विष्णुगढ़ कांड से उठते सवाल, अपराध की चर्चा कम और भाजपा की अधिक
अंधविश्वास और अशिक्षा बनी समाज के लिए अभिशाप
हजारीबाग के विष्णुगढ़ (कुसुंबा गांव) में नाबालिग बच्ची की जघन्य हत्या ने झारखंड सहित पूरे देश को झकझोर दिया है। आरोपी भीम राम की राजनीतिक पृष्ठभूमि को लेकर छिड़ी बहस ने इस गंभीर अपराध को सियासी रंग दे दिया है, जहाँ विपक्षी दल भाजपा को घेर रहे हैं, वहीं भाजपा इसे बदनाम करने की साजिश बता रही है। नरबलि की थ्योरी और हत्या के क्रूर तरीके (गुप्तांग में छड़ी और दम घुटने) पर भी कई सवाल उठ रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अपराधी को किसी पार्टी से जोड़कर देखने के बजाय फास्ट ट्रैक कोर्ट के माध्यम से उसे कड़ी सजा दिलाने पर ध्यान केंद्रित होना चाहिए।
सुनील सिंह
रांची: हजारीबाग जिले के विष्णुगढ़ थाने की कुसुंबा गांव में नाबालिग बच्ची की हत्या के मामले में पुलिस ने जो खुलासा किया है वह सचमुच हैरान कर देने वाली घटना है। मानवता और रिश्तों को तार-तार करने वाली। निंदा के लिए शब्द नहीं। पुलिस के खुलासे के बाद कई सवाल भी उठ खड़े हुए हैं। पहला सवाल आरोपी भीम राम को ले और दूसरा सवाल नरबलि को लेकर। भीम राम को भाजपा का कार्यकर्ता बताया गया। भाजपा का नाम आते ही तूफान खड़ा हो गया। असम में चुनावी मुद्दा बन गया। मुख्यमंत्री से लेकर भाजपा के तमाम विरोधी दलों के नेता भीम राम के बहाने भाजपा को टारगेट करने में जुट गए। जघन्य अपराध की चर्चा थम गई। इधर, भाजपा ने मोर्चा संभाला और सफाई दी कि भीम राम भाजपा का कार्यकर्ता नहीं है। पार्टी को बदनाम किया जा रहा है। भाजपा इस मामले में पूरी तरह डिफेंसिव हो गई। इसके सिवाय कोई उपाय भी नहीं था।

कोई पार्टी या उसका बड़ा नेता किसी को यह नहीं कहता कि तुम अपराध करो और पार्टी को बदनाम करो। हालांकि कुछ अपवाद हो सकता है। लाखों कार्यकर्ता और समर्थक होते हैं ऐसे में कौन किस पृष्ठभूमि का है पता करना मुश्किल होता है। जब मामले का खुलासा होता है तभी पता चलता है इसलिए फोकस भीम राम जैसे लोगों पर नहीं अपराध पर होना चाहिए। दूसरा सवाल नरबलि को लेकर है। कुछ लोग और परिजन नरबलि की घटना को पुलिस की कहानी बता रहे हैं। झारखंड में ओझा- गुणी, नरबलि जैसी कुप्रथा गंभीर समस्या है। ऐसी घटनाएं अंधविश्वास और अशिक्षा के कारण होती हैं।
जैसा कि नाम है नरबलि यानी नर की बालि। इस मामले में बच्चों की बलि नहीं दी गई। गला नहीं काटा गया। बच्ची की मौत दम घुटने से हुई है। गला और नाक दबाने से बच्ची की मौत की पुष्टि हुई है। कहा गया कि सिर फाड़ कर खून चढ़ाया गया। बच्ची के गुप्तांग में छड़ी घुसाने की बात भी कही गई है। मामला जब नरबलि का है तो फिर छड़ी क्यों क्यों घुसाई गई। यह बिल्कुल अलग तरह का मामला है।
इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की जरूरत है। ताकि संदेह की कोई गुंजाइश न रहे। घटना में शामिल सभी लोगों को जल्द से जल्द फांसी की सजा मिले। इसके लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट का गठन किया जाना चाहिए। मैं फिर कहता हूं कि अपराधियों की कोई जाति और पार्टी नहीं होती। वह अपराध ही होते हैं और किसी पार्टी के साथ जुड़ जाने से अपराध कम नहीं हो जाता। इसलिए चर्चा अपराध और अपराधी की होनी चाहिए न कि किसी पार्टी की।
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