Giridih News: तीसरी प्रखंड के असुरहड्डी जंगल में मिला लिथियम का भंडार, GSI कर रही गुणवत्ता की जांच
जंगल में छिपा अरबों का खजाना—लिथियम भंडार की पुष्टि के बाद तेज हुआ सर्वे
गिरिडीह जिले के तिसरी प्रखंड स्थित असुरहड्डी जंगल में लिथियम भंडार मिलने की संभावना के बाद जूलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (GSI) ने सर्वेक्षण कार्य तेज कर दिया है। आधुनिक तकनीकों की मदद से मिट्टी और चट्टानों के नमूने एकत्र कर उनकी जांच की जा रही है।
गिरिडीह: तिसरी प्रखंड के असुरहड्डी जंगल में लिथियम मिलने की खबर के बाद अब आधिकारिक स्तर पर सर्वेक्षण तेज कर दिया गया है। यह खबर झारखंड के औद्योगिक इतिहास में एक 'टर्निंग पॉइंट' साबित हो सकती है। गिरिडीह जिले के तिसरी प्रखंड का असुरहड्डी जंगल अब सिर्फ पेड़ों और पहाड़ों के लिए नहीं, बल्कि दुनिया के सबसे कीमती खनिज लिथियम के लिए जाना जाएगा।


झारखंड की धरती हमेशा से रत्नागर्भा रही है, लेकिन इस बार जो खजाना हाथ लगा है, वह सोने-चांदी से भी ज्यादा कीमती है। जूलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (GSI) ने गिरिडीह के तिसरी प्रखंड स्थित असुरहड्डी के जंगलों में लिथियम के भंडार की संभावना की पुष्टि के बाद अब सर्वे की रफ्तार बढ़ा दी है।
लिथियम को 'सफेद सोना' (White Gold) कहा जाता है। आज के दौर में स्मार्टफोन से लेकर इलेक्ट्रिक गाड़ियों (EV) तक, हर उस चीज़ में लिथियम का इस्तेमाल होता है जिसे चार्ज किया जा सके। जूलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया की टीम आधुनिक उपकरणों के साथ जंगल के चप्पे-चप्पे की खाक छान रही है।

मिट्टी और चट्टानों के नमूनों को विशेष कोडिंग के साथ लैब भेजा गया है ताकि लिथियम की शुद्धता (Grade) का पता चल सके। अगर यहाँ भारी मात्रा में लिथियम मिलता है, तो गिरिडीह और पूरे झारखंड की अर्थव्यवस्था बदल सकती है वर्तमान में भारत अपनी जरूरत का 80% से ज्यादा लिथियम चीन और अन्य देशों से आयात करता है।
असुरहड्डी में इसकी उपलब्धता का मतलब है
सस्ते होंगे इलेक्ट्रिक वाहन: जब बैटरी देश में बनेगी, तो गाड़ियाँ सस्ती होंगी।
रोजगार की बौछार: खनन और रिफाइनरी लगने से हजारों स्थानीय युवाओं को काम मिलेगा। भारत दुनिया के उन चुनिंदा देशों की लिस्ट में शामिल हो जाएगा जिनके पास अपना लिथियम रिजर्व है।
असुरहड्डी का इलाका दुर्गम और जंगली है
सर्वे टीम के लिए यहाँ काम करना चुनौतीपूर्ण है, लेकिन जिस तरह से आधिकारिक स्तर पर सक्रियता बढ़ी है, उससे साफ है कि केंद्र और राज्य सरकार इस प्रोजेक्ट को लेकर बेहद गंभीर हैं। गिरिडीह की यह 'चमक' आने वाले समय में भारत को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने वाली है। कोयले की राजधानी कहा जाने वाला झारखंड अब 'बैटरी कैपिटल' बनने की ओर अग्रसर है।
