जेएनयू में मानवाधिकार हनन पर हुई सेमिनार

शिक्षा व रोजगार का आभाव ही है, मानव तस्करी की जड़

नई दिल्ली: जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के कन्वेंशन सेंटर में मानव तस्करी एवं राजनीति में हो रहे मानवाधिकार के हनन पर एकदिवसीय सेमिनार का आयोजन किया गया । आपको बता दें कि राष्ट्रीय मानवाधिकार एवं अपराध नियंत्रण ब्यूरो और जेएनयू लिटरेरी क्लब के संयुक्त तत्वावधान में यह सेमिनार किया गया । जिसके प्रथम सत्र में ह्यूमन ट्रैफिकिंग के विषय पर चर्चा की गयी । कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में महाराष्ट्र की पहली महिला आईपीएस अधिकारी डाॅ० मीरण सी० बोरवाणकर उपस्थित थीं। अपने संबोधन में श्रीमती बोरवाणकर ने संबंधित विषय में अपनी चिंता व्यक्त की।साथ ही उन्होंने अपने कार्यकाल में हुए संबंधित घटनाओं से भी लोगों को रूबरू कराया। इसके अतिरिक्त तस्करी की रोकथाम पर कार्यरत लोगों को कई जानकारी दी। कार्यक्रम के बीच में राष्ट्रीय मानवाधिकार एवं अपराध नियंत्रण ब्यूरो के राष्ट्रीय अध्यक्ष रणधीर कुमार के द्वारा लिखित किताब मानवाधिकार एक परिचय का विमोचन भी किया गया।
किताब के विमोचन के पश्चात रणधीर कुमार ने चर्चा करते हुए, झारखंड में हो रहे मानव तस्करी पर प्रकाश डाला । श्री कुमार ने कहा कि जहाँ शिक्षा व रोजगार नहीं है वहीं मानव तस्करी की घटनाएँ अधिक हो रही हैं। मानव तस्करी से निपटने हेतु आदिवासी इलाकों में शिक्षा एवं रोजगार की अत्यंत आवश्यकता है । इसके आभाव में हम ऐसे जगन्य अपराध का सफाया नहीं कर सकते। कार्यक्रम सत्र में भारतीय सर्वोच्च न्यायालय की वरीष्ठ अधिवक्ता ऋचा पांडेय , उत्कर्ष मेल के संपादक श्री मनमोहन शर्मा ने भी अपने विचार रखे ।
कार्यक्रम में राष्ट्रीय महिला आयोग की राष्ट्रीय सलाहकार सह सीनियर फेलो, जेएनयू, डाॅ० मन्दिरा दत्ता, भारतीय सर्वोच्च न्यायालय के वरीष्ठ अधिवक्ता मोहित गुप्ता, इंडीपेंडेंट कॉलमनिस्ट सह शोधकर्ता अभिजीत कुमार एवं लेखक अभिनव शंकर उपस्थित रहे ।