आ गया सुपर अलनीनो! बढ़ी IMD की चिंता, कहीं सूखा तो कहीं बाढ़; जानिए क्या होगा असर
1877 के अलनीनो में 5 करोड़ से ज्यादा लोगों की जान गई थी।
El Niño Effect in India 2026: प्रशांत महासागर में समुद्री तापमान तेजी से ऊपर जा रहा है। मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि इस बार एक बेहद शक्तिशाली "सुपर अलनीनो" उभर सकता है, जिसके दुष्प्रभाव भारत सहित दुनियाभर में महसूस किए जाएंगे।
Super El Nino 2026: साल 2026 भारत और पूरी दुनिया के लिए गंभीर मौसमी चुनौतियाँ लेकर आ सकता है। एक तरफ रिकॉर्डतोड़ गर्मी और कमजोर मानसून की आशंका है, तो दूसरी तरफ कुछ इलाकों में सूखे और बाढ़ दोनों का खतरा मंडरा रहा है। इस सबकी वजह है सुपर अलनीनो। अमेरिकी संस्था NOAA के क्लाइमेट प्रेडिक्शन सेंटर ने ताजा अनुमान जारी करते हुए बताया है कि अक्टूबर 2026 से फरवरी 2027 के बीच सुपर अलनीनो के सबसे प्रबल होने की संभावना है। भारतीय मौसम विभाग (IMD) पहले ही इसके कारण मानसून वर्षा घटने को लेकर चिंता व्यक्त कर चुका है।
अलनीनो क्यों बढ़ा रहा है दुनिया का तापमान?
अलनीनो दरअसल ENSO (El Niño-Southern Oscillation) जलवायु चक्र का गर्म दौर है। इसमें उष्णकटिबंधीय प्रशांत महासागर की सतह का तापमान असामान्य रूप से बढ़ जाता है, जिसका असर दुनियाभर के मौसम, कृषि और पारिस्थितिकी पर पड़ता है। अगर सुपर अलनीनो आया तो यह इतिहास के सबसे विनाशकारी अलनीनो जैसा हो सकता है। 1877 में आए अलनीनो ने 1876 से 1878 के बीच भयंकर वैश्विक अकाल पैदा किया था, जिसमें 5 करोड़ से ज्यादा लोगों की जान गई थी, यानी तब की दुनिया की कुल आबादी का करीब 3 फीसदी।
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IMD ने क्या कहा, मानसून पर क्या असर होगा?
https://twitter.com/PCarterClimate/status/2055543584896754049?s=20

IMD का मानसून पूर्वानुमान , आंकड़े क्या कहते हैं?
अप्रैल 2026 में जारी IMD के दीर्घकालिक पूर्वानुमान में कहा गया कि इस बार मानसून वर्षा दीर्घकालिक औसत (LPA) के लगभग 92% रह सकती है, जिसे सामान्य से कम माना जाता है। इसमें यह भी बताया गया:
- LPA के 90% से कम बारिश होने की करीब 35% संभावना है।
- वर्षा आधारित कृषि क्षेत्रों में सूखे जैसी स्थिति बन सकती है।
- मानसून की शुरुआत जल्दी होने के बाद भी, अगर मुख्य महीनों में अलनीनो मजबूत रहा तो पूरा मौसम कमजोर साबित हो सकता है।
मई से जुलाई के बीच ही आ सकता है सुपर अलनीनो
अब इस बात की 82% संभावना जताई जा रही है कि अलनीनो मई से जुलाई 2026 के बीच सक्रिय हो जाएगा और फरवरी 2027 तक चलता रहेगा। यह NOAA के अप्रैल पूर्वानुमान की तुलना में करीब 20 प्रतिशत अंक अधिक निश्चितता है।
दुनियाभर में क्या होगा असर?
अलनीनो की घटनाएं आमतौर पर हर 2 से 7 साल में आती हैं। जब प्रशांत महासागर में हवा और समुद्री धाराओं का संतुलन बिगड़ता है, तब समुद्र की सतह का तापमान सामान्य से 0.5°C (0.9°F) से अधिक बढ़ जाता है। इसका नतीजा वैश्विक जलवायु पर व्यापक और गहरा असर होता है। दुनिया तेजी से तटस्थ स्थिति से बाहर निकल रही है और एक अस्थिर मौसमी दौर की तरफ बढ़ रही है।
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