प्रकृति को ताक पर रखकर विकास की लकीर नहीं खींची जा सकती: हेमंत सोरेन

रांची: वन संरक्षण एवं वनोत्पाद के वैल्यू एडिशन के माध्यम से लोगों को लाभ तथा रोजगार की दिशा में सरकार आगामी बजट सत्र के बाद पूरी गति से कार्य करेगी। झारखंड वासियों और वनों का घनिष्ट संबंध है। जंगलों पर आधारित उद्योग से सुदूर ग्रामीण तथा वन आच्छादित क्षेत्रों के ट्राइबल सहित सभी वर्गों के लोगों को जोड़कर उन्हें लाभान्वित करना हमारी सरकार की प्राथमिकता है।

इसके बाद सीएम ने कहा कि देश के गोवा, मध्य प्रदेश, उत्तराखंड जैसे राज्यों के पास सिर्फ प्रकृतिक सौंदर्य है, और वे आज देश की अग्रणी राज्यों में शुमार हैं। जबकि झारखंड में प्राकृतिक सौंदर्य के साथ-साथ खनिज संपदा की भी उपलब्धता है। बरसों से लोग यहां इन संपादाओं के माध्यम से अपना जीवन यापन करते आये हैं। इसके अलावा जंगलों से सम्बंधित कानूनों को लेकर कहा कि कभी-कभी कानून के फेरबदल जंगलों का नुकसान होता रहा है। एक समय ऐसा भी था जब वन उत्पाद के रूप में बांस करील, महुआ, आंवला इत्यादि चीजों को बाजार में बेचने पर भी लोगों पर पुलिसिया कार्रवाई की जाती थी। परंतु ऐसे कानूनों के संशोधन होने से चीजें सुगम हुईं।
वहीँ प्रकृति और मनुष्यों के जुड़ाव पर मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रकृति को ताक पर रखकर विकास की लकीर नहीं खींची जा सकती। प्राकृतिक व्यवस्था और विकास के बीच की खायी को पाट कर ही आगे बढ़ा जा सकेगा। वहीँ ओड़िशा सरकार द्वारा कार्यक्रम में पत्तल के उपयोग करने के निर्णय पर हेमंत ने कहा कि ऐसे निर्णयों से व्यवसाय, रोजगार और पर्यावरण पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।
मुख्यमंत्री ने डॉ रामदयाल मुंडा जनजातीय कल्याण शोध संस्थान को ऐसे कार्यशाला आयोजित करने के लिए शुभकामनाएं और बधाई दी। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में यह संस्थान राज्य के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। इसके बाद उन्होंने डॉ रामदयाल मुंडा जनजातीय कल्याण शोध संस्थान, रांची स्थित ट्राईबल म्यूजियम एवं पूरे परिसर का अवलोकन भी किया।
कार्यक्रम में अनुसूचित जनजाति, अनुसूचित जाति, अल्पसंख्यक एवं पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग की सचिव हिमानी पांडे, डॉ रामदयाल मुंडा जनजातीय कल्याण शोध संस्थान, रांची के निदेशक रणेंद्र कुमार, आईएसबी हैदराबाद के प्रोफेसर अश्विनी छेत्री, वन विभाग एवं कल्याण विभाग के अन्य प्रतिनिधि सहित विभिन्न राज्यों से आए शोधकर्ता एवं अन्य लोग उपस्थित थे।