पर्यावरण
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Read More... ग्रीनहाउस गैस नीति के साथ बदल रही भारतीय राजनीति की दिशा
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By Anshika Ambasta
भारत में क्लाइमेट चेंज, कार्बन क्रेडिट और ग्रीनहाउस गैस नीति अब राजनीति और विकास के प्रमुख मुद्दे बनते जा रहे हैं। नेताओं और रणनीतिकारों के बीच ग्रीन पॉलिटिक्स की समझ तेजी से बढ़ रही है। Climate कहानी : सिर्फ धुआँ नहीं, मौसम भी बढ़ा रहा शहरों की हवा में ज़हर
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By Climate कहानी
भारत के बड़े शहरों में बढ़ते वायु प्रदूषण को अक्सर वाहनों, उद्योगों और कचरा जलाने जैसे कारणों से जोड़ा जाता है, लेकिन एक नई रिपोर्ट बताती है कि मौसम भी इसमें बड़ी भूमिका निभाता है। पर्यावरण संस्था Climate Trends की स्टडी के अनुसार मौसम की स्थितियां प्रदूषण के स्तर को 40 प्रतिशत तक प्रभावित कर सकती हैं। चंद्र ग्रहण लाइव 2026: मोबाइल पर LIVE कैसे देखें ब्लड मून? जानिए समय और पूरा तरीका
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By Samridh Desk
नई दिल्ली: 3 मार्च 2026 को साल का पहला चंद्र ग्रहण लगने वाला है, जो भारत समेत एशिया, ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका के कई हिस्सों में दिखाई देगा. यह पूर्ण चंद्र ग्रहण होने के कारण चंद्रमा गहरे लाल रंग में बदल... ईस्टर्न इंडिया के ग्रेनाइट अपलैंड्स में ‘थर्मल रिफ्यूजिया’ की खोज
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By Mohit Sinha
पूर्वी भारत के ग्रेनाइट अपलैंड्स में किए गए नए फ़ील्ड अध्ययन से पता चला है कि ये पथरीले क्षेत्र गर्मी के दौरान प्राकृतिक थर्मल रिफ्यूजिया का निर्माण करते हैं। झारखंड के संथाल परगना में हुए सर्वेक्षण में पाया गया कि दरारें, झाड़ियाँ और चट्टानी संरचनाएँ तापमान को कम कर जीवों को सुरक्षित माइक्रोहैबिटैट प्रदान करती हैं। बिजली ट्रांज़िशन पर नई रिपोर्ट: 21 राज्यों की 21 अलग-अलग रफ्तार
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By Susmita Rani
Institute for Energy Economics and Financial Analysis (IEEFA) और Ember की संयुक्त रिपोर्ट Indian States’ Electricity Transition 2026 में बताया गया है कि भारत में बिजली संक्रमण अब एकसमान नहीं बल्कि मल्टी-स्पीड ट्रांजिशन बन चुका है। 21 राज्यों के आकलन में कर्नाटक डीकार्बनाइजेशन में आगे है, जबकि दिल्ली ईवी अपनाने में शीर्ष पर है। रिपोर्ट में नवीकरणीय ऊर्जा, डिस्कॉम सुधार, स्मार्ट मीटर, ग्रीन टैरिफ और ऊर्जा भंडारण जैसे पहलुओं पर राज्यों की प्रगति को रेखांकित किया गया है। Ring of Fire Solar Eclipse Today: भारत में दिखेगा या रहेगा अदृश्य? इस दिन आएगा ब्लड मून
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By Samridh Desk
वॉशिंगटन: 17 फरवरी 2026 को लगने वाला सूर्य ग्रहण यानी आज पूरी दुनिया के कुछ हिस्सों में आसमान में रिंग ऑफ फायर का शानदार नजारा पेश कर रहा है। यह वलयाकार सूर्य ग्रहण है, जहां चंद्रमा सूर्य को पूरी तरह... 2026 का पहला सूर्यग्रहण: Ring of Fire दिखेगा आसमान में, जानें समय और कहां दिखेगा
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By Samridh Desk
वॉशिंगटन: 17 फरवरी 2026 को साल का पहला सूर्यग्रहण धरती पर दिखाई देगा, जो खास वलयाकार प्रकार का होगा और आसमान में सूरज को 'रिंग ऑफ फायर' यानी आग के छल्ले जैसा बना देगा. यह दुर्लभ खगोलीय घटना तब घटित... मध्य प्रदेश के कूनो पार्क में फिर गूंजी खुशखबरी, चीता आशा बनी मां
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By Mohit Sinha
कूनो राष्ट्रीय उद्यान में मादा चीता आशा ने पांच शावकों को जन्म देकर चीता संरक्षण अभियान को नई सफलता दिलाई है। सभी शावक स्वस्थ हैं और विशेषज्ञ टीम उनकी निगरानी कर रही है। इस उपलब्धि से पार्क में चीतों की संख्या बढ़ गई है। Climate कहानी : भविष्य की तकनीक पर दांव, आज की कटौती गायब, कार्बन रिमूवल पर ऑक्सफोर्ड की सख़्त चेतावनी
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By Climate कहानी
ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय की नई स्टडी चेतावनी देती है कि भविष्य की कार्बन रिमूवल तकनीकों के भरोसे आज उत्सर्जन घटाने को टालना जलवायु और कानून दोनों के लिए खतरनाक हो सकता है। रिपोर्ट कहती है कि निकट अवधि में तेज़ एमिशन कटौती अनिवार्य है। Jharkhand Waterfalls: झारखंड के प्रमुख वाटरफॉल, नाम, स्थान और पूरी जानकारी
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By Samridh Desk
समृद्ध डेस्क: झारखंड को “जलप्रपातों की भूमि” कहा जाए तो यह अतिशयोक्ति नहीं होगी। घने जंगल, पहाड़ी पठार और बहती नदियां मिलकर यहां ऐसे-ऐसे वाटरफॉल बनाती हैं, जो न केवल पर्यटन की पहचान हैं बल्कि राज्य की भौगोलिक संरचना को... ऑस्ट्रेलिया पर बढ़ती निर्भरता से भारत की स्टील इंडस्ट्री पर संकट के बादल
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By Climate कहानी
IEEFA की रिपोर्ट के मुताबिक भारत की स्टील इंडस्ट्री ऑस्ट्रेलिया के मेट कोल पर अत्यधिक निर्भर है, जबकि वहां कानूनी और जलवायु दबाव बढ़ने से सप्लाई जोखिम गहराता जा रहा है। रिपोर्ट चेतावनी देती है कि भविष्य में कोयला महंगा और कम उपलब्ध हो सकता है, जिससे भारत के स्टील सेक्टर पर बड़ा आर्थिक असर पड़ेगा। समाधान के रूप में स्क्रैप आधारित EAF, ग्रीन हाइड्रोजन और लो-कार्बन तकनीक अपनाने की जरूरत बताई गई है। climate कहानी : अब भी बचाया जा सकता है 1.5°c का लक्ष्य, नई रिपोर्ट ने दिखाई उम्मीद की राह
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By Samridh Desk
क्लाइमेट एनालिटिक्स की नई रिपोर्ट “Rescuing 1.5°C” ने उम्मीद जताई है कि दुनिया अब भी वैश्विक तापमान वृद्धि को 1.5°C के भीतर सीमित कर सकती है, यदि तुरंत निर्णायक कदम उठाए जाएँ। रिपोर्ट के अनुसार, 2045 तक CO₂ उत्सर्जन को नेट-ज़ीरो पर लाना और 2050 तक दो-तिहाई ऊर्जा मांग को बिजली से पूरा करना जरूरी है। विशेषज्ञों का कहना है कि अभी भी हालात पलटने की संभावना है, बशर्ते वैश्विक स्तर पर त्वरित कार्रवाई हो। 