साहित्य
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मालिक की मर्जी: जीवन की उलझनों पर आधारित भावपूर्ण कविता

मालिक की मर्जी: जीवन की उलझनों पर आधारित भावपूर्ण कविता यह कविता इंसान की मानसिक स्थिति, जीवन की उलझनों और आत्मसंघर्ष को व्यक्त करती है। इसमें दिखाया गया है कि मनुष्य खुद को सबका मालिक समझता है, लेकिन परिस्थितियाँ उसे ईश्वरीय इच्छा के आगे झुका देती हैं।
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साहित्य 

“बेटी की पुकार – एक भावपूर्ण कविता”

“बेटी की पुकार – एक भावपूर्ण कविता” यह कविता एक बेटी की भावनाओं को व्यक्त करती है, जो पढ़-लिखकर सम्मानजनक जीवन जीना चाहती है। मजदूरी और मजबूरी के जीवन से दूर, वह शिक्षा के माध्यम से आगे बढ़ने का सपना देखती है।
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साहित्य  रांची  बिहार  दिल्ली  झारखण्ड 

डॉ. सुमन सोनी द्वारा रचित पुस्तक ‘भाव सुमन’ का दिग्गज साहित्यकारों ने किया लोकार्पण

डॉ. सुमन सोनी द्वारा रचित पुस्तक ‘भाव सुमन’ का दिग्गज साहित्यकारों ने किया लोकार्पण कार्यक्रम में उपस्थित विभूतियों द्वारा डॉ सुमन सोनी की पुस्तक का विमोचन किये जाने को लेकर वो खुद को सौभाग्यशाली समझती है.इस विशेष आयोजन में देश भर के प्रमुख विद्वान उपस्थित थे. कार्यक्रम में दिग्गज साहित्यकारों एवं प्रेरणीय हस्तियों को सम्मानित किया गया.
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बड़ी खबर  साहित्य 

रामधारी सिंह दिनकर जयंती पर विशेष : नहीं मिलता था नाव तो गंगा में तैर कर मोकामा स्कूल जाया करते थे राष्ट्रकवि

रामधारी सिंह दिनकर जयंती पर विशेष : नहीं मिलता था नाव तो गंगा में तैर कर मोकामा स्कूल जाया करते थे राष्ट्रकवि बेगूसराय : बिहार की सांस्कृतिक, साहित्यिक और औद्योगिक रूप से धनी भूमि बेगूसराय ने अपनी उर्वर भूमि पर एक से एक विभूति को पैदा किया है, जो बीते और वर्तमान काल खंड में ही नहीं, भविष्य में भी सदैव याद...
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राज्य  साहित्य  रांची  झारखण्ड 

आर्टिस्ट्स ऑफ झारखंड कलाकारों को दे रहा मंच, दर्जनों कलाकारों ने दी लाइव प्रस्तुति

आर्टिस्ट्स ऑफ झारखंड कलाकारों को दे रहा मंच, दर्जनों कलाकारों ने दी लाइव प्रस्तुति रांची: आर्टिस्ट्स ऑफ झारखंड कलाकारों को एक मंच पर लाने का प्रयास कर रहा है। वर्ष 2017 में मंच की शुरूआत झारखंड के कलाकारों ने व्हाट्सअप ग्रुप के माध्यम से की। वर्ष 2020 में ऑफिसियल फेसबुक पेज पर लाइव गीत-...
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साहित्य  जीवन शैली 

कहानी: गाली मुक्त गाँव

कहानी: गाली मुक्त गाँव जब कभी मैं गली, नुक्कड़, चौराहे, बाजार, ऑटो, बस, ट्रेन या किसी सरकारी व प्राइवेट ऑफिस में जाती हूँ तो हर जगह एक चीज कॉमन है जो है हर जगह कुछ लोगों के मुँह से माँ की गाली देना। ज़रा...
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बड़ी खबर  साहित्य 

रूपचंद हांसदा को संताली भाषा का साहित्य अकादमी, हिंदी में अनामिका को, मैथिली में कमलकांत

रूपचंद हांसदा को संताली भाषा का साहित्य अकादमी, हिंदी में अनामिका को, मैथिली में कमलकांत रांची : इस साल के साहित्य आकादमी पुरस्कारों की घोषणा शुक्रवार को की गयी। संताली भाषा के लिए संताली कवि व साहित्यकार रूपचंद हांसदा को साहित्य अकादमी पुरस्कार देने की घोषणा की गयी है, जबकि मैथिली के लिए साहित्यकार कमलकांत...
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बड़ी खबर  साहित्य 

मातृभाषा ने किया दिवंगत हिंदी साहित्यकारों का श्राद्ध

मातृभाषा ने किया दिवंगत हिंदी साहित्यकारों का श्राद्ध   इंदौर : देश में हिंदी भाषा में ऐसे कई साहित्यकार हुए जिनकी वंशावली नहीं है अथवा उनके तर्पण श्राद्ध संबंधित सामाजिक उत्तरदायित्व का कोई निर्वहन नहीं करता। हिन्दी के दिवंगत साहित्यकारों के सभी उत्तरकर्मों के निर्वहन के लिए भारत में...
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कविता: है डूबना जिसका मुक्कदर

कविता: है डूबना जिसका मुक्कदर धूप की चादर ओढ़ें छाँव तलाश करते हो जुगनू मन के पंखो पर करार तलाशा करते हो।    जो कही नहीं वो बात की चाल तलाशा करते हो आँखों के गलियारों में हाल तलाशा करते हो।    कई मुद्द्ते बीत गईं सवालों...
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सावन, सेज, साजन तब सावन बने मनभावन

सावन, सेज, साजन तब सावन बने मनभावन सावन, सेज, साजन तब सावन बने मनभावन। अब जब इनका संयोग ना बने तो फिर उत्पन्न होता है विरह। और जब विरह उत्पन्न होता है तो कंठ से फूटता है “हरि- हरि प्रीतम गए परदेश जिया नाही लागे रे ननदि”।...
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लघुकथा: बनवारी सब्जी वाला

लघुकथा: बनवारी सब्जी वाला एक बड़े शहर की पॉश कॉलोनी में बनवारी नाम का सब्जी वाला लगातार सब्जियां भेजने के लिए एक आता था। यह सब्जी वाला काफी समय से यहां पर सब्जियां दे रहा है और उसका संबंध वहां पर सभी लोगों से...
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कोरोना काल में पनपता डर

कोरोना काल में पनपता डर लगभग 40 दिनों से पूरे भारत वर्ष के लोग लॉकडाउन के बीच अपना समय व्यतीत कर रहा है। हर व्यक्ति अपने घर में किसी ना किसी तरीके से कोरोना के इस संकट के समय इस समय को बिताने का प्रयास...
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