Dumka News : आस्था और परंपरा के साथ मनाया गया तीन दिवसीय बाहा पर्व
अंतिम दिन ग्रामीणों ने एक-दूसरे पर पानी डालकर मनाई पर्व की खुशियां
दुमका के गरडी गांव में तीन दिवसीय पारंपरिक आदिवासी बाहा पर्व आस्था, पूजा-अर्चना और पारंपरिक नृत्य-गान के साथ धूमधाम से सम्पन्न हुआ।
दुमका : दुमका प्रखंड के गरडी गांव में पारंपरिक आदिवासी पर्व बाहा तीन दिनों तक आस्था, परंपरा और उत्साह के साथ मनाया गया। मंगलवार को सम्पन्न हुए इस पर्व में ग्रामीणों की भारी भीड़ उमड़ी और पूरे गांव में भक्ति व उल्लास का माहौल बना रहा। बाहा पर्व के पहले दिन को जाहेर दाप माह, दूसरे दिन को बोंगा माह और तीसरे एवं अंतिम दिन को शरदी माह के रूप में मनाया जाता है।

इसके बाद सिंदूर और काजल अर्पित कर मातकोम (महुआ) तथा सारजोम (सखुआ) के फूल चढ़ाए गए और जाहेर ऐरा, मारांग बुरु, मोड़ेकू-तुरुयकू, धोरोम गोसाई सहित इष्ट देवी-देवताओं के नाम पर विधिवत बलि दी गई। पूजा के दौरान “जोहार गोसाई मारांग बुरु, जोहार गोसाई जाहेर ऐरा और सगुन बाहा पोरोब” के जयघोष से पूरा जाहेर थान गुंजायमान हो उठा।पूजा-अर्चना के बाद तुन्दाह और टमाक की थाप पर पारंपरिक बाहा नृत्य और गीत प्रस्तुत किए गए।
नृत्य के उपरांत श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया और नायकी को पुनः नृत्य-गान के साथ गांव वापस लाया गया। गांव पहुंचने पर नायकी ने प्रत्येक घर में जाकर सारजोम (सखुआ) का फूल वितरित किया। श्रद्धालुओं ने उनके सम्मान में चरण धोए और फूल ग्रहण कर एक-दूसरे पर सादा पानी डालकर पर्व की खुशियां साझा कीं। पुरुषों ने फूल को कान में और महिलाओं ने अपने जूड़े में धारण किया।
पर्व के तीसरे और अंतिम दिन शरदी माह के अवसर पर ग्रामीणों ने सुबह से ही एक-दूसरे पर पानी डालकर बाहा पर्व का आनंद लिया और एक-दूसरे के घर जाकर सामूहिक भोजन किया। इस अवसर पर मांझी बाबा मंत्री मुर्मू, नायकी बाबा सनातन किस्कू, गुडित बाबा गायना मुर्मू, पराणिक बाबा गायना मुर्मू, जोग मांझी बाबा देवीधन मुर्मू, स्टेफन मुर्मू, मीनू टुडू, मानेसोल मरांडी, शिवलाल मुर्मू, खैतिश सोरेन, फ्रांसिस किस्कू, संजीव मुर्मू, सुमन किशोर टुडू सहित बड़ी संख्या में महिला-पुरुष श्रद्धालु उपस्थित थे।
