Ramgarh News : फैक्ट्री की पोल खुली, जहरीले धुएँ और केमिकल पानी से बीमार हो रहे लोग
जांच टीम के सामने ग्रामीणों ने एक-एक कर दिखाए आरोपों के सबूत
गोला में फैक्ट्री के खिलाफ जांच में प्रदूषण और जमीन कब्जे की सच्चाई सामने आई, जिससे ग्रामीणों में आक्रोश है।
रामगढ़ : गोला प्रखंड अंतर्गत बनतारा मौजा स्थित वनांचल कॉनकास्ट प्रा० लि० के खिलाफ ग्रामीणों का गुस्सा अब खुलकर सामने आ गया है। जहरीले धुएँ, केमिकल युक्त पानी और जमीन कब्जे के गंभीर आरोपों के बीच प्रशासनिक जांच में कई चौंकाने वाले तथ्य उजागर हुए हैं। अनुमंडल पदाधिकारी के निर्देश पर गठित जांच टीम में अनुमंडल कार्यालय से प्रशासी पदाधिकारी संजय कुमार बक्शी, अंचलाधिकारी सीताराम महतो, अंचल निरीक्षक मनोज कुमार मुख्य रूप से शामिल थे। वहीं मौके पर कांग्रेस नेता अमित कुमार सहित कई रैयत भूमिधारी भी उपस्थित होकर अपनी समस्याएं सामने रखीं।
“आवेदन की सच्चाई मौके पर आई सामने”

“दिवाकर करमाली की पीड़ा—भूमि कब्जा, मुआवजा तक नहीं”
ग्रामीण दिवाकर करमाली ने भावुक होकर बताया कि फैक्ट्री परिसर में उनकी जमीन पर भी कब्जा कर लिया गया है, लेकिन आज तक कोई मुआवजा नहीं दिया गया। वे बार-बार अधिकारियों के सामने गुहार लगाते रहे, परंतु अब तक कोई सुनवाई नहीं हुई। उन्होंने कहा कि “गोमती नदी ही यहां के लोगों के जीवन का एकमात्र सहारा है। अगर इसमें जहर घोला जाएगा, तो पूरा इलाका बीमारी की चपेट में आ जाएगा।”
“प्रदूषण, धूल और शोर से बिगड़ रहा जनजीवन”
जांच में यह भी सामने आया कि फैक्ट्री की चिमनी से निकलने वाला धुआँ और धूल-कण आसपास के गांवों सोसो कलां—कुमारदगा, हेमतपुर, तिरला, बनतारा, डभातु, धमनाटाड, जमुना और गोला—के लोगों के स्वास्थ्य पर सीधा असर डाल रहा है। बुजुर्ग और बच्चों को सांस लेने में दिक्कत हो रही है, वहीं मशीनों की तेज आवाज से दिन-रात शांति भंग हो रही है। किसानों की फसलें बर्बाद हो रही हैं और जमीन बंजर होती जा रही है।
“नियमों की अनदेखी, पर्यावरण मानकों की खुली धज्जियां”
2019 में स्थापित इस फैक्ट्री द्वारा आज तक पर्याप्त वृक्षारोपण नहीं किया गया। धूल और कचरे को खुले में फेंका जा रहा है। अधिकारियों ने सख्त निर्देश दिया कि फैक्ट्री प्रबंधन तुरंत शोधन संयंत्र लगाए, धूल को नियंत्रित करे और सभी कार्य पर्यावरण मानकों के अनुरूप करे।
“नदी और तालाब तक पर कब्जे का आरोप”
ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि फैक्ट्री द्वारा नदी की जमीन और एक पुराने तालाब को भी बाउंड्री वॉल के माध्यम से कब्जाने का प्रयास किया जा रहा है।
इस पर लोगों ने प्रशासन से सवाल किया कि आखिर इतनी बड़ी अनियमितताओं पर अब तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई।
“प्रबंधन की चुप्पी ने बढ़ाए सवाल”
जांच के दौरान फैक्ट्री प्रबंधन से जब सवाल पूछे गए तो वे संतोषजनक जवाब देने में पूरी तरह असफल रहे। उनकी चुप्पी और टालमटोल से यह साफ संकेत मिला कि कई गंभीर अनियमितताएं बरती जा रही हैं। समापन: “अब कार्रवाई या आंदोलन? ग्रामीणों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि जल्द ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तो वे आंदोलन के लिए मजबूर होंगे।
अब देखना यह है कि प्रशासन इस गंभीर जनहित के मुद्दे पर कितनी सख्ती और तत्परता से कदम उठाता है।
