Hazaribagh News: विभावि के राजनीतिक विज्ञान विभाग में जल संवेदीकरण कार्यशाला का हुआ आयोजन
कार्यशाला में 'जल जीवन मिशन' और 'नीलांबर पीतांबर जल समृद्धि योजना' पर हुई चर्चा
विनोबा भावे विश्वविद्यालय के राजनीति विज्ञान विभाग में मंगलवार को 'विश्व जल दिवस पखवाड़ा' के तहत 'जल संवेगीकरण कार्यशाला' आयोजित की गई। कार्यशाला में वर्ष 2026 की थीम "जल और लैंगिक समानता" पर विशेष जोर दिया गया। वक्ताओं ने बताया कि जल संकट का 80% प्रभाव महिलाओं पर पड़ता है, इसलिए जल प्रबंधन में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण है। विशेषज्ञों ने बढ़ते जल संकट को 'जल कंगाली' करार देते हुए 'जल बजट' अपनाने और सरकारी जल नीतियों को प्रभावी बनाने की अपील की। कार्यक्रम का समापन सामूहिक 'जल शपथ' के साथ हुआ।
हजारीबाग: विनोबा भावे विश्वविद्यालय के राजनीति विज्ञान विभाग में मंगलवार को विश्व जल दिवस पखवाड़ा के अंतर्गत 'जल संवेगीकारण कार्यशाला' (water sensitization workshop) का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए विभागाध्यक्ष डॉ सुकल्याण मोइत्रा ने कार्यशाला के आयोजन के उद्देश्य को बताया। उन्होंने आह्वान किया की आज से ही संकल्प ले की जल का दुरुपयोग नहीं करेंगे। उन्होंने' वाटरमैन ऑफ़ इंडिया' अर्थात राजेंद्र सिंह की उपलब्धियां को भी बताया।विषय प्रवेश करते हुए प्राध्यापक डॉ अजय बहादुर सिंह ने बताया कि विश्व जल दिवस की शुरूआत संयुक्त राष्ट्र के द्वारा 1993 से किया गया जिसका मुख्य उद्देश्य मीठा या ताजा जल को संरक्षित करना है। उन्होंने विश्व जल दिवस 2026 के थीम "जल और लैंगिक समानता" (theme of 2026 world Water Day: Water & Gender Equality) एवं नारा "जहां पानी बहता है, वहां समानता पनपती है" पर प्रकाश डाला।
मुख्य वक्ता विकास कुमार यादव ने बताया कि यूनेस्को के डेटा के अनुसार दुनिया भर में पानी व्यवस्थित करने की जिम्मेदारी लगभग 80% महिलाओं और बच्चियों पर है। अर्थात जल संकट का सीधा प्रभाव महिलाओं पर पड़ता है। बताया कैसे जल शक्ति ही नारी शक्ति है। इसीलिए इस वर्ष के थीम में जल को जेंडर से जोड़कर संवेदीकरण का प्रयास किया गया है। उन्होंने भारत सरकार का जल शक्ति मंत्रालय की चर्चा करते हुए जल संबंधी नीतियां, जैसे 'जल जीवन मिशन' के संबंध में जानकारी दी। झारखंड सरकार की नीतियों की चर्चा करते हुए 'जल सहिया योजना' तथा 'नीलांबर पीतांबर जल समृद्धि योजना' की भी जानकारी दी।

कार्यक्रम के अंत में रवि कुमार विश्वकर्मा ने सभी को राष्ट्रीय जल मिशन द्वारा निर्धारित 'जल शपथ' का पाठ कराया।कार्यशाला में विद्यार्थी प्रीति कुमारी और पिंटू रजक ने अपने विचार प्रस्तुत किए। इस अवसर पर विभाग के शोधार्थी एवं विद्यार्थी अच्छी संख्या में उपस्थित हुए।
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