12 साल का हिसाब चाहिए: विजय शंकर नायक
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By Mohit Sinha
झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमिटी के प्रदेश प्रवक्ता विजय शंकर नायक ने अपने लेख में भाजपा सरकार के 12 वर्षों के कार्यकाल पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने रोजगार, महंगाई, किसानों की आय, नोटबंदी, जीएसटी, कोविड प्रबंधन और लोकतांत्रिक संस्थाओं की स्थिति जैसे मुद्दों को उठाते हुए सरकार से जवाब मांगा है। राज्यसभा चुनाव: भाजपा ने क्यों और कैसे बदली रणनीति
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By Mohit Sinha
झारखंड में राज्यसभा की दो सीटों के लिए चुनावी मुकाबला रोचक हो गया है। भाजपा ने अपना अधिकृत उम्मीदवार नहीं उतारते हुए निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नाथवानी को समर्थन देकर नई रणनीति अपनाई है। मोदी सरकार के 12 साल: विकसित झारखंड से विकसित भारत का संकल्प
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By Susmita Rani
मोदी सरकार के 12 वर्ष पूरे होने के अवसर पर भाजपा झारखंड प्रदेश अध्यक्ष एवं सांसद आदित्य साहू ने झारखंड के विकास में केंद्र सरकार की भूमिका को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने झारखंड को अलग राज्य का दर्जा देकर नई पहचान दी, जबकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विकास, आधारभूत संरचना, जनकल्याण और जनजातीय सम्मान के क्षेत्र में नई दिशा प्रदान की। चुनाव लड़ने से क्यों पीछे हटे धीरज साहू, राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज
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By Mohit Sinha
झारखंड कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व राज्यसभा सांसद धीरज साहू के राज्यसभा चुनाव नहीं लड़ने के फैसले ने राजनीतिक चर्चाओं को तेज कर दिया है। करीब तीन वर्ष पहले उनके ठिकानों से 400 करोड़ रुपये नकद बरामद होने के बाद उनके राजनीतिक भविष्य पर सवाल उठने लगे थे। मतदाता सूची पुनरीक्षण पर सुप्रीम कोर्ट की बड़ी मुहर, चुनाव आयोग को मिली संवैधानिक ताकत
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By Mohit Sinha
सुप्रीम Court ने विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को संवैधानिक और लोकतंत्र के लिए आवश्यक बताते हुए चुनाव आयोग के अधिकारों को मान्यता दी है। अदालत ने कहा कि स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव के लिए मतदाता सूची का शुद्ध और विश्वसनीय होना जरूरी है। Opinion: वैश्विक आर्थिक अस्थिरता के दौर में, भारत क्यों बना हुआ है मजबूत?
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By Mohit Sinha
दुनिया इस समय युद्ध, ऊर्जा संकट, महंगाई और व्यापारिक अस्थिरता जैसे गंभीर आर्थिक संकटों से जूझ रही है। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के कारण तेल और गैस की कीमतों में भारी वृद्धि हुई है, जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ गया है। विश्व बैंक ने चेतावनी दी है कि संकट लंबा चला तो वैश्विक विकास दर प्रभावित हो सकती है। भारत की पहली सभ्यता आदिवासी थी, “वनवासी” राजनीति से सरना अस्मिता पर खतरा
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By Mohit Sinha
वरिष्ठ कांग्रेस नेता विजय शंकर नायक ने अपने लेख में दावा किया है कि भारत की सबसे पहली सभ्यता आदिवासी सभ्यता थी और बाद में वैदिक आर्य संस्कृति एवं हिंदू धर्म का विकास हुआ। उन्होंने सरना धर्म को प्रकृति आधारित सबसे प्राचीन जीवन दर्शन बताते हुए “वनवासी” शब्द के प्रयोग को आदिवासी अस्मिता कमजोर करने की राजनीतिक कोशिश बताया। जब ओस्लो में एक सवाल गूंजा : प्रेस स्वतंत्रता, सत्ता और लोकतंत्र की नई बहस
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By Mohit Sinha
ओस्लो में भारत और नॉर्वे के प्रधानमंत्रियों की संयुक्त प्रेस वार्ता के दौरान पूछे गए एक सवाल ने प्रेस स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक जवाबदेही पर नई वैश्विक बहस छेड़ दी है। नॉर्वे की पत्रकार हेल्ले ल्यांग स्वेन्डसेन द्वारा पूछे गए सवाल के बाद सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएँ सामने आईं। क्या गाय को ‘राष्ट्रीय पशु’ घोषित करना सही होगा? जानिए पक्ष और विपक्ष
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By Susmita Rani
भारत में गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने की मांग समय-समय पर उठती रही है। हिंदू धर्म और भारतीय ग्रामीण जीवन में गाय का विशेष महत्व माना जाता है, लेकिन इस मुद्दे से सामाजिक, संवैधानिक, आर्थिक और प्रशासनिक जटिलताएं भी जुड़ी हैं। स्क्रीन पर प्रतिरोध: जब मीम बन जाए लोकतंत्र का आईना
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By Mohit Sinha
“स्क्रीन पर प्रतिरोध: जब मीम बन जाए लोकतंत्र का आईना” आलेख में लेखक संजय कुमार धीरज ने डिजिटल दौर में उभर रहे राजनीतिक व्यंग्य, मीम संस्कृति और युवाओं के असंतोष का विश्लेषण किया है। आखिर क्यों बदले गए तीन जिलों के उपायुक्त?
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By Mohit Sinha
झारखंड में हाल के दिनों में बड़े पैमाने पर हो रही ट्रांसफर-पोस्टिंग को लेकर सवाल उठने लगे हैं। गढ़वा, देवघर और खूंटी के डीसी को एक महीने के भीतर बदले जाने से प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं तेज हैं। लेख में दावा किया गया है कि बिना स्पष्ट कारण अधिकारियों को हटाने से उनके मनोबल पर असर पड़ता है और विकास कार्य प्रभावित होते हैं। 