Hazaribagh News: विभावि के राजनीति विज्ञान विभाग में याद किए गए शहीद-ए-आजम
विभागाध्यक्ष डॉ. सुकल्याण मोइत्रा ने छात्रों को दी क्रांतिकारी साहित्य पढ़ने की प्रेरणा
विनोबा भावे विश्वविद्यालय, हजारीबाग के राजनीति विज्ञान विभाग में सोमवार को 'बलिदान दिवस' के अवसर पर शहीद भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव को याद किया गया। विभागाध्यक्ष डॉ. सुकल्याण मोइत्रा की अध्यक्षता में आयोजित इस कार्यक्रम में वक्ताओं ने भगत सिंह को मात्र एक क्रांतिकारी ही नहीं, बल्कि एक महान दार्शनिक और तर्कसंगत विचारक बताया। शोधार्थियों ने उनकी पुस्तक 'Why I am an Atheist' और उनके मानवतावादी राष्ट्रवाद पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं ने हिस्सा लिया और शहीदों के जीवन से प्रेरणा लेने का संकल्प लिया।
हजारीबाग: विनोबा भावे विश्वविद्यालय के राजनीति विज्ञान विभाग में सोमवार को 'बलिदान दिवस' के अवसर पर शहीद-ए-आजम भगत सिंह, शिवराम हरी राजगुरु और सुखदेव थापरर को श्रद्धा पूर्वक याद किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए विभागाध्यक्ष डॉ सुकल्याण मोइत्रा ने बताया कि यह राष्ट्र सदियों तक इन तीनों महान क्रांतिकारी महापुरुषों का ऋणी रहेगा। बताया कि भगत सिंह द्वारा जेल में लिखी गई पुस्तक ही आधुनिक भारत के युवाओं का गीता, बाइबल, कुरान होनी चाहिए।
प्राध्यापक डॉ अजय बहादुर सिंह भगत सिंह को एक क्रांतिकारी राष्ट्रवादी के रूप में बताया। कहा कि उनमें क्रांति और दर्शन का अद्भुत मिश्रण था। वह तर्कसंगत विश्लेषण करने वाले मानवतावादी थे। इस अवसर पर शोधार्थी धर्मेंद्र ने भगत सिंह की जीवन यात्रा पर प्रकाश डालते हुए बताया की कैसे जलियांवाला बाग कांड से आक्रोशित होकर बहुत कम उम्र के भगत सिंह राष्ट्रीय आंदोलन से जुड़ गए। संसद में बम धमाका करने के पीछे भगत सिंह की सोच को भी समझाया। बाद में जेल में 116 दिन के भूख हड़ताल की बात भी याद कराइ। धर्मेंद्र ने बताया कि भगत सिंह ने "इंकलाब जिंदाबाद" के नारा को बुलंद किया और मात्र 23 वर्ष की उम्र में भारत की आजादी के लिए शहीद हो गए। भगत सिंह के अभिन्न साथी पटना के बटुकेश्वर दत्त की कुर्बानी की भी चर्चा की।

शोधार्थी महेंद्र पंडित ने भगत सिंह द्वारा लिखी पुस्तक 'व्हाई आई एम एन अथॆिस्ट' (Why I am an atheist) पर विस्तार से अपने विचार रखें। उन्होंने बताया कि भगत सिंह ने सवाल उठाया था कि यदि भगवान है तो विश्व युद्ध जैसा युद्ध क्यों हुआ, भारत जैसा राष्ट्र उपनिवेश क्यों बना, जलियांवाला बाग जैसी निर्मम घटनाएं क्यों घटी? बताया कि भगत सिंह को तर्कसंगत विश्लेषण पसंद था। वह धर्म के पाखंड से उलट अपने को नास्तिक कहते थे। परंतु वह शोषण और अन्याय मुक्त समाज की स्थापना करना चाहते थे। मौके पर बड़ी संख्या में शोधार्थी एवं प्रथम और चतुर्थ समसत्र के विद्यार्थी उपस्थित थे।
