झारखंड में चल रही है ‘फटकार आधारित शासन’ व्यवस्था: प्रतुल शाहदेव 

हेमंत सरकार अपने संवैधानिक कर्तव्यों का निर्वहन करने में पूरी तरह अक्षम साबित हुई

झारखंड में चल रही है ‘फटकार आधारित शासन’ व्यवस्था: प्रतुल शाहदेव 
(प्रतुल शाहदेव फाइल फोटो)

भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव ने झारखंड की हेमंत सरकार पर "फटकार आधारित शासन" चलाने का गंभीर आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि निकाय चुनाव, पंचायत सचिवों की नियुक्ति और सूचना आयुक्तों के चयन जैसे महत्वपूर्ण निर्णय सरकार ने अपनी इच्छा से नहीं, बल्कि न्यायालय की कड़ी फटकार और हस्तक्षेप के बाद लिए हैं। शाहदेव के अनुसार, सरकार अपनी संवैधानिक जिम्मेदारियों से भाग रही है और केवल कानूनी दबाव में ही काम कर रही है, जो राज्य की लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए दुर्भाग्यपूर्ण है।

रांची: भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता प्रतुल शाह देव ने कहा कि झारखंड में शासन व्यवस्था की स्थिति बेहद चिंताजनक हो चुकी है। हेमंत सरकार अब अपने संवैधानिक दायित्वों का निर्वहन स्वयं नहीं कर रही, बल्कि माननीय न्यायालयों की फटकार के बाद ही हरकत में आती है। प्रतुल ने कहा कि हेमंत सरकार का पूरा कार्यकाल इस बात का प्रमाण है कि यह सरकार “फटकार आधारित शासन” चला रही है। जब तक उच्च न्यायालय या सर्वोच्च न्यायालय कड़ी टिप्पणी नहीं करता, तब तक सरकार महत्वपूर्ण निर्णयों को टालती रहती है।

प्रतुल ने कहा कि राज्य में निकाय चुनाव वर्षों तक लंबित रखे गए, लेकिन उच्च न्यायालय की सख्ती के बाद ही चुनाव कराए गए। पंचायत सचिव अभ्यर्थियों की नियुक्ति भी लंबे समय तक अटकी रही, लेकिन सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के बाद ही सरकार को प्रक्रिया पूरी करनी पड़ी। सूचना आयुक्तों और लोकायुक्त जैसे महत्वपूर्ण संवैधानिक पदों को भरने में भी सरकार पूरी तरह विफल रही। उच्च न्यायालय के निर्देश के बाद ही चयन समिति की बैठक की तिथि तय की गई। इसी प्रकार थानों में सीसीटीवी कैमरे लगाने जैसी आवश्यक 

नियुक्तियों, प्रशासनिक फैसलों और कानून-व्यवस्था से जुड़े कई मामलों में न्यायालय को बार-बार हस्तक्षेप करना पड़ा है। यह दर्शाता है कि सरकार अपनी जिम्मेदारियों से बच रही है और केवल दबाव में काम कर रही है। एक लोकतांत्रिक सरकार से अपेक्षा होती है कि वह जनता के प्रति जवाबदेह हो और समय पर निर्णय ले, लेकिन झारखंड में सरकार की जवाबदेही केवल न्यायालय की फटकार तक सीमित रह गई है। यह स्थिति राज्य के लिए बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने मांग की कि हेमंत सरकार न्यायालय के आदेशों का इंतजार करने के बजाय स्वयं पहल कर राज्यहित में निर्णय ले, अन्यथा यह सरकार पूरी तरह से निष्क्रिय और दिशाहीन साबित होगी।

Edited By: Anjali Sinha
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