साहित्य
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Read More... मालिक की मर्जी: जीवन की उलझनों पर आधारित भावपूर्ण कविता
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By Mohit Sinha
यह कविता इंसान की मानसिक स्थिति, जीवन की उलझनों और आत्मसंघर्ष को व्यक्त करती है। इसमें दिखाया गया है कि मनुष्य खुद को सबका मालिक समझता है, लेकिन परिस्थितियाँ उसे ईश्वरीय इच्छा के आगे झुका देती हैं। “बेटी की पुकार – एक भावपूर्ण कविता”
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By Mohit Sinha
यह कविता एक बेटी की भावनाओं को व्यक्त करती है, जो पढ़-लिखकर सम्मानजनक जीवन जीना चाहती है। मजदूरी और मजबूरी के जीवन से दूर, वह शिक्षा के माध्यम से आगे बढ़ने का सपना देखती है। डॉ. सुमन सोनी द्वारा रचित पुस्तक ‘भाव सुमन’ का दिग्गज साहित्यकारों ने किया लोकार्पण
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By Subodh Kumar
कार्यक्रम में उपस्थित विभूतियों द्वारा डॉ सुमन सोनी की पुस्तक का विमोचन किये जाने को लेकर वो खुद को सौभाग्यशाली समझती है.इस विशेष आयोजन में देश भर के प्रमुख विद्वान उपस्थित थे. कार्यक्रम में दिग्गज साहित्यकारों एवं प्रेरणीय हस्तियों को सम्मानित किया गया. रामधारी सिंह दिनकर जयंती पर विशेष : नहीं मिलता था नाव तो गंगा में तैर कर मोकामा स्कूल जाया करते थे राष्ट्रकवि
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By Samridh Jharkhand
बेगूसराय : बिहार की सांस्कृतिक, साहित्यिक और औद्योगिक रूप से धनी भूमि बेगूसराय ने अपनी उर्वर भूमि पर एक से एक विभूति को पैदा किया है, जो बीते और वर्तमान काल खंड में ही नहीं, भविष्य में भी सदैव याद... आर्टिस्ट्स ऑफ झारखंड कलाकारों को दे रहा मंच, दर्जनों कलाकारों ने दी लाइव प्रस्तुति
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By Samridh Jharkhand
रांची: आर्टिस्ट्स ऑफ झारखंड कलाकारों को एक मंच पर लाने का प्रयास कर रहा है। वर्ष 2017 में मंच की शुरूआत झारखंड के कलाकारों ने व्हाट्सअप ग्रुप के माध्यम से की। वर्ष 2020 में ऑफिसियल फेसबुक पेज पर लाइव गीत-... कहानी: गाली मुक्त गाँव
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By Samridh Jharkhand
जब कभी मैं गली, नुक्कड़, चौराहे, बाजार, ऑटो, बस, ट्रेन या किसी सरकारी व प्राइवेट ऑफिस में जाती हूँ तो हर जगह एक चीज कॉमन है जो है हर जगह कुछ लोगों के मुँह से माँ की गाली देना। ज़रा... रूपचंद हांसदा को संताली भाषा का साहित्य अकादमी, हिंदी में अनामिका को, मैथिली में कमलकांत
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By Samridh Jharkhand
रांची : इस साल के साहित्य आकादमी पुरस्कारों की घोषणा शुक्रवार को की गयी। संताली भाषा के लिए संताली कवि व साहित्यकार रूपचंद हांसदा को साहित्य अकादमी पुरस्कार देने की घोषणा की गयी है, जबकि मैथिली के लिए साहित्यकार कमलकांत... मातृभाषा ने किया दिवंगत हिंदी साहित्यकारों का श्राद्ध
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By Samridh Jharkhand
इंदौर : देश में हिंदी भाषा में ऐसे कई साहित्यकार हुए जिनकी वंशावली नहीं है अथवा उनके तर्पण श्राद्ध संबंधित सामाजिक उत्तरदायित्व का कोई निर्वहन नहीं करता। हिन्दी के दिवंगत साहित्यकारों के सभी उत्तरकर्मों के निर्वहन के लिए भारत में... कविता: है डूबना जिसका मुक्कदर
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By Samridh Jharkhand
धूप की चादर ओढ़ें छाँव तलाश करते हो जुगनू मन के पंखो पर करार तलाशा करते हो। जो कही नहीं वो बात की चाल तलाशा करते हो आँखों के गलियारों में हाल तलाशा करते हो। कई मुद्द्ते बीत गईं सवालों... सावन, सेज, साजन तब सावन बने मनभावन
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By Samridh Jharkhand
सावन, सेज, साजन तब सावन बने मनभावन। अब जब इनका संयोग ना बने तो फिर उत्पन्न होता है विरह। और जब विरह उत्पन्न होता है तो कंठ से फूटता है “हरि- हरि प्रीतम गए परदेश जिया नाही लागे रे ननदि”।... लघुकथा: बनवारी सब्जी वाला
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By Samridh Jharkhand
एक बड़े शहर की पॉश कॉलोनी में बनवारी नाम का सब्जी वाला लगातार सब्जियां भेजने के लिए एक आता था। यह सब्जी वाला काफी समय से यहां पर सब्जियां दे रहा है और उसका संबंध वहां पर सभी लोगों से... कोरोना काल में पनपता डर
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By Samridh Jharkhand
लगभग 40 दिनों से पूरे भारत वर्ष के लोग लॉकडाउन के बीच अपना समय व्यतीत कर रहा है। हर व्यक्ति अपने घर में किसी ना किसी तरीके से कोरोना के इस संकट के समय इस समय को बिताने का प्रयास... 