Hazaribagh News : कोनार नहर परियोजना फिर भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरी
संयुक्त बिहार काल से विवादों में रही है कोनार नहर परियोजना
कोनार नहर परियोजना एक बार फिर भ्रष्टाचार और वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों के कारण चर्चा में है। अधूरे कार्यों को पूरा करने के नाम पर 1800 करोड़ रुपये के टेंडर, अवैध बालू उपयोग और बार-बार निर्माण को लेकर प्रशासन की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं।
हजारीबाग : संयुक्त बिहार के दौर से ही अपनी विसंगतियों के लिए चर्चित रही कोनार नहर परियोजना एक बार फिर भ्रष्टाचार के आरोपों के कारण सुर्खियों में है। कभी बिहार विधानसभा की जांच टीम द्वारा चुचु का मुरब्बा और अव्यवहारिक करार दी गई यह परियोजना आज अकुशल इंजीनियरिंग और सरकारी धन के कथित बंदरबांट का जीवंत उदाहरण बन गई है।
पुराना मर्ज, नई पटकथा : परियोजना के अधूरे कार्यों को पूरा करने के नाम पर लगभग 1800 करोड़ रुपये का ग्लोबल टेंडर निकाला गया है।

जिस नहर की ढलाई को उखाड़कर फिर से बनाया जा रहा है उसकी मरम्मत वर्ष 2016-18 के दौरान लगभग 30 करोड़ रुपये की लागत से की गई थी। इतने कम समय में दोबारा निर्माण पर जनता के पैसे की बर्बादी के सवाल उठ रहे हैं। अवैध बालू का उपयोग: पूरे इलाके में बालू के उठाव पर सख्त पाबंदी है। जहां आम नागरिकों के ट्रैक्टर पुलिस द्वारा जब्त किए जा रहे हैं, वहीं कंपनी के साइट कार्यालय में सैकड़ों टन बालू का भंडारण है।
आरोप है कि यह निर्माण कार्य लूट के बालू से हो रहा है। इस संदिग्ध बालू स्रोत को लेकर एक स्थानीय पत्रकार ने आरटीआई के जरिए जवाब मांगा है कि जब बालू घाटों की नीलामी ही नहीं हुई तो कंपनी के पास इतनी भारी मात्रा में बालू कहां से उपलब्ध हो रहा है? कोनार नहर परियोजना जो कभी किसानों की किस्मत बदलने के लिए शुरू हुई थी, आज एक बार फिर अपनी कार्यप्रणाली के कारण संदेह के घेरे में है। प्रशासन की चुप्पी और कंपनी की सक्रियता के बीच यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या इस बार यह नहर खेतों तक पानी पहुंचा पाएगी या यह केवल कागजी विकास और वित्तीय अनियमितताओं तक ही सीमित रहेगी।।
Susmita Rani is a journalist and content writer associated with Samridh Jharkhand. She regularly writes and reports on grassroots news from Jharkhand, covering social issues, agriculture, administration, public concerns, and daily horoscopes. Her writing focuses on factual accuracy, clarity, and public interest.
