दीपिका पादुकोण व मेघना गुलजार की छपाक कैसी है, यहां जानिए
Chhapaak Movie Review
इस फिल्म में नाटकीयता नहीं है, बल्कि यह मालती के संघर्ष, उसकी इच्छाशक्ति व जीवटता को ही इंगित करती है. दीपिका ने वास्तविक एसिड पीड़िता की जिंदगी की हर बारीकी को पकड़ने की कोशिश की है.
फिल्म में दीपिका पादुकोण का किरदार यह कहते सुना जाता है: नाक नहीं है, कान नहीं है, झूमके कहां लटकाऊंगी. उनका दूसरा डायलाॅग है: कितना अच्छा होता…अगर एसिड बिकता ही नहीं…मिलता ही नहीं…तो फिकता ही नहीं. दीपिका पादुकोण के किरदार के ये डाॅयलाॅग महिलाओं के खिलाफ होने वाले अमानवीय अत्याचार को खिलाफ एक मजबूत फिल्म है.
हालांकि कुछ इक्का-दुक्का दर्शकों ने कहा कि फिल्म का फस्र्ट हाॅफ थोड़ा खींचता है, लेकिन दूसरा हाफ अच्छा है. फिल्म के दर्शक इसे रियलिटी के करीब मान रहे हैं, इसलिए पंसद कर रहे हैं.
फिल्म की कहानी मेघना गुलजार ने ही लिखी है, जबकि शंकर-एहसान-लोय ने इसे इसका संगीत दिया है. ए श्रीकर प्रसाद ने इसका संपादन किया है. मेघना गुलजार व दीपिका पादुकोण दोनों इस फिल्म की निर्माता हैं.



