एक सप्ताह बाद नौका सेवा पुनः बहाल, साहिबगंज-मनिहारी आने-जाने वालों यात्रियों में खुशी
सुबह सूर्योदय से शाम सूर्यास्त तक होगा परिचालन
साहिबगंज और बिहार के मनिहारी के बीच गंगा में नाव संचालन 7 अप्रैल से फिर शुरू हो गया है। उपायुक्त हेमंत सती ने नाविकों के आग्रह पर आधी क्षमता और अनिवार्य लाइफ जैकेट जैसी शर्तों के साथ अनुमति दी है। एक सप्ताह से बंद इस सेवा के कारण यात्रियों को भागलपुर होकर लंबी दूरी तय करनी पड़ रही थी। सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए NDRF और जल पुलिस की टीमें लगातार गश्त करेंगी।
साहिबगंज: झारखंड राज्य के साहिबगंज तथा बिहार राज्य के मनिहारी आने-जाने वाले यात्रियों और पर्यटकों के लिए खुशखबरी है। करीब एक सप्ताह से बंद नाव संचालन 7 अप्रैल से फिर से शुरू हो गई है। नाविकों तथा नगरवासियों के आग्रह के बाद उपयुक्त हेमन्त सती ने कुछ शर्तों के साथ गंगा में नाव संचालन की अनुमति दे दी है। उपायुक्त ने बताया कि कुछ महत्वपूर्ण घाटों पर पर्यटकों के नाव तक पहुंचने के लिए जरूरी इंतजाम प्रशासन और नाविकों ने मिलकर पूरे कर लिए हैं। इन व्यवस्थाओं का जमीनी स्तर पर परीक्षण करने के बाद नाविकों को नाव संचालन की अनुमति दी गई है।
आधी क्षमता के साथ नाव संचालन की छूट
प्रशासन की ओर से जारी निर्देशों के अनुसार, किसी भी नाव में शत-प्रतिशत यात्रियों को लेकर परिचालन की अनुमति नहीं मिली है, बल्कि फिलहाल नाविक गंगा में आधी क्षमता के साथ नाव चला सकेंगे। सुबह सूर्योदय से शाम सूर्यास्त तक नाव संचालन होगा। इस दौरान पर्यटकों के लिए लाइफ जैकेट पहनना अनिवार्य होगा। बिना लाइफ जैकेट कोई भी यात्री या पर्यटक नाव पर सवार नहीं होगा। साथ ही, नाविकों को सुरक्षा से जुड़े अन्य जरूरी उपकरण भी अपने नाव में रखने होंगे। करीब एक सप्ताह के बाद नाव संचालन शुरू होने से नाविकों और यात्रियों में खुशी है। नाविक शम्भू निषाद ने बताया कि अनुमति मिलने के बाद अब नाविकों पर मंडरा रहा संकट धीरे-धीरे दूर होगा।
सतर्कता के लिए टीमें करेंगी गश्त

नाव व फेरी सेवा बंद
उल्लेखनीय है कि साहिबगंज और मनिहारी के बीच कुछ दिनों पूर्व गंगा नदी पर नौका और फेरी सेवा बंद कर दी गई थी। बंदोबस्तधारी द्वारा निर्धारित राशि जमा न करने और कागजी प्रक्रिया पूरी न होने के कारण जिला प्रशासन की ओर से यह निर्णय लिया गया था। यात्रियों को भागलपुर होकर सड़क मार्ग से आवागमन करना पड़ रहा था, जिससे उन्हें भारी कठिनाई और असुविधाओं का सामना करना पड़ रहा था।
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