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झारखंड : विद्युतीकरण में मामूली सुधार के बावजूद आदिवासी परिवार में बिजली के उपभोग में आयी गिरावट

फोटो का प्रयोग सिर्फ प्रतीकात्मक उद्देश्य से।

इनिशिएटिव फॉर सस्टेनेबल एनर्जी पॉलिसी द्वारा दो चरणों मे किए गए अध्ययन पर आधारित रिपोर्ट में सामने आए कई अहम तथ्य
बिजली की बिलिंग उपभोग को प्रभावित करने वाला अहम कारक, सौभाग्य के तहत कनेक्शन में भी गिरावट

रांची : इनिशिएटिव फॉर सस्टेनेबल एनर्जी पॉलिसी – आइएसइपी की ग्रामीण झारखंड के बिजली उपभोग रिपोर्ट में चौंकाने वाले नतीजे सामने आए हैं। बुधवार, 19 जनवरी को एक वेबिनार के दौरान जारी इस रिपोर्ट में आदिवासी वर्ग में बिजली उपभोग को लेकर निराशाजनक तथ्य सामने आए हैं और इसकी एक अहम वजह बिजली बिल और उसका भुगतान है। सौभाग्य योजना के तहत बिजली कनेक्शन देने में गिरावट के बीच आदिवासी वर्ग में बिजली उपभोग को लेकर निराशाजनक आंकड़े दर्ज किए गए हैं।

रिपोर्ट में यह तथ्य सामने आया है कि ग्रामीण झारखंड के विद्युतीकरण में थोड़ा सुधार हुआ है और इसकी पहुंच 87 प्रतिशत की जगह अब बढ कर 89 प्रतिशत तक घरों में हो गयी है। हालांकि यह अंतर सांख्यिकीय रूप से महत्वपूर्ण नहीं है, क्योंकि बिजली के लिए ग्रिड पर निर्भर लोगों का प्रतिशत 84 रहा। रिपोर्ट में कहा गया है कि मासिक बिलों को भुगतान एक बाधा रही होगी, जैसा कि इस सर्वे के दौरान अधिकांश उत्तरदाताओं ने कहा।

यह रिपोर्ट भारत के झारखंड प्रांत में बिजली तक लोगों की पहुंच, ऊर्जा सेवाओं से संतुष्टि और कोयले पर निर्भरता पर एक फॉलोअप स्टडी का परिणाम है। इस अध्ययन का पहला चरण जुलाई 2019 में आयोजित किया गया था और फॉलोअप स्टडी जुलाई 2019 में आयोजित की गयी, जिस पर यह रिपोर्ट निष्कर्ष प्रस्तुत करती है।

यह रिपोर्ट राज्य में दो सालों के दौरान कोविड-19 महामारी के बाद इन संकेतकों पर प्रगति या उसके अभाव का अध्ययन का प्रयास है।

आदिवासी वर्ग में ग्रिड के उपयोग में आयी गिरावट

जनजातीय परिवारों के पास बिजली की पहुंच बढने के बावजूद उनके द्वारा ग्रिड के उपयोग में गिरावट आयी है और रोशनी के लिए केरोसिन पर उनकी निर्भरता में वृद्धि दर्ज की गयी है। हालांकि 82 प्रतिशत से बढकर 86 प्रतिशत आदिवासी परिवारों तक बिजली की पहुंच हो गयी। इससे उलट ग्रिड से मिलने वाली बिजली को रोशनी के प्राथमिक स्रोत के रूप में उपयोग करने वाले परिवारों का प्रतिशत 87 से घट कर 74 हो गया। वहीं, केरोसिन का रोशनी के प्राथमिक स्रोत के रूप में उपयोग करने वालों का अनुपात 11 प्रतिशत से बढ कर 21 प्रतिशत हो गया। रोशनी के प्राथमिक स्रोत के रूप में केरोसिन लैंप का उपयोग करने वाले परिवारों में आदिवासी परिवारों की हिस्सेदारी 32 प्रतिशत से बढ कर 47 प्रतिशत हो गयी।

ग्रिड की पहुंच वाले घरों में रोशनी के प्राथमिक स्रोत के रूप में ग्रिड के उपयोग का प्रतिशत 84 प्रतिशत से बढकर 92 हो गया, जो महत्वपूर्ण है। वहीं, रोशनी के प्राथमिक स्रोत के रूप में केरोसिन का उपयोग करने वाले परिवारों का प्रतिशत 24 प्रतिशत से घट कर 17 हो गया, यह आंकड़ा भी सांख्यिकी रूप से महत्वपूर्ण है।

प्रकाश के प्राथमिक स्रोत के रूप में केरोसिन का उपयोग करने वाले वैसे परिवारों जिनके पास ग्रिड कनेक्शन है, उनका प्रतिशत 50 से घट कर 29 हो गया है। यानी ग्रिड तक पहुंच वाले कम घर ही अब केरोसिन पर रोशनी के लिए निर्भर हैं। गरीबी रेखा से नीचे रहने वाले 63 प्रतिशत परिवार के बजाय अब 73 प्रतिशत परिवार रोशनी के प्राथमिक स्रोत के लिए ग्रिड की बिजली पर निर्भर हैं।

बिजली आपूर्ति व मीटरिंग में सुधार, सौभाग्य योजना में गिरावट

अध्ययन में यह बात भी सामने आयी है कि बिजली आपूर्ति के घंटों व मीटरिंग में अच्छा सुधार हुआ है। हालांकि बिलिंग और उसकी वसूली में कोई सुधार नहीं आया है। सौभाग्य योजना के तहत बिजली देने में गिरावट आयी है। सौभाग्य योजना के तहत जुड़े घरों का प्रतिशत 33 से घट कर 23 हो गया। प्रति दिन बिजली दिए जाने के घंटे ग्रामीण झारखंड में नौ से बढ कर 12 हो गए। मीटर वाले घरों की संख्या 51 से बढ कर 75 प्रतिशत हो गया। बिजली बिल प्राप्त करने वाले घरों का प्रतिशत 54 से बढ कर 58 हो गया। बिजली बिल प्राप्त करने वालों में समय पर भुगतान करने वाला का प्रतिशत 11 ही रहा, हालांकि भुगतान करने वाले लेकिन समय पर नहीं करने वाले का प्रतिशत 19 से बढ कर 28 हो गया। जिनके पास न मीटर है और न वे बिजली देते हैं, ऐसे उपभोगकर्ताओं का प्रतिशत 26 प्रतिशत से गिर कर 13 हो गया।

सोलर सिस्टम पर बढ रही निर्भरता

बिजली को लेकर लोगों को संतुष्टि का स्तर बढा है। अपने प्राथमिक प्रकाश स्रोत से संतुष्ट परिवारों का प्रतिशत 36 से बढ कर 43 हो गया। बिजली की अनुपलब्धता अब भी असंतोष का शीर्ष कारण है। वहीं, मासिक बिल को लेकर असंतोष जताने वाले परिवारों का प्रतिशत 55 से बढ कर 73 हो गया है। अध्ययन में कहा गया है कि इसकी वजह महामारी के कारण नौकरियां छूटना हो सकता है। आपूर्ति की विश्वसनीयता को एक बाधा बताने वाले परिवारों का प्रतिशत 21 से बढ कर 49 हो गया।

सोलर होेम सिस्टम, माइक्रोग्रिड, सोलर लालटेन को रोशनी के प्राथमिक स्रोत के रूप में उपयोग करने वालों का प्रतिशत तीन से बढ कर पांच हो गया। इनका उपयोग करने वालांें के बीच इसके माध्यम से बिजली आपूर्ति का घंटा चार से बढ कर अब पांच हो गया है, जो एक अच्छी बात है।

 

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