climate कहानी : अब भी बचाया जा सकता है 1.5°c का लक्ष्य, नई रिपोर्ट ने दिखाई उम्मीद की राह
रिन्यूएबल एनर्जी और नेट-ज़ीरो की राह पर ज़ोर
क्लाइमेट एनालिटिक्स की नई रिपोर्ट “Rescuing 1.5°C” ने उम्मीद जताई है कि दुनिया अब भी वैश्विक तापमान वृद्धि को 1.5°C के भीतर सीमित कर सकती है, यदि तुरंत निर्णायक कदम उठाए जाएँ। रिपोर्ट के अनुसार, 2045 तक CO₂ उत्सर्जन को नेट-ज़ीरो पर लाना और 2050 तक दो-तिहाई ऊर्जा मांग को बिजली से पूरा करना जरूरी है। विशेषज्ञों का कहना है कि अभी भी हालात पलटने की संभावना है, बशर्ते वैश्विक स्तर पर त्वरित कार्रवाई हो।
दुनिया अभी भी 1.5°C के भीतर तापमान को सीमित करने की दौड़ में है, अगर अब से सबसे ऊँची स्तर की जलवायु प्रतिबद्धता के साथ कदम बढ़ाए जाएँ। क्लाइमेट एनालिटिक्स की नई रिपोर्ट “Rescuing 1.5°C” ने दिखाया है कि भले ही पिछले कुछ सालों में कार्रवाई धीमी रही हो, फिर भी दुनिया अपने तापमान को सदी के अंत तक दोबारा 1.5°C से नीचे ला सकती है।
इस रिपोर्ट में बताया गया है कि अगर देश तुरंत और बड़े पैमाने पर कदम उठाएँ, जैसे तेज़ी से रिन्यूएबल एनर्जी को बढ़ाना, अर्थव्यवस्था को बिजली-आधारित बनाना और जीवाश्म ईंधनों से बाहर निकलना, तो 2050 से पहले ही तापमान स्थिर हो सकता है। रिपोर्ट के Highest Possible Ambition (HPA) परिदृश्य के मुताबिक, अगर सब कुछ योजना के मुताबिक चला, तो वैश्विक तापमान लगभग 1.7°C पर चरम पर पहुँचेगा और 2100 तक गिरकर 1.2°C तक आ जाएगा।

रिपोर्ट के अन्य निष्कर्षों में कहा गया है कि एनर्जी क्षेत्र में मीथेन एमिशन को 2030 तक 20% और 2035 तक 30% घटाना होगा, ताकि तापमान स्थिर हो सके। वहीं, कार्बन रिमूवल टेक्नोलॉजी को 2050 तक सालाना पाँच अरब टन CO₂ कैप्चर करने के स्तर तक लाना होगा।

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