मनरेगा श्रमिकों के धरने का 50 दिन पूरा होने पर नरेगा संघर्ष मोर्चा ने वित्त मंत्री को लिखा पत्र

नयी दिल्ली : मनरेगा श्रमिकों का गुरूवार, 13 अप्रैल 2023 को दिल्ली के जंतर-मंतर पर धरना का 50 दिन पूरा हो गया। इस आंदोलन के 50 दिन पूरे होने पर नरेगा संघर्ष मोर्चा ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को एक पत्र लिखा है। इस पत्र में वित्तमंत्री सीतारमण को हालात, मजदूरों की समस्या और उनकी मांगों से अवगत कराते हुए सरकार के दावों पर भी सवाल उठाया गया है।

Today is the 50th day of the protest which has seen participation of #NREGA workers from various states of the country against the multiple violations of the provisions of #NREGA. The NSM shall release 50 testimonies and a letter to the @FinMinIndia on denied rights. pic.twitter.com/iVXqfxAfao
— NREGA Sangharsh (@NREGA_Sangharsh) April 13, 2023
पत्र में कहा गया है कि इस साल मनरेगा के लिए बजट आवंटन में अभूतपूर्व कटौती की गयी है। इससे वेतन भुगतान में देरी होगी, काम की मांग का दमन होगा और गुणवत्ता वाली संपत्तियों की कमी पैदा हो रही है। पत्र में कहा गया है कि एनएमएमएस यानी राष्ट्रीय मोबाइल निगरानी प्रणाली और आधार जैसी अनियमित प्रौद्योगिकी आधारित भुगतान प्रणाली श्रमिकों के अधिकारों का उल्लंघन करती है।
वित्तमंत्री को लिखे गए इस पत्र में देश भर से मनरेगा के 50 श्रमिकों का साक्ष्य भी प्रस्तुत किया गया है।
इस पत्र में कहा गया है कि पिछले वित्त वर्ष में काम करने वाले कम से कम सभी लोगों के लिए कानूनी तौर पर 100 दिनों के काम की गारंटी देने के लिए 2.72 लाख करोड़ रुपये की कम से कम जरूरत होगी। जबकि इस साल का मनरेगा का बजट 60 हजार करोड़ रुपये है, जो जीडीपी का 0.198 प्रतिशत है। पत्र में कहा गया है कि इससे साल में मुश्किल से 15 दिन का रोजगार मिल पाएगा। ।
पत्र में कहा गया है कि केंद्र ने पश्चिम बंगाल को 7500 करोड़ रुपये से अधिक का फंड 26 दिसंबर 2021 से जारी नहीं किया है। ऐसा मनमाने ढंग से धारा 27 का प्रयोग कर किया गया है। 2762 करोड़ रुपये की मजदूरी मनरेगा मजदूरों की लंबित है।
विश्व बैंक की रिपोर्ट के अनुसार, श्रम बल में महिलाओं की हिस्सेदारी घटी है और 2021 में पांच में चार महिलाएं श्रम बल में शामिल नहीं हैं। जबकि नरेगा महिलाओं के लिए एक जीवन रेखा रही है। पिछले दशक में महिलाओं ने मनरेगा के तहत उत्पन्न कुल मानव दिवस में आधे की हिस्सेदारी की। साल 2022-23 में यह सबसे अधिक 57 प्रतिशत था। महिलाएं अन्य कार्यस्थलों की तुलना में नरेगा कार्यस्थल को अधिक सुरक्षित पाती हैं। नरेगा के बजट में कटौती महिलाओं, जिसमें आदिवासी, दलित व हाशिये की महिलाएं शामिल हैं, के लिए पहले से खतरनाक स्थिति बनाती हैं।
एनएमएमएस की आलोचना करते हुए कहा गया है कि इससे भुगतान में तकनीकी अड़चने आती हैं और श्रमिक बिना भुगतान के रहने को मजबूर हैं। इससे मजदूरों के 15 दिन के अंदर मजदूरी के भुगतान के अधिकार का भी उल्लंघन होता है। हालांकि इस साल जनवरी से मार्च के बिना 1.75 करोड़ परिवारों ने काम किया है, लेकिन पिछले साल की तुलना में 23 प्रतिशत की कमी आयी है।
इस पत्र में आधार बेस्ड पेमेंट सिस्टम की कमियों को गिनाया गया है और कहा गया है कि ग्रामीण विकास मंत्रालय के डेटा से ही पता चलता है कि 50 प्रतिशत से अधिक श्रमिक इसके लिए अभी भी अपात्र हैं। इसमें तीन गड़बड़ियां हैं – अस्वीकृत भुगतान, गलत भुगतान और डायवर्ट भुगतान।
पत्र में कहा गया है कि काम की मांग को पूरा करने और समय पर सुनिश्चित करने के लिए बजट आवंटन बढाया जाए व मजदूरी का भुगतान हो, पश्चिम बंगाल में लंबित मजदूरी भुगतान हो, एनएमएमएस ऐप को रद्द किया जाए और आधार आधारित पेमेंट सिस्टम को अनिवार्य नहीं बनाया जाए।