झारखंड में मानवाधिकार और महिला आयोग के गठन की मांग तेज, राज्यपाल से हस्तक्षेप की अपील
राज्यपाल के संज्ञान लेने से राज्य में थम सकता है मानवाधिकार उल्लंघन का सिलसिला
झारखंड में पिछले 8 वर्षों से मानवाधिकार आयोग और 2023 से राज्य महिला आयोग के भंग होने पर इंटरनेशनल ह्यूमन राइट्स एसोसिएशन ने गहरी चिंता जताई है। राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार को लिखे पत्र में संस्था ने बताया कि आयोग न होने से राज्य में करीब 6300 से अधिक मामले लंबित हैं, जिससे पीड़ितों को न्याय नहीं मिल पा रहा है। एसोसिएशन ने जनहित में इन आयोगों के शीघ्र पुनर्गठन और अनुभवी कार्यकर्ताओं को सदस्य मनोनीत करने की पुरजोर मांग की है।
रांची: झारखंड में लंबे समय से मानवाधिकार आयोग और राज्य महिला आयोग के गठन नहीं होने को लेकर अब आवाज तेज हो गई है। इस संबंध में इंटरनेशनल ह्यूमन राइट्स एसोसिएशन, झारखंड स्टेट की ओर से राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार को पत्र लिखकर जल्द हस्तक्षेप करने की मांग की गई है। पत्र में कहा गया है कि झारखंड एक पिछड़ा और उग्रवाद प्रभावित राज्य है, जहां आम जनता के साथ- साथ महिलाओं के अधिकारों का भी लगातार हनन हो रहा है। पुलिस प्रशासन, दबंगों, भू-माफियाओं और अन्य प्रभावशाली लोगों द्वारा सामाजिक, आर्थिक और शैक्षणिक अधिकारों के उल्लंघन के मामले सामने आ रहे हैं। आर्थिक तंगी के कारण पीड़ित लोग न्यायालय तक नहीं पहुंच पाते, जिससे उन्हें न्याय नहीं मिल पाता।

इंटरनेशनल ह्यूमन राइट्स एसोसिएशन ने राज्यपाल से आग्रह किया है कि जनहित में झारखंड राज्य मानवाधिकार आयोग एवं राज्य महिला आयोग का शीघ्र गठन सुनिश्चित कराने हेतु राज्य सरकार को निर्देशित करें। साथ ही, यह भी मांग की गई है कि मानवाधिकार के क्षेत्र में सक्रिय और अनुभवी कम से कम दो कार्यकर्ताओं को आयोग में सदस्य के रूप में मनोनीत किया जाए, ताकि पीड़ितों को प्रभावी न्याय मिल सके।
संस्था ने विश्वास जताया है कि राज्यपाल इस गंभीर मुद्दे पर संज्ञान लेते हुए आवश्यक कार्रवाई करेंगे, जिससे राज्य में न्याय व्यवस्था को मजबूती मिल सके। मौके पर नेशनल हेड हिमांशु डेविड राज, स्टेट हेड तपन कुमार घोष एवं रांची जिला अध्यक्ष शंकर शंभू राजेश मौजूद थे।
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