डीपीएस बोकारो में धरातल पर उतरी बच्चों की 'संकल्पना', आकर्षक कला-प्रदर्शनी ने किया मंत्रमुग्ध
विद्यार्थियों की रचनात्मकता का शानदार प्रदर्शन
बोकारो के डीपीएस में ‘संकल्पना’ कला-प्रदर्शनी का आयोजन हुआ, जिसमें विद्यार्थियों की पेंटिंग, 3डी प्रिंटिंग और रोबोटिक्स मॉडल आकर्षण का केंद्र रहे। अभिभावकों ने बच्चों की रचनात्मकता की सराहना की। कार्यक्रम का उद्घाटन प्राचार्य ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया और समग्र विकास पर जोर दिया गया।
बोकारो : दिल्ली पब्लिक स्कूल बोकारो में सोमवार को 'संकल्पना' नामक कला-प्रदर्शनी का भव्य आयोजन किया गया। इस रमणीक प्रदर्शनी में विद्यार्थियों के साथ-साथ शिक्षकों की कल्पना भी धरातल पर उनकी कलाकृतियों के रूप में उतरी रही। भांति-भांति के दर्जनों पेंटिंग्स और बैगलेस डेज की अवधि में बच्चों द्वारा तैयार कलात्मक रचनाओं ने खूब लुभाया।
एक्रेलिक, वाटर कलर, पेन-इंक आदि से तैयार मनोरम चित्रकारी में भक्ति-आस्था, प्राकृतिक दृश्य, सामाजिक परिदृश्यों, आम जनजीवन, बाजार, मिथिला पेंटिंग, पशु-पक्षी, कार्टून कैरेक्टर आदि को बखूबी दर्शाया गया। शिक्षक तो शिक्षक, बच्चों ने भी जिस प्रकार से अपनी कलात्मक भावनाओं को कैनवास पर पूर्ण परिपक्वता व बारीकी के साथ उतारा, उसने सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया।

इस अवसर पर विद्यालय के कंपोजिट स्किल लैब (राकेश शर्मा एयरो इनोवेशन लैब) की ओर से लगाया गया स्टॉल भी कौतूहल और ज्ञानपरक रोचकता से भरा रहा। विद्यार्थियों द्वारा 3डी प्रिंटिंग व सीएनसी लेजर कटिंग मशीन से तैयार आर्टवर्क के अलावा जेट इंजन, रोबोटिक्स, मैक्सवेल पेंडुलम, उच्च गुणवत्ता की दूरबीन, हाइड्रोलिक तकनीक आदि से संबंधित प्रदर्शों ने जहां अभिभावकों को ज्ञानपरक रोचकता से भर दिया, वहीं त्रिविमीय प्रिंटिंग तकनीक को करीब से देखना किसी रोमांच से कम नहीं था।
इसके पूर्व, विद्यालय के प्राचार्य डॉ. ए. एस. गंगवार ने अभिभावकों के साथ दीप प्रज्ज्वलित कर तथा पेंटिंग बनाकर प्रदर्शनी का उद्घाटन किया। साथ ही, इस सफल आयोजन पर शिक्षकों और विद्यार्थियों, खासकर कला विभाग के कार्यो को अपनी बधाई दी। उन्होंने कहा कि डीपीएस बोकारो विद्यार्थियों के समग्र विकास की अपनी कटिबद्धता की दिशा में उनके कलात्मक कौशल को भी निखारने का हर अवसर और मंच प्रदान करता रहा है। ऐसी प्रदर्शनियां उनके भीतर छिपे हुनर को निखारने का एक सशक्त मंच हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि आने वाले समय में ऐसी प्रदर्शनियों का स्वरूप और भी व्यापक होगा, जिससे बच्चों की रचनात्मक ऊर्जा को नई दिशा मिलेगी।
