नागरिकता संशोधन बिल राज्यसभा में भी पास, पाकिस्तान से आए शरणार्थियों में खुशी की लहर

नागरिकता संशोधन बिल राज्यसभा में भी पास, पाकिस्तान से आए शरणार्थियों में खुशी की लहर

नागरिकता संशोधन विधेयक को बुधवार रात्रि राज्यसभा से भी मंजूरी मिल गयी. इस तरह अब अधिसूचना जारी कर इस विधेयक को कानून की शक्ल दिया जाएगा, जिससे तीन देशों पाकिस्तान, बांग्लादेश एवं अफगानिस्तान के अल्पसंख्यकों को भारत में शरण एवं नागरिकता दिए जाएगा. राज्यसभा में यह विधेयक 105 के मुकाबले 125 वोटों से पारित हुआ, यानी इसके पक्ष में 125 एवं विपक्ष में 105 वोट डाले गए.

गृहमंत्री अमित शाह ने नागरिकता संशोधन बिल पर चर्चा के उपरांत इस पर उठाये गये सवालों का जवाब देते हुए कहा कि लियाकत-नेहरू समझौते के बाद अफगानिस्तान, पाकिस्तान और बांग्लादेश के संविधान में यह स्वीकारा गया कि इन तीनों देशों का धर्म इस्लाम होगा. ये तीनों देश हमारी भौगोलिक सीमाओं से सटे हैं और इस्लामिक देश हैं. उन्होंने कहा कि ये इस्लामिक देश हैं इसलिए इस्लाम मानने वालों पर धार्मिक प्रताड़ना की संभावना नणग्य हो जाती है. हम इन तीनों देशों में धार्मिक प्रताड़ना के शिकार लोगों को नागरिकता देने के लिए ये बिल लाये हैं. उन्होंने कहा कि चाहे हम सत्ता में हैं या नहीं शुरू से कहते हैं कि नागरिकता संशोधन बिल लाना चाहिए. उन्होंने कहा कि हम इन तीनों देशों के धार्मिक प्रताड़ना के शिकार लोगों को ले रहे हैं. उन्होंने कहा कि कपिल सिब्बल कहते हैं कि हमसे मुसलमान नहीं डरता है, मैं तो नहीं चाहता कि वे डरें. उन्होंने कहा कि मैं कभी नहीं कहता कि डरो या डरना चाहिए. उन्होंने कांग्रेस को अजीब पार्टी बताया, जो जब सत्ता में होती है तो उसकी अलग-अलग भूमिका में अलग-अलग सिद्धांत होते हैं.

केंद्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा कि हमारी सरकार सदन में कोई विधेयक तभी लाती है जब कानून एवं विधायी विभाग द्वारा उसे मंजूरी दी जाती है.

 

राजनीतिक दलों ने राज्यसभा में नागरिकता संशोधन विधेयक में 43 संशोधन सुझाए हैं.

आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह ने बिल का विरोध किया. उन्होंने कहा कि यह बिल बाला साहेब आंबेडकर द्वारा बनाये गए संविधान के खिलाफ है. यह संविधान की संकल्पना के विरुद्ध है. उन्होंने कहा कि कि महात्मा गांधी एवं भगत सिंह के सपनों के भारत के खिलाफ है.

 

बसपा के सतीश चंद्र मिश्रा ने विधेयक का विरोध किया. उन्होंने कहा कि हमारी पार्टी इसका विरोध करती है. उन्होंने सवाल किया कि आप मुसलिमों को इस बिल में छोड़ कर आर्टिकल 14 का उल्लंघन क्यों कर रहे हैं. मुसलिमों को बाहर रखा जाना इस पूरी कवायद की एकमात्र समस्या है.


शिवसेना के संजय राउत ने चर्चा में भाग लेते हुए कहा कि मजबूत पीएम और गृहमंत्री से हमारी आशा है कि क्या इस बिल के पास होने के बाद आप घुसपैठियों को बाहर निकालेंगे. अगर शरणार्थियों को स्वीकार करते हैं तो उस पर राजनीति नहीं होनी चाहिए. क्या उनको वोटिंग राइट मिलेगा. संजय राउत ने कहा कि कल से मैं सुन रहा हूं कि जो इस इस बिल का समर्थन नहीं कर रहे हैं वे राष्ट्रविरोधी हैं और जो जिन्होंने इसका सपोर्ट किया है वे राष्ट्रवादी हैं.


राउत ने कहा कि हमें देशभक्ति और हिंदुत्व के किसी सर्टिफिकेट की जरूरत नहीं है. जिस स्कूल में आप पढे हैं हम उस स्कूल के मास्टर हैं. हमारे स्कूल के हेदमास्टर बाला साहेब ठाकरे थे, अटल जी, श्यामा प्रसाद मुखर्जी भी थे, हम सबको मानते हैं.


तृणमूल कांग्रेस सांसद डेरेक ओब्रायन ने नागरिकता संशोधन विधेयक को संविधान की मूल भावना के खिलाफ बताया. उन्होंने कहा कि वे अपनी पार्टी की ओर से बिल के खिलाफ हैं. उन्होंने बिल को बंगाली लोगों के साथ भेदभाव वाला बताया. डेरेक ने सरकार पर आरोप लगाया कि अल्पसंख्यकों को प्रताड़ित करने के लिए यह बिल लाया गया है. डेरेक ने कहा कि कल प्रधानमंत्री मोदी ने कहा था कि यह बिल स्वर्ण अक्षरों में दर्ज होगा, कहां पाकिस्तान के राष्ट्रपति की कब्र पर.

 

भाजपा सदस्य जेपी नड्डा ने कहा कि धर्म के आधार पर देश का विभाजन हुआ लेकिन पैक्ट सिर्फ कागजों में रह गया, सच्चाई में नहीं रह पाया. उन्होंने कहा कि देश के अंदर जो लोग लंबे समय से अन्याय के वातावरण में जी रहे हैं, उनको सम्मान के साथ जीने का एक रास्ता देने का प्रयास नागरिकता संशोधन बिल के द्वारा किया गया है. उन्होंने कहा कि नागरिकता संशोधन बिल को लेकर आज जो हम बात कर रहे हैं उसका आधार सिर्फ एक है और वो है पाकिस्तान और बांग्लादेश में वो अल्पसंख्यक जो धार्मिक उत्पीड़न के शिकार हुए हैं, उनको नागरिकता का अधिकार देना.

 

नयी दिल्ली : गृहमंत्री अमित शाह ने आज नागरिकता संशोधन बिल राज्यसभा में पेश करते हुए कहा कि इस अहम बिल पर देश में दुष्प्रचार किया जा रहा है कि यह बिल मुसलिमों के खिलाफ है. उन्होंने सवाल किया कि ऐसा कहने वालों से मेरा सवाल है कि आखिर यह बिल भारत के मुसलिमों से कैसे संबंधित है. उन्होंने आश्वस्त किया कि यह भारतीय मुसलिम भारत के नागरिक हैं और हमेशा रहेंगे, उनके साथ कोई भेदभाव नहीं होगा.

अमित शाह ने कहा कि पाकिस्तान एवं बांग्लादेश में धार्मिक अल्पसंख्यकों की संख्या में करीब 20 प्रतिशत की गिरावट आयी है. उन्होंने कहा कि या तो उनकी हत्या की गयी या फिर वे आश्रय के लिए पलायन कर गए. अमित शाह ने कहा कि विपक्ष के सदस्यों को उनकी चुनौती है कि जब उनका समय आए तो हर सवाल पूछे और वे उनका जवाब देंगे.

मालूम हो कि पाकिस्तान, बांग्लादेश, अफगानिस्तान के अल्पसंख्यकों को भारत में आश्रय देने एवं यहां की नागरिकता देने वाला नागरिकता संशोधन विधेयक सोमवार को लोकसभा में पारित हुआ था. आज उसे राज्यसभा में पारित कराने के लिए चर्चा हेतु पेश किया जाएगा. चर्चा के उपरांत वोटिंग होगी.

अमित शाह ने कहा कि मुसलिमों को डरने की जरूरत नहीं है. अगर उन्हें कोई डराने की कोशिश करे तो वे न डरें. यह नरेंद्र मोदी की सरकार है जो संविधान के अनुसार काम करती है. अल्पसंख्यकों को पूरा संरक्षण है.

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Edited By: Samridh Jharkhand

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