पश्चिम बंगाल के मनरेगा मजदूरों ने क्षेत्रीय श्रम आयुक्त से की बकाया मजदूरी की मांग

कोलकाता : पश्चिम बंगाल के मनरेगा श्रमिकों ने केंद्रीय श्रम आयोग के दफ्तर क्षेत्रीय श्रम आयुक्त हेमांग डीमंगल से मुलाकात की और उनके सामने अपने बकाया मजदूरी का सवाल उठाया। इसके जवाब में क्षेत्रीय श्रम आयुक्त ने अनभिज्ञता जाहिर की और यह वादा किया वे केंद्र सरकार के समक्ष उनकी मांगों को भेजेंगे।

इन संगठनों ने अपने वक्तव्य में कहा है कि पिछले साल यानी 2021-22 में पश्चिम बंगाल में मनरेगा श्रमिक योजना का उपयोग करने में सक्षम थे। भारत में मनरेगा श्रमिकों की संख्या 6.81 करोड़ थी। यह देश के कुल कार्यबल का 17 प्रतिशत है। भारत के संविधान के अनुच्छेद 21 व 23 के अनुसार, मनरेगा श्रमिकों को सम्मानजनक मजदूरी और समय पर काम का अधिकार है। पर, श्रमिकों को को मजदूरी व काम के अधिकार से वंचित किया गया है। उन्हें न्यूनतम मजदूरी, इएसआइ, मातृत्व लाभ आदि से वंचित रखा गया है।
केंद्र सरकार ने साल 2023-24 के लिए पश्चिम बंगाल का मनरेगा बजट भी मंजूर नहीं किया। भोजन व काम का अधिकार नेटवर्क इसे मनरेगा को समाप्त करने की कोशिश का हिस्सा मानता है। ग्रामीण श्रमिकों के पास जो थोड़े-बहुत कानूनी अधिकार हैं, उसे यह वापिस लेने की कोशिश है।