साहित्य
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Read More... “मायके की यादें”: मां के बिना सूना घर और भावनाओं का सैलाब
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By Mohit Sinha
“मायके की यादें” एक भावनात्मक लघुकथा है, जो मां के जाने के बाद मायके लौटने वाली बेटी की संवेदनाओं को दर्शाती है। सूने आंगन, बंद कमरों और बचपन की यादों के बीच वह मां के स्नेह और दुलार को महसूस करती है। “तपस्या”: मां के संघर्ष से IPS बनी बेटी की प्रेरक कहानी
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By Mohit Sinha
“तपस्या” एक मार्मिक लघुकथा है, जो एक मां के संघर्ष, त्याग और दृढ़ संकल्प को दर्शाती है। समाज की रूढ़िवादी सोच के खिलाफ लड़ते हुए मीना अपनी बेटी को पढ़ाने के लिए घर छोड़ देती है। “बिजली रानी” कविता में बिजली संकट पर व्यंग्यात्मक प्रहार
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By Mohit Sinha
कवि अनिल गुड्डू की कविता “बिजली रानी” बिजली कटौती और उससे होने वाली आम लोगों की परेशानियों को व्यंग्यात्मक और भावपूर्ण शैली में प्रस्तुत करती है। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर एमपी अध्याय द्वारा अंतर्राष्ट्रीय ऑनलाइन कवि सम्मेलन संपन्न
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By Mohit Sinha
अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर मकस कहानिका हिंदी पत्रिका के एमपी अध्याय द्वारा 10 मार्च 2026 को गूगल मीट के माध्यम से एक भव्य अंतरराष्ट्रीय ऑनलाइन कवि सम्मेलन आयोजित किया गया। आग उगलते देखा है! — देशभक्ति से ओतप्रोत कविता
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By Mohit Sinha
“आग उगलते देखा है” एक सशक्त कविता है जो समाज, देश और बदलते इतिहास की पीड़ा व चेतना को उजागर करती है। कवि ने मिट्टी, संघर्ष और जनमानस की ताकत को प्रतीकात्मक रूप में प्रस्तुत किया है। कविता बताती है कि समय आने पर शांत दिखने वाली शक्तियां भी परिवर्तन की ज्वाला बन सकती हैं। ‘नियति’ शोषण और स्वार्थ की सच्चाई बयान करती कविता
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By Mohit Sinha
कविता “नियति” मानव जीवन के उस कटु सत्य को उजागर करती है जिसमें स्वार्थ और शोषण का चक्र निरंतर चलता रहता है। चिता पर जलती लाश के साथ जूँ के जलने का उदाहरण देकर कवि ने यह दिखाया है कि शोषण करने वाला अंततः स्वयं भी उसी नियति का शिकार बनता है। 'जादूगर’ कविता में सत्ता और व्यवस्था पर तीखा सवाल
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By Mohit Sinha
कवि राजेश पाठक की कविता “जादूगर” वर्तमान सामाजिक और राजनीतिक परिस्थितियों पर तीखा व्यंग्य प्रस्तुत करती है। कविता में प्रशासनिक भ्रष्टाचार, कानून की कमजोर स्थिति, किसानों और आम जनता की परेशानियों तथा व्यवस्था की निष्क्रियता को प्रभावशाली ढंग से उजागर किया गया है। आज का जीवन: रिश्तों से दूर होती संवेदनाओं की कविता
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By Susmita Rani
“आज का जीवन” कविता आधुनिक समाज में बढ़ती स्वार्थ भावना, टूटते रिश्तों और प्रकृति से दूर होते मनुष्य की पीड़ा को सरल और भावपूर्ण शब्दों में व्यक्त करती है। बिटिया रानी: शहीद पिता की याद में भावुक कविता
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By Mohit Sinha
“बिटिया रानी” कविता एक शहीद सैनिक की बेटी की भावनाओं को मार्मिक ढंग से प्रस्तुत करती है। कविता में बेटी अपने पिता को याद करते हुए सवाल करती है और उनके बिना जीवन की कठिनाइयों को व्यक्त करती है। कैसी है सरकार? — व्यवस्था और भ्रष्टाचार पर तीखी सामाजिक कविता
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By Mohit Sinha
राजेश पाठक की कविता “कैसी है सरकार?” वर्तमान सामाजिक और राजनीतिक व्यवस्था पर तीखा सवाल उठाती है। कविता में भ्रष्टाचार, बेरोजगारी, शिक्षा व्यवस्था की कमजोरी, महिलाओं की सुरक्षा, राजनीतिक अवसरवाद और आम जनता की परेशानियों को मार्मिक शब्दों में व्यक्त किया गया है। Mahashivratri special 2026 : तांडव की लय और मांदर की थाप
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By Mohit Sinha
यह लेख मांदर की थाप और शिव तांडव के माध्यम से आदिवासी संस्कृति, प्रकृति और जीवन की लय के बीच के संबंध को दर्शाता है। इसमें बताया गया है कि नृत्य और संगीत केवल कला नहीं, बल्कि जीवन की गति और सामूहिक चेतना का उत्सव हैं। लेख मनुष्य और प्रकृति के बीच के प्राचीन संबंध को पुनः समझने का संदेश देता है। “क्रांति के गीत” युवा चेतना को जगाती प्रेरक कविता
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By Mohit Sinha
“क्रांति के गीत” एक सशक्त कविता है, जो समाज में परिवर्तन, साहस और जागरूकता का संदेश देती है। कवि राजेश पाठक ने युवाओं और आम लोगों को डर छोड़कर अपने अधिकारों और भविष्य के लिए संघर्ष करने की प्रेरणा दी है। 