राष्ट्रभक्ति केवल भावना नहीं, जीवन व्यवहार भी है : केएन गोविन्दाचार्य
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केएन गोविन्दाचार्य
सन 1983 से संघ परिवार में हममें से कइयों के अभिभावक यशवंत राव केलकर ने बताया था कि संघ, संघ परिवार के बाद संघ महापरिवार तक की दूरी तय करना है. ऐसे सभी लोग या समूह जो समाज के अंतिम हिस्से के हक़ और हित के लिए रचनात्मक हैं या आंदोलनात्मक तरीकों से काम कर रहे हैं और शांतिपूर्ण कार्यपद्धति पर आग्रह रखते हैं, वे संघ महापरिवार के अंग माने जाने चाहिए. उनसे आदरपूर्वक संवाद स्थापित करने की जरूरत है.


पहली श्रेणी को वे स्वयंसेवक हैं, संघ के नहीं, ऐसा कहते थे. दूसरी श्रेणी को वे कहते थे स्वयंसेवक है संघ के भी हैं. तीसरी श्रेणी को वे स्वयसेवक नहीं, संघ के हैं, ऐसा श्रेणीकरण करते थे.
उनका निर्देश रहता था कि पहली और दूसरी श्रेणी पर ध्यान दो, तीसरी के प्रति उत्साह न दिखाओ.
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Edited By: Samridh Jharkhand


