Climate Change
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Read More... आ गया सुपर अलनीनो! बढ़ी IMD की चिंता, कहीं सूखा तो कहीं बाढ़; जानिए क्या होगा असर
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By Samridh Media Desk
El Niño Effect in India 2026: प्रशांत महासागर में समुद्री तापमान तेजी से ऊपर जा रहा है। मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि इस बार एक बेहद शक्तिशाली "सुपर अलनीनो" उभर सकता है, जिसके दुष्प्रभाव भारत सहित दुनियाभर में महसूस किए जाएंगे। ग्रीनहाउस गैस नीति के साथ बदल रही भारतीय राजनीति की दिशा
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By Anshika Ambasta
भारत में क्लाइमेट चेंज, कार्बन क्रेडिट और ग्रीनहाउस गैस नीति अब राजनीति और विकास के प्रमुख मुद्दे बनते जा रहे हैं। नेताओं और रणनीतिकारों के बीच ग्रीन पॉलिटिक्स की समझ तेजी से बढ़ रही है। सुधरती दिशा, धीमी रफ्तार: नई रिपोर्ट में दिखा जलवायु कार्रवाई का बदलता चेहरा
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By Samridh Media Desk
UNFCCC की 2025 रिपोर्ट दिखाती है कि दुनिया का उत्सर्जन अब घटने लगा है। दिशा सही है, लेकिन रफ्तार बढ़ाने की जरूरत है — भारत ने जलवायु कार्रवाई को विकास से जोड़कर नई मिसाल पेश की है। पहली बार, दुनिया का उत्सर्जन वक्र नीचे झुकना शुरू हुआ है — यानी ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन अब बढ़ नहीं रहा, बल्कि धीरे-धीरे घटने लगा है। climate कहानी : अब भी बचाया जा सकता है 1.5°c का लक्ष्य, नई रिपोर्ट ने दिखाई उम्मीद की राह
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By Samridh Media Desk
क्लाइमेट एनालिटिक्स की नई रिपोर्ट “Rescuing 1.5°C” ने उम्मीद जताई है कि दुनिया अब भी वैश्विक तापमान वृद्धि को 1.5°C के भीतर सीमित कर सकती है, यदि तुरंत निर्णायक कदम उठाए जाएँ। रिपोर्ट के अनुसार, 2045 तक CO₂ उत्सर्जन को नेट-ज़ीरो पर लाना और 2050 तक दो-तिहाई ऊर्जा मांग को बिजली से पूरा करना जरूरी है। विशेषज्ञों का कहना है कि अभी भी हालात पलटने की संभावना है, बशर्ते वैश्विक स्तर पर त्वरित कार्रवाई हो। Climate कहानी: क्लाइमेट चेंज की मार, हेल्थ पर वार, रिपोर्ट ने दिखाया फंडिंग का भार
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By Samridh Media Desk
गर्मी बढ़ रही है, बिमारियाँ भी। adelphi की नई रिपोर्ट बताती है कि जिस वक्त जलवायु संकट हमारी सांसें, हमारी धड़कनें और हमारे शरीरों पर असर डाल रहा है, उसी वक्त दुनिया की हेल्थ फंडिंग अब भी ‘क्लाइमेट ब्लाइंड’ बनी हुई है।2050 तक क्लाइमेट चेंज से 1.56 करोड़ लोगों की जान जा सकती है, लेकिन अब तक वैश्विक क्लाइमेट फाइनेंस का सिर्फ 0.5% हिस्सा ही हेल्थ सेक्टर तक पहुँचा है। Climate कहानी: 57 कम गर्म दिन, पेरिस समझौते की वो उम्मीद, जो अब भी ज़िंदा है
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By Climate कहानी
नई रिपोर्ट बताती है कि अगर देश पेरिस समझौते के तहत अपने वादों को पूरा करते हैं और तापमान वृद्धि को 2.6°C तक सीमित रखते हैं, तो दुनिया हर साल 57 कम गर्म दिन अनुभव कर सकती है। वहीं, 4°C गर्मी पर हीटवेव और अत्यधिक गर्मी की घटनाएँ कई गुना बढ़ जाएंगी। हीटवेव अब सबसे घातक आपदा बन चुकी है, गरीब देश सबसे अधिक प्रभावित हैं। सुरक्षित जलवायु के लिए उत्सर्जन कटौती, क्लाइमेट जस्टिस और प्रभावी नीति जरूरी हैं। Climate कहानी: वॉशिंगटन में दुनिया के भविष्य पर मंथन: कर्ज़, क्लाइमेट, और राजनीति एक मेज़ पर
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By Mohit Sinha
वॉशिंगटन डी.सी. में 13-18 अक्टूबर के बीच होने वाली वर्ल्ड बैंक और IMF की सालाना बैठकें सिर्फ़ वित्तीय फैसलों तक सीमित नहीं हैं। इस बार क्लाइमेट फाइनेंस, कर्ज़ राहत और वैश्विक साउथ की आवाज़ मुख्य मुद्दे हैं। 1.3 ट्रिलियन डॉलर के जलवायु वादों की हकीकत, अमीर और गरीब देशों के बीच भरोसा, और राजनीतिक दबावों के बीच बहुपक्षीय विकास बैंकों की भूमिका तय करेगी कि वैश्विक आर्थिक प्रणाली कितनी तेजी से “बदलाव की अर्थव्यवस्था” की ओर बढ़ सकती है। Climate कहानी: भारत में ग्लोबल वार्मिंग अब दूर की चिंता नहीं, बल्कि ज़मीनी हक़ीक़त
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By Mohit Sinha
भारत में किए गए एक राष्ट्रीय सर्वे में सामने आया है कि 89% लोगों ने ग्लोबल वार्मिंग के असर को खुद महसूस किया. हीटवेव, बाढ़ और तूफ़ान ने जीवन को प्रभावित किया है. लोग अब सरकार और समाज से ठोस कार्रवाई की उम्मीद कर रहे हैं. Climate कहानी: अदालतें बन रही हैं जलवायु की रणभूमि
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By Samridh Media Desk
रिपोर्ट के मुताबिक, 2015 से 2024 के अंत तक दुनिया भर में 276 जलवायु मामले उच्चतम न्यायालयों (जैसे सुप्रीम कोर्ट या संविधानिक अदालतों) तक पहुंचे हैं. ये आंकड़े केवल संख्या नहीं हैं—ये एक नई चेतना का संकेत हैं Climate कहानी: जलवायु नीति पर बहस में भारतीय कंपनियाँ खामोश
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By Samridh Media Desk
भारतीय व्यापार जगत सरकार की जलवायु नीतियों में किस प्रकार से भाग ले रही हैं, इस बारे में इस नये इस विश्लेषण से पता चलता है की भारतीय कंपनियां और उद्योग संगठन वैश्विक स्तर पर अपने समकक्षों की तुलना में विज्ञान-आधारित जलवायु नीतियों के प्रति अधिक समर्थन दिखा रहे हैं. Opinion: शहर, जलवायु परिवर्तन और डॉ. अंजल प्रकाश का नज़रिया
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By Climate कहानी
डॉ. अंजल प्रकाश की बातों में न सिर्फ तथ्यों की गहराई है, बल्कि एक उम्मीद भी है। उनका मानना है कि अगर हम समय रहते सही कदम उठाएं, तो हमारे शहर जलवायु परिवर्तन की इस लड़ाई में विजयी हो सकते हैं। उनके शब्दों में, “शहर सपनों का केंद्र हैं, और अगर हम इन्हें जलवायु संकट से बचा सके, तो यही सपने हमारी अगली पीढ़ियों को एक बेहतर भविष्य देंगे।” Climate कहानी: जैव विविधता, जलवायु परिवर्तन और स्वास्थ्य को जोड़ने वाला IPBES का 'नेक्सस असेसमेंट': भारत के लिए एक सबक
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By Climate कहानी
भारत जैसे देश, जहां कृषि अर्थव्यवस्था की रीढ़ है और जनसंख्या का बड़ा हिस्सा प्राकृतिक संसाधनों पर निर्भर है, इस रिपोर्ट में सुझाए गए उपाय बेहद प्रासंगिक हैं. जल संकट, प्रदूषण, वनों की कटाई और अनियमित शहरीकरण जैसे मुद्दे यहां न केवल जैव विविधता को प्रभावित कर रहे हैं, बल्कि स्वास्थ्य और खाद्य सुरक्षा पर भी गंभीर प्रभाव डाल रहे हैं. 