ग्रेनाइट जैवविविधता पर कुलेश भंडारी का शोध अंतरराष्ट्रीय मंच पर चयनित
माइक्रोहैबिटैट और प्रजातीय विविधता का किया गया अध्ययन
झारखंड के संथाल परगना क्षेत्र से युवा जैवविविधता शोधकर्ता कुलेश भंडारी ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बड़ी उपलब्धि हासिल की है। उनका शोध उष्णकटिबंधीय ग्रेनाइट आउटक्रॉप्स और माइक्रोहैबिटैट पर आधारित है, जिसे Association for Tropical Biology and Conservation Annual Meeting 2026 में मौखिक प्रस्तुति के लिए चुना गया है।
दुमका: झारखंड के संथाल परगना के पहाड़ी और वनांचल क्षेत्र से एक युवा जैवविविधता शोधकर्ता, कुलेश भंडारी, ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। उनका शोध कार्य उष्णकटिबंधीय ग्रेनाइट आउटक्रॉप्स (शैल-उद्भेदन) पर केंद्रित है, जिसमें चट्टानी पहाड़ियों पर पाए जाने वाले सूक्ष्म आवास (माइक्रोहैबिटैट) और जैवविविधता का वैज्ञानिक अध्ययन किया गया है।
इस शोध को Association for Tropical Biology and Conservation Annual Meeting 2026 के लिए मौखिक प्रस्तुति (ओरल प्रेजेंटेशन) के रूप में चयनित किया गया है, जो इस वर्ष Xishuangbanna, चीन में आयोजित होगा। उल्लेखनीय है कि इस शोध के सार (एब्स्ट्रैक्ट) को अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक समिति द्वारा बिना किसी संशोधन के सीधे स्वीकृति प्रदान की गई है, जो इसके उच्च वैज्ञानिक स्तर और स्पष्टता को दर्शाता है।

कुलेश भंडारी वर्तमान में झारखंड के आदिवासी पहाड़ी क्षेत्रों में जैवविविधता, पारंपरिक पारिस्थितिक ज्ञान और स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र के संरक्षण पर कार्य कर रहे हैं। उनका यह शोध न केवल स्थानीय स्तर पर, बल्कि वैश्विक उष्णकटिबंधीय पारिस्थितिकी के क्षेत्र में भी एक नया दृष्टिकोण प्रस्तुत करता है।
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