श्रद्धालुओं को मिली भेंट, बाबा बासुकीनाथ और बैद्यनाथ के दर्शन कर पायेंगे भक्त

कोरोना काल में भक्तों के लिए भगवान के दर्शन करना नामुमकिन हो गया है. ऐसे में हिन्दू धर्म के अनुसार सावन महीने को सबसे पवित्र माह माना जाता है. मगर कोरोना महामारी के कारण भगवान भी अपने भक्तों से सोशल डिस्टन्सिंग में रह रहे थे. इसके लिए झारखण्ड हाईकोर्ट में सार्वजानिक पूजा की याचिका दायर की गयी थी. मगर पिछली सुनवाई में झारखण्ड हाईकोर्ट ने इसकी मंजूरी नहीं दी.

सावन के अंतिम सोमवारी से पहले सुप्रीम कोर्ट ने देवघर स्थित बाबा बैद्यनाथ एवं दुमका जिला स्थित बासुकिनाथ मंदिर को खोलने का निर्देश दिया है. बता दें, बीते दिन गुरूवार को मामले को लेकर सुनवाई हुई थी. जिसके बाद बाकी रेस्पोंडेंट्स को कोर्ट ने नोटिस तामिला करने का निर्देश दिया और अपना- अपना पक्ष रखने को कहा. मामले की अंतिम तारीख 31 जुलाई 2020 कि तय की गयी थी. वहीं सरकार का पक्ष सुनने के बाद देश की सर्वोच्च अदालत ने अपना फैसला मंदिरों को खोलने के पक्ष में दिया.
आज मेरे याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने देवघर व बासुकिनाथ मंदिर के साथ साथ पूरे देश भर के मंदिरों को खोलने व पूजा की इजाज़त दी । माननीय उच्चतम न्यायालय का आभार । झारखंड सरकार के मुँह में यह तमाचा उसके इस्तीफ़ा की ओर ले जाता है ,माननीय प्रधानमंत्री @narendramodi जी के रहते सब ठीक होगा pic.twitter.com/kg7A65fdYD
— Dr Nishikant Dubey (@nishikant_dubey) July 31, 2020
बता दें, डॉ निशिकांत दुबे की ओर से अधिवक्ता समीर मलिक एवं प्रशांत ने दलीलें पेश कीं, जबकि रेस्पोंडेंट की ओर से तुषार मेहता, श्रद्धा देशमुख समेत चार सरकारी अधिवक्ताओं ने अपना-अपना पक्ष रखा.मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस अरुण मिश्रा समेत तीन न्यायाधीशों ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से की.
हालाँकि, कुछ निजी चैनलों के ज़रिये पूजा और शृंगार का सीधा प्रसारण दिखाया जा रहा है. तब से लाखों श्रद्धालु सुबह-शाम बाबा बैद्यनाथ के ऑनलाइन दर्शन कर पा रहे हैं. मगर बाबा को सामने से जलार्पण करने के lलिए भक्त बेसब्री इंतज़ार में है.
गौरतलब है, मंदिरों के खुलने के बाद श्रद्धालु सावन के आखिरी सोमवार को बाबा के दर्शन अवश्य करना चाहेंगे. ऐसे में मंदिर परिसर में सावधानी बरतते हुए दर्शन करने की अनुमति दी जायेगा. मास्क, सैनिटाइजर और सोशल डिस्टन्सिंग का पालन करते हुए ही दर्शन करना अनिवार्य है.