Bokaro News: दयालेश्वर मंदिर में रुद्र महायज्ञ और राधा-कृष्ण प्राण प्रतिष्ठा का भव्य आगाज़
15 अप्रैल को मंदिर में स्थापित होंगी प्रतिमाएं, क्षेत्र में है भारी उत्साह
गोमिया प्रखंड के ढेंढे स्थित दयालेश्वर मंदिर परिसर में शनिवार को श्री श्री 1008 रुद्र महायज्ञ सह राधा-कृष्ण प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव का विधिवत शुभारंभ हुआ। विद्वान पंडितों के मंत्रोच्चार और भूमि पूजन के साथ पांच दिवसीय धार्मिक अनुष्ठान की नींव रखी गई। 11 से 14 अप्रैल तक श्रद्धालु सुश्री सोनम जी के मुखारविंद से रामकथा का आनंद लेंगे, जबकि 15 अप्रैल को मूर्तियों की प्राण प्रतिष्ठा और भव्य भक्ति जागरण का आयोजन किया जाएगा। इस आयोजन से पूरे क्षेत्र का वातावरण आध्यात्मिक और शुद्ध हो गया है।
गोमिया: ढेंढे स्थित दयालेश्वर मंदिरमें भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार हुआ क्योंकि श्री श्री 1008 रुद्र महायज्ञ सह राधा-कृष्ण प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव का विधिवत आगाज़ हो गया। इस पांच दिवसीय धार्मिक अनुष्ठान की शुरुआत शनिवार को मंत्रोच्चार के बीच भूमि पूजन के साथ हुई। भक्तों की भारी उपस्थिति और जयकारों से पूरा वातावरण गुंजायमान रहा।
पांच दिवसीय कार्यक्रम की रूपरेखा:
यह आयोजन 11 अप्रैल से शुरू होकर 15 अप्रैल तक चलेगा, जिसमें प्रतिदिन विशेष आध्यात्मिक गतिविधियों का आयोजन किया जाएगा, महोत्सव का शुभारंभ वैदिक रीति-रिवाजों के साथ भूमि पूजन के साथ हुआ। मुख्य पुजारी भास्कर प्रजापति और विद्वान पंडितों आचार्य शैलेन्द्र कुमार पांडेय, प्रयाग पांडेय, रुपेश शास्त्री तथा तेज नारायण प्रसाद, महावीर प्रसाद, रामू यादव, ज्ञानी प्रसाद, हेमलाल प्रसाद, रामचंद्र प्रसाद, विजय कुमार, रविंद्र विश्वकर्मा आदि यजमानों की उपस्थिति में पवित्र भूमि को अनुष्ठान के लिए तैयार किया गया।
11 से 14 अप्रैल (राम कथा):

15 अप्रैल (प्राण प्रतिष्ठा एवं भक्ति जागरण):
महोत्सव का अंतिम दिन विशेष होगा। इस दिन राधा-कृष्ण की प्रतिमाओं की प्राण प्रतिष्ठा की जाएगी। इसी के साथ शाम को एक भव्य भक्ति मय जागरण का आयोजन होगा, जिसमें ख्याति प्राप्त भजन गायकों द्वारा प्रस्तुतियां दी जाएंगी।
भक्तों के लिए अपील:
यज्ञ समिति और ग्रामीणों ने क्षेत्र के सभी धर्मप्रेमियों से अपील की है कि वे इस पावन अवसर पर अधिक से अधिक संख्या में पधारें और रुद्र महायज्ञ की परिक्रमा कर पुण्य के भागी बनें। आयोजन को सफल बनाने के लिए व्यापक तैयारियां की गई हैं और सुरक्षा के साथ-साथ श्रद्धालुओं की सुविधाओं का भी पूरा ध्यान रखा जा रहा है। धार्मिक अनुष्ठानों के अनुसार, ऐसे यज्ञों से न केवल आध्यात्मिक शांति मिलती है, बल्कि वातावरण की शुद्धि और समाज में एकता का संचार भी होता है।
