ग्लोबल वॉर्मिंग के कारण भीषण गर्मी से जूझ रहे दो अरब लोग: रिपोर्ट
गर्मी की घटनाओं की संभावना अब औसतन 21 गुना अधिक हो गई है
ये आंकड़े यह स्पष्ट करते हैं कि यदि हम वैश्विक तापन (ग्लोबल वॉर्मिंग) के प्रभावों को कम करने के लिए तत्काल कदम नहीं उठाते हैं, तो दुनिया भर में लोगों को और अधिक गंभीर स्वास्थ्य और पर्यावरणीय खतरों का सामना करना पड़ेगा।
एक नई रिपोर्ट के अनुसार, जून से अगस्त 2024 के बीच, दुनिया भर में लगभग 2 अरब लोग (वैश्विक जनसंख्या का करीब 25%) ऐसे तापमान का सामना कर रहे थे, जो स्वास्थ्य के लिए खतरनाक थे और इनमें जलवायु परिवर्तन का सीधा असर देखा गया। इन तीन महीनों के दौरान, हर चार में से एक व्यक्ति को प्रतिदिन जलवायु परिवर्तन द्वारा प्रेरित खतरनाक गर्मी का सामना करना पड़ा। इसके पीछे मुख्य रूप से कोयला, तेल और गैस जैसे जीवाश्म ईंधनों के जलने से उत्पन्न कार्बन प्रदूषण जिम्मेदार है।
वैश्विक रिकॉर्ड गर्मी
क्लाइमेट सेंट्रल द्वारा जारी यह रिपोर्ट बताती है कि 72 देशों में इस साल गर्मियों का तापमान 1970 के बाद का सबसे अधिक दर्ज किया गया। इनमें से 180 शहर जो उत्तरी गोलार्ध में स्थित हैं, भीषण गर्मी की चपेट में आए। कार्बन प्रदूषण के चलते इस तरह की गर्मी की घटनाओं की संभावना अब औसतन 21 गुना अधिक हो गई है।
भारत पर प्रभाव

स्वास्थ्य पर खतरा
भविष्य की चिंता और जलवायु परिवर्तन का प्रभाव

ये आंकड़े यह स्पष्ट करते हैं कि यदि हम वैश्विक तापन (ग्लोबल वॉर्मिंग) के प्रभावों को कम करने के लिए तत्काल कदम नहीं उठाते हैं, तो दुनिया भर में लोगों को और अधिक गंभीर स्वास्थ्य और पर्यावरणीय खतरों का सामना करना पड़ेगा।


