कौन है भीम राम? जिसने भगताइन के कहने पर विष्णुगढ़ की बच्ची का सिर पत्थर से मारकर कुचला
हजारीबाग क्राइम: भीम राम एक असाधारण व्यक्ति का नाम है। यह नाम कोई अनूठा नहीं है, हिमांशु हजारीबाग जिले के विष्णुगढ़ प्रखंड के झुमरा गांव के 12 वर्षीय लड़की के हत्या का मुख्य आरोपी है। यहां वह आदमी है, जिसने तथाकथित तंत्र-मंत्र के चक्कर में बच्ची के सिर पर पत्थर मार दिया। भीम राम ने पहले बच्चे का गला दबाकर और उसके बाद सिर पर पत्थर से वार किया।
दोहरा चरित्र: कैमरे पर नसीहत, पीठ पीछे कत्ल
गिरफ्तारी से पहले भीम राम एक जागरूक नागरिक का नाटक कर रहा था। उसने कई मीडिया इंटरव्यू में राज्य की कानून-व्यवस्था पर सवाल उठाए और हेमंत सोरेन सरकार को नसीहत देते हुए अपराधियों को फांसी देने की मांग की थी। उसने बड़े ही आत्मविश्वास के साथ कहा था "झारखंड में बहू-बेटियां सुरक्षित नहीं हैं, अपराधियों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।" आज उसका यही वीडियो सोशल मीडिया पर 'एक्टिंग' के नाम से वायरल है, क्योंकि जिस बच्ची के लिए वह न्याय मांग रहा था, उसका असल कातिल वह खुद निकला।
तंत्र-मंत्र और खौफनाक साजिश

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साजिशकर्ता: गांव की कथित 'भगताइन' शांति देवी।
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उकसावा: शांति देवी ने मृतका की मां, रेशमी देवी को यकीन दिलाया कि उसके बेटे की बीमारियां और परेशानियां तभी दूर होंगी, जब किसी 'कुंवारी कन्या' की बलि दी जाएगी।
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सहयोग: रेशमी देवी, जो पिछले एक साल से तांत्रिक के चक्कर में थी, इस क्रूर सलाह को मानने के लिए तैयार हो गई।
उस काली रात का मंजर (24 मार्च)
रामनवमी के मंगला जुलूस की रात जब पूरा गांव उत्सव में डूबा था, तब इस खौफनाक साजिश को अंजाम दिया गया।
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शांति देवी के कहने पर रेशमी देवी ने भीम राम को बुलाया।
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भीम राम ने पहले मासूम बच्ची का गला दबाया। जब बच्ची तड़पने लगी, तो मां (रेशमी देवी) ने उसके पैर पकड़ लिए ताकि वह हिल न सके।
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बच्ची के अचेत होने के बाद, भीम राम ने उसके सिर पर पत्थर से वार कर खून निकाला।
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हैरान करने वाली बात: उसी खून से भगताइन शांति देवी ने जमीन को लीपा और अपना 'तंत्र-मंत्र' पूरा किया।
अवैध संबंध और पुलिस को गुमराह करने की कोशिश
हजारीबाग के एसपी अंजनी अंजन ने प्रेस वार्ता में खुलासा किया कि भीम राम लगातार पुलिस और जांच एजेंसियों को गुमराह कर रहा था। सूत्रों और स्थानीय चर्चाओं के अनुसार, भीम राम का बच्ची की मां रेशमी देवी के साथ पिछले 10 वर्षों से अवैध संबंध था। इसी नजदीकी का फायदा उठाकर उसने इस हत्याकांड में सक्रिय भूमिका निभाई और बाद में खुद को बेगुनाह दिखाने के लिए मीडिया के सामने आकर बयानबाजी की।
अंधविश्वास की जड़ें गहरी
यह मामला साफ तौर पर दर्शाता है कि आज के आधुनिक दौर में भी 'डायन प्रथा' और 'बलि' जैसे अंधविश्वास समाज में जहर घोल रहे हैं। एक मां का अपनी ही बेटी को मौत के घाट उतरवा देना और एक अपराधी का समाज सुधारक का चोला पहनना, इस घटना के सबसे डरावने पहलू हैं।
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