750 करोड़ शराब घोटाले में ACB पर सवाल, CBI जांच की मांग तेज
विभिन्न जन मुद्दों को लेकर राज्यपाल से की हस्तक्षेप की मांग
झारखंड के बहुचर्चित 750 करोड़ रुपये से अधिक के शराब घोटाले को लेकर राजनीतिक विवाद गहराता जा रहा है। नेता प्रतिपक्ष ने राज्यपाल को पत्र लिखकर ACB की भूमिका पर गंभीर सवाल उठाए हैं। आरोप है कि जांच एजेंसी ने समय पर चार्जशीट दाखिल नहीं कर जानबूझकर आरोपियों को डिफॉल्ट बेल दिलाने का रास्ता साफ किया।
रांची: झारखंड के बहुचर्चित 750 करोड़ रुपये से अधिक के शराब घोटाले को लेकर सियासी पारा एक बार फिर चढ़ गया है। झारखंड विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष ने इस मामले में राज्यपाल को पत्र लिखकर भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) की भूमिका पर गंभीर सवाल उठाए हैं और जांच तत्काल केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) को सौंपने की मांग की है।
नेता प्रतिपक्ष ने अपने पत्र में आरोप लगाया है कि राज्य की जांच एजेंसी ACB इस गंभीर आर्थिक अपराध की निष्पक्ष जांच करने के बजाय सत्ता-संपोषित भ्रष्टाचार को संरक्षण दे रही है। उन्होंने कहा कि यह स्पष्ट हो चुका है कि ACB ने जानबूझकर वैधानिक समय-सीमा के भीतर आरोप-पत्र (चार्जशीट) दाखिल नहीं किया, जिसके कारण कई आरोपियों को ‘डिफॉल्ट बेल’ मिल गई।

नेता प्रतिपक्ष ने आरोप लगाया कि 90 दिनों की निर्धारित समय-सीमा के भीतर चार्जशीट दाखिल नहीं किए जाने के कारण कुल 17 में से 14 आरोपियों को डिफॉल्ट बेल मिल गई। उन्होंने इसे जांच एजेंसी की “लचर और मिलीभगत वाली कार्यप्रणाली” करार दिया।
मामले में एक अन्य उदाहरण देते हुए कहा गया कि छत्तीसगढ़ के शराब कारोबारी नवीन केडिया की गिरफ्तारी के बाद भी वह पुलिस को चकमा देकर फरार हो गया, जिसे अब तक ACB गिरफ्तार नहीं कर पाई है। इसे भी जांच एजेंसी की विफलता बताया गया।
नेता प्रतिपक्ष ने राज्यपाल से मांग की है कि ACB को तत्काल चार्जशीट दाखिल करने का निर्देश दिया जाए और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच के लिए इसे CBI को सौंपा जाए, ताकि दोषियों को सजा मिल सके और जनता का कानून व्यवस्था पर विश्वास बना रहे।
इस मामले को लेकर राज्य की राजनीति में एक बार फिर घमासान तेज हो गया है और आने वाले दिनों में यह मुद्दा और तूल पकड़ सकता है।
