साहित्य
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Read More... पुरुषोत्तम मास में क्यों बढ़ जाता है दान-पुण्य का महत्व? पढ़ें यह सुंदर काव्य रचना
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By Mohit Sinha
कवयित्री सुनीता अग्रवाल ‘पिंकी’ की यह कविता अधिक मास अथवा पुरुषोत्तम मास के धार्मिक महत्व, दान-पुण्य, संयम और आध्यात्मिक साधना की महत्ता को सरल शब्दों में प्रस्तुत करती है। आपसी मनमुटाव ठीक नहीं
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By Mohit Sinha
‘आपसी मनमुटाव ठीक नहीं’ कविता रिश्तों में बढ़ती दूरियों, खामोशी और संवादहीनता की पीड़ा को व्यक्त करती है। कवि चुन्नू साहा ने जीवन की नश्वरता और अपनों के महत्व को रेखांकित करते हुए संदेश दिया है कि मनमुटाव को लंबे समय तक नहीं पालना चाहिए। लोकार्पण: जब साहित्य औपचारिकता के 'समोसे' में खो गया....
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By Mohit Sinha
यह व्यंग्यात्मक आलेख आज के साहित्यिक लोकार्पण समारोहों की बदलती तस्वीर को सामने लाता है। लेखक ने दिखाया है कि कैसे किताबों का विमोचन अब साहित्यिक विमर्श से अधिक दिखावे, औपचारिकता, सोशल मीडिया प्रचार और चाय-समोसे के आयोजनों तक सीमित होता जा रहा है। कभी सोचे ना थे, महादेव: अन्याय और आस्था पर भावुक कविता
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By Mohit Sinha
“कभी सोचे ना थे, महादेव” एक भावनात्मक कविता है, जिसमें अन्याय, पीड़ा और आस्था का गहरा चित्रण किया गया है। कवि ने महादेव से संवाद के माध्यम से जीवन में आए कठिन समय, एकतरफा सजा और न्याय व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं। “उस दौर से इस दौर तक”: बाबा साहेब के संघर्ष की प्रेरक गाथा
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By Mohit Sinha
“उस दौर से इस दौर तक” कविता समाज के संघर्ष, पीड़ा और बदलाव की कहानी को प्रस्तुत करती है। यह रचना बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर के योगदान और दलित समाज के उत्थान को भावनात्मक रूप से दर्शाती है। “मायके की यादें”: मां के बिना सूना घर और भावनाओं का सैलाब
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By Mohit Sinha
“मायके की यादें” एक भावनात्मक लघुकथा है, जो मां के जाने के बाद मायके लौटने वाली बेटी की संवेदनाओं को दर्शाती है। सूने आंगन, बंद कमरों और बचपन की यादों के बीच वह मां के स्नेह और दुलार को महसूस करती है। “तपस्या”: मां के संघर्ष से IPS बनी बेटी की प्रेरक कहानी
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By Mohit Sinha
“तपस्या” एक मार्मिक लघुकथा है, जो एक मां के संघर्ष, त्याग और दृढ़ संकल्प को दर्शाती है। समाज की रूढ़िवादी सोच के खिलाफ लड़ते हुए मीना अपनी बेटी को पढ़ाने के लिए घर छोड़ देती है। “बिजली रानी” कविता में बिजली संकट पर व्यंग्यात्मक प्रहार
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By Mohit Sinha
कवि अनिल गुड्डू की कविता “बिजली रानी” बिजली कटौती और उससे होने वाली आम लोगों की परेशानियों को व्यंग्यात्मक और भावपूर्ण शैली में प्रस्तुत करती है। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर एमपी अध्याय द्वारा अंतर्राष्ट्रीय ऑनलाइन कवि सम्मेलन संपन्न
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By Mohit Sinha
अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर मकस कहानिका हिंदी पत्रिका के एमपी अध्याय द्वारा 10 मार्च 2026 को गूगल मीट के माध्यम से एक भव्य अंतरराष्ट्रीय ऑनलाइन कवि सम्मेलन आयोजित किया गया। आग उगलते देखा है! — देशभक्ति से ओतप्रोत कविता
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By Mohit Sinha
“आग उगलते देखा है” एक सशक्त कविता है जो समाज, देश और बदलते इतिहास की पीड़ा व चेतना को उजागर करती है। कवि ने मिट्टी, संघर्ष और जनमानस की ताकत को प्रतीकात्मक रूप में प्रस्तुत किया है। कविता बताती है कि समय आने पर शांत दिखने वाली शक्तियां भी परिवर्तन की ज्वाला बन सकती हैं। ‘नियति’ शोषण और स्वार्थ की सच्चाई बयान करती कविता
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By Mohit Sinha
कविता “नियति” मानव जीवन के उस कटु सत्य को उजागर करती है जिसमें स्वार्थ और शोषण का चक्र निरंतर चलता रहता है। चिता पर जलती लाश के साथ जूँ के जलने का उदाहरण देकर कवि ने यह दिखाया है कि शोषण करने वाला अंततः स्वयं भी उसी नियति का शिकार बनता है। 'जादूगर’ कविता में सत्ता और व्यवस्था पर तीखा सवाल
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By Mohit Sinha
कवि राजेश पाठक की कविता “जादूगर” वर्तमान सामाजिक और राजनीतिक परिस्थितियों पर तीखा व्यंग्य प्रस्तुत करती है। कविता में प्रशासनिक भ्रष्टाचार, कानून की कमजोर स्थिति, किसानों और आम जनता की परेशानियों तथा व्यवस्था की निष्क्रियता को प्रभावशाली ढंग से उजागर किया गया है। 