झारखंड विधानसभा चुनाव 2019 का हंगामेदार चुनाव अभियान थमा, ये चीजें होंगी निर्णायक
रांची : झारखंड विधानसभा चुनाव 2019 का हंगामेदार प्रचार अभियान शाम पांच बजे थम गया. झारखंड के चुनाव अभियान में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, भाजपा अध्यक्ष व गृहमंत्री अमित शाह, रक्षामंत्री राजनाथ सिंह, उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ एवं झारखंड के मुख्यमंत्री रघुवर दास सत्तापक्ष के अहम प्रचारक रहे, जबकि झामुमो-कांग्रेस-राजद के विपक्षी खेमे के अहम प्रचारक कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी, झामुमो के कार्यकारी अध्यक्ष हेमंत सोरेन, राजद नेता तेजस्वी यादव रहे. आखिरी दौर में महागठबंधन के लिए प्रियंका गांधी ने भी पाकुड़ में आज चुनाव प्रचार किया.


पिछड़ा आरक्षण का मुद्दा झारखंड चुनाव के लिए निर्णायक होने जा रहा है. झामुमो के कार्यकारी अध्यक्ष हेमंत सोरेन ने अपने घोषणा पत्र में इनके आरक्षण का वादा किया, वहीं लोहरदगा की रैली में भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने भी दोबारा सत्ता में आने पर फिर एसटी-एससी आरक्षण पर असर डाले पिछड़ा आरक्षण देने का एलान किया. हमने अपने चुनावी दौरे में पाया कि यह एक अहम मुद्दा है युवाओं के लिए. बेरोजगार युवा इस पर हर पार्टी और नेता के वक्तव्य पर बारीक नजर बनाये हुए हैं.
सीएनटी-एसपीटी एक्ट
सीएनटी-एसपीटी एक्ट पर भाजपा एवं झामुमो का स्टैंड चुनाव में असर दिखाएगा. यह इन पार्टियों को मिलने वाली सीटों से भी पता चलेगा. झामुमो व कांग्रेस इस एक्ट को मजबूती से लागू रखने की पक्षधर है तो भाजपा इसमें बदलाव चाहती है.
भाजपा का पीएम मोदी पर दावं
भाजपा ने इस पूरे चुनाव प्रचार को पीएम नरेंद्र मोदी का भव्य व्यक्तित्व पेश कर लड़ा. भाजपा के पोस्टरों व होर्डिंग में मुद्दे से ज्यादा मोदी की तसवीरें दिखीं और भाजपा ने यह अहसास कराया कि जब मोदी हैं तो कहीं और क्यों जाना. भाजपा के कई नेता विधायक से भूल-चूक होने की स्थिति में नरेंद्र मोदी के लिए वोट मांगते दिखे. वहीं, झामुमो, आजसू ने जमीनी मुद्दों को चुनाव में जोरदार ढंग से उठाया. उनके पोस्टर व होर्डिंग पर मुद्दे अधिक दिखे. सीएनटी-एसपीटी एक्ट, स्थानीय नीति भी इस चुनाव में अहम मुद्दे रहे हैं और वे चुनाव को प्रभावित करने वाले तत्व हैं.
राष्ट्रीय मुद्द व शाह का गृहमंत्री के रूप में कामकाज
भाजपा ने राष्ट्रीय मुद्दों धारा 370, राम मंदिर, एनआरसी, नागरिकता कानून और मजबूत प्रधानमंत्री के साथ मजबूत गृहमंत्री का व्यक्तित्व पेश करने की कोशिश की, लेकिन झामुमो, आजसू एवं झाविमो ने जमीनी मुद्दों को फोकस किया और बार-बार भाजपा को राष्ट्रीय मुद्दों से खींच कर इन मुद्दों पर ले आये. इस चुनाव में महिला की सुरक्षा भी एक मुद्दा के रूप में दिखा. यह पहला चुनाव है जिसमें भाजपा को अमित शाह को गृहमंत्री के रूप में निर्णय लेने वाले शख्स के रूप में पेश करने का मौका मिला.
सरयू का टिकट कटना
चुनाव में एक अहम मोड़ सरयू राय का टिकट कटना भी बना. सरयू राय ने मुख्यमंत्री रघुवर दास के खिलाफ ही जमशेदपुर पूर्वी से ताल ठोक दी और मजबूत उम्मीदवार के रूप में सामने आये. सरयू ने रघुवर दास को इस तरह एक चुनावी मुद्दा बना दिया. सरयू का टिकट कटने से विपक्ष को एक प्रकार का संबल मिला और झामुमो ने कांग्रेस को नजरअंदाज कर उन्हें समर्थन दिया. इसी वजह से आखिरी चरण में हेमंत सोरेन के प्रचार के लिए सरयू राय दुमका पहुंचे. चुनाव प्रचार के आखिरी घंटों में प्रियंका गांधी पाकुड़ पहुंची और अब यह देखना होगा कि इस चुनाव में किसका जादू चला और ताज किसे मिलता है.


