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Read More... “बस देख लेंगे”: भारतीय टालमटोल संस्कृति पर तीखा व्यंग्य
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By Mohit Sinha
“बस देख लेंगे” शीर्षक यह व्यंग्यात्मक लेख भारतीय समाज में प्रचलित उस मानसिकता पर रोशनी डालता है, जहाँ समस्याओं का समाधान करने की बजाय उन्हें टालने की प्रवृत्ति अधिक दिखाई देती है। घर के छोटे कामों से लेकर दफ्तर और राजनीति तक, यह तीन शब्दों का वाक्य अक्सर जिम्मेदारियों को आगे बढ़ाने का माध्यम बन जाता है। Opinion: नीतीश मतलब-सुशासन की शैली
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By Anjali Sinha
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का लगभग दो दशकों का सक्रिय प्रशासनिक सफर अब राज्यसभा की ओर बढ़ रहा है। 2005 से शुरू हुए उनके कार्यकाल में बिहार ने अपराध और अराजकता के दौर से निकलकर विकास और सुशासन की नई परिभाषा देखी। 10 बार मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने वाले नीतीश कुमार ने महिला आरक्षण, साइकिल योजना और शराबबंदी जैसे फैसलों से राज्य की सामाजिक संरचना को गहराई से प्रभावित किया। अब जब वे संसदीय राजनीति के नए सदन की ओर कदम बढ़ा रहे हैं, बिहार की राजनीति एक बड़े संक्रमण काल और नए युग की आहट महसूस कर रही है। Opinion : मोदी–योगी की मौजूदगी में रैपिड रेल उद्घाटन बना राजनीतिक शक्ति प्रदर्शन
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By Susmita Rani
मेरठ में रैपिड रेल और मेट्रो परियोजना का उद्घाटन केवल विकास कार्यक्रम नहीं, बल्कि भाजपा की 2027 विधानसभा चुनाव की रणनीति का संकेत बना। मोदी और योगी की मौजूदगी में विकास, कानून-व्यवस्था और डबल इंजन सरकार के संदेश के जरिए राजनीतिक समीकरण साधे गए। Opinion : विदेश दौरे के पहले दिन योगी आदित्यनाथ को बड़ी निवेश सफलता
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By अजय कुमार, लखनऊ
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विदेश दौरे के दौरान सिंगापुर में 6650 करोड़ रुपये के तीन महत्वपूर्ण निवेश समझौते हुए। इन समझौतों से स्मार्ट सिटी, जल प्रबंधन, कौशल विकास और शहरी विकास परियोजनाओं को गति मिलेगी तथा उत्तर प्रदेश में रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे। झारखण्ड का बजट: अंतिम पायदान पर खड़े समाज के विकास का सच्चा आईना बने
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By Susmita Rani
झारखण्ड का बजट तभी ऐतिहासिक होगा जब वह अंतिम पायदान पर खड़े दलित, आदिवासी, मूलवासी और गरीब समाज के विकास का वास्तविक प्रतिबिंब बने। शिक्षा, स्वास्थ्य, भूमि अधिकार, रोजगार और सामाजिक सुरक्षा पर केंद्रित बजट ही राज्य को सामाजिक न्याय का मॉडल बना सकता है। Opinion : ग्रेट निकोबार मेगा प्रोजेक्ट पर विकास बनाम पर्यावरण की जंग
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By अजय कुमार, लखनऊ
ग्रेट निकोबार द्वीप पर प्रस्तावित 90 हजार करोड़ रुपये की मेगा इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजना को नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल से मंजूरी मिलने के बाद विकास और पर्यावरण संरक्षण को लेकर बहस तेज हो गई है। यह परियोजना भारत को समुद्री व्यापार और रणनीतिक शक्ति में नई ऊंचाई दे सकती है, लेकिन इससे जैव विविधता और आदिवासी समुदायों पर खतरे की आशंका भी जताई जा रही है। Mahashivratri special 2026 : तांडव की लय और मांदर की थाप
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By Mohit Sinha
यह लेख मांदर की थाप और शिव तांडव के माध्यम से आदिवासी संस्कृति, प्रकृति और जीवन की लय के बीच के संबंध को दर्शाता है। इसमें बताया गया है कि नृत्य और संगीत केवल कला नहीं, बल्कि जीवन की गति और सामूहिक चेतना का उत्सव हैं। लेख मनुष्य और प्रकृति के बीच के प्राचीन संबंध को पुनः समझने का संदेश देता है। भारत–अमेरिका ट्रेड डील: ‘आत्मनिर्भर भारत’ नहीं, आर्थिक आत्मसमर्पण है : विजय शंकर नायक
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By Mohit Sinha
भारत–अमेरिका ट्रेड डील पर कांग्रेस नेता विजय शंकर नायक ने सरकार की आर्थिक नीतियों पर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि यह समझौता किसानों, MSME उद्योगों और रोजगार के लिए नुकसानदायक हो सकता है। Opinion : 20 साल बाद मायावती का दलित-ब्राह्मण-मुस्लिम फार्मूला फिर सक्रिय
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By Susmita Rani
मायावती एक बार फिर 2007 के दलित-ब्राह्मण-मुस्लिम सोशल इंजीनियरिंग फार्मूले को 2027 विधानसभा चुनाव के लिए सक्रिय कर रही हैं। ब्राह्मण नेताओं की बसपा में एंट्री और मुस्लिम वोटों का झुकाव इस रणनीति का संकेत है। Opinion : भारतीय लोकतंत्र में मुस्लिम नेतृत्व: नीति, संगठन और सामाजिक न्याय में योगदान की गहन समीक्षा
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By Susmita Rani
यह लेख भारतीय राजनीति में मुस्लिम नेताओं की विविध भूमिका और प्रभाव को उजागर करता है। स्वतंत्रता आंदोलन से लेकर समकालीन राजनीति तक, ये नेता नीति, संगठन और सामाजिक न्याय में महत्वपूर्ण योगदान देते आए हैं। Opinion : संभल की सियासत में बर्क और नवाब की जंग से अखिलेश यादव की बढ़ी टेंशन
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By Susmita Rani
संभल विधानसभा सीट पर समाजवादी पार्टी के भीतर बर्क और नवाब परिवार के बीच राजनीतिक टकराव खुलकर सामने आ गया है। मौलाना ममलूकुर्रहमान बर्क के चुनाव लड़ने के ऐलान से अखिलेश यादव की मुश्किलें बढ़ गई हैं। मुस्लिम वोट बैंक और पार्टी एकजुटता पर संकट गहराता दिख रहा है। इस टकराव का फायदा भाजपा और बसपा को मिल सकता है। Opinion : संसद के मकर द्वार पर गुस्से का विस्फोट और राजनीति की मर्यादा पर उठते सवाल
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By अजय कुमार, लखनऊ
4 फरवरी को संसद के मकर द्वार पर राहुल गांधी और केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू के बीच हुई तीखी नोकझोंक ने भारतीय राजनीति की भाषा और मर्यादा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए। यह विवाद अब व्यक्तिगत आरोपों से आगे बढ़कर राष्ट्रीय बहस बन चुका है। 