टाटा स्टील फाउंडेशन ने पंजाब में कौशल विकास तंत्र को किया मजबूत
1500 से अधिक छात्रों को मिला लाभ
टाटा स्टील फाउंडेशन ने लुधियाना के आईटीआई संस्थानों में इलेक्ट्रिकल लैब स्थापित कर कौशल विकास को बढ़ावा दिया है। इस पहल से 1500 से अधिक छात्रों को तकनीकी और रोजगारोन्मुख प्रशिक्षण मिल रहा है, जिससे वे उद्योग की जरूरतों के अनुरूप तैयार हो रहे हैं।
जमशेदपुर : टाटा स्टील फाउंडेशन ने पंजाब के तकनीकी शिक्षा एवं औद्योगिक प्रशिक्षण विभाग के सहयोग से राज्य के युवाओं के लिए उद्योग-उन्मुख विद्युत प्रशिक्षण को मजबूत बनाने हेतु एक विशेष कौशल विकास पहल शुरू की है।

इस पहल के एक महत्वपूर्ण पड़ाव के रूप में, आईटीआई गिल रोड में स्थापित इलेक्ट्रिकल लैब का उद्घाटन विशिष्ट अतिथियों की उपस्थिति में किया गया। कार्यक्रम में बलजिंदर सिंह, प्राचार्य एवं उपनिदेशक, सरकारी आईटीआई गिल रोड, लुधियाना; चरणजीत सिंह विश्वकर्मा, अध्यक्ष आईएमसी, सरकारी आईटीआई गिल रोड, लुधियाना; तथा बलजिंदर सिंह, उप प्राचार्य, सरकारी आईटीआई गिल रोड, लुधियाना उपस्थित रहे।इस अवसर पर समुदाय के प्रतिनिधियों की भी सक्रिय भागीदारी रही, जिनमें मलकीत सिंह, सरपंच, कडियाना खुर्द; अजीत सिंह, सरपंच, खासी खुर्द; जुगराज सिंह, सरपंच, कडियाना कलान; अवतार सिंह, पंचायत सदस्य, भुखरी खुर्द; और मलकीत सिंह, सरपंच, भुखरी कलान शामिल थे। कार्यक्रम में टाटा स्टील और टाटा स्टील फाउंडेशन की ओर से डेविड विलियम ऑगस्टीन, चीफ, लुधियाना प्रोजेक्ट, टाटा स्टील लिमिटेड; सौरव रॉय, चीफ एक्जीक्यूटिव ऑफिसर, टाटा स्टील फाउंडेशन; तथा कैप्टन अमिताभ, हेड, स्किल डेवलपमेंट, टाटा स्टील फाउंडेशन उपस्थित रहे। इसके अलावा, अन्य संकाय सदस्यों, विद्यार्थियों और टाटा स्टील फाउंडेशन की टीम के सदस्यों ने भी कार्यक्रम में भाग लिया।
यह पहल एक समग्र दृष्टिकोण अपनाती है, जिसमें तकनीकी प्रशिक्षण के साथ-साथ रोजगारोन्मुख कौशलों का समावेश किया गया है। इसके अंतर्गत इलेक्ट्रिकल लैब के बुनियादी अवसंरचना को सुदृढ़ करना, व्यावहारिक और अनुभवात्मक सीख को बढ़ावा देना, तथा ट्रेनिंग ऑफ ट्रेनर्स के माध्यम से संस्थागत क्षमता का निर्माण शामिल है। तकनीकी पाठ्यक्रम में हाउस वायरिंग और ट्रबलशूटिंग, पाइप एवं बैटन वायरिंग के साथ ड्रिलिंग अभ्यास, सोलर वाटर पंपिंग सिस्टम, मोटर स्टार्टर और कंट्रोलर संचालन, तथा ऊर्जा भंडारण अनुप्रयोगों के साथ हाइब्रिड सोलर सिस्टम जैसे विषयों को शामिल किया गया है। इस पहल के माध्यम से अब तक कुल 64 शिक्षार्थियों को लाभ मिला है, जिनमें 44 आईटीआई गिल रोड और 20 आईटीआई समराला के छात्र शामिल हैं। इससे उनके व्यावहारिक कौशल में सुधार हुआ है और वे उद्योग की आवश्यकताओं के अनुरूप अधिक सक्षम बन रहे हैं।
इसी के साथ, लुधियाना में रोजगारोन्मुख कौशल कार्यक्रम के तहत दोनों आईटीआई में कुल 1,580 शिक्षार्थियों तक पहुंच बनाई गई है, जिनमें गिल रोड में 964 और समराला में 616 शिक्षार्थी शामिल हैं। यह कार्यक्रम संचार कौशल, बुनियादी अंग्रेजी, डिजिटल साक्षरता, करियर तैयारी, संवैधानिक मूल्यों और भविष्य के कौशल जैसे मॉड्यूल के माध्यम से कार्यस्थल से जुड़ी आवश्यक क्षमताओं के विकास पर केंद्रित है। इन प्रयासों को पंजाब सरकार की पहलों जैसे ‘युद्ध नश्यान विरुद्ध’, ‘पंजाब स्टार्टअप ऐप’ और ‘वाधवानी स्किलिंग’ के सहयोग से और मजबूत किया गया है। साथ ही, औद्योगिक भ्रमण के माध्यम से शिक्षार्थियों को वास्तविक कार्य वातावरण का अनुभव और फीडबैक आधारित सीखने का अवसर भी प्रदान किया जा रहा है।
इस अवसर पर टाटा स्टील फाउंडेशन के चीफ एक्जीक्यूटिव ऑफिसर, सौरव रॉय ने कहा, “हम पंजाब के तकनीकी शिक्षा एवं औद्योगिक प्रशिक्षण विभाग के प्रति उनके सहयोग और राज्य में कौशल विकास तंत्र को सशक्त बनाने के साझा विज़न के लिए आभारी हैं। टाटा स्टील फाउंडेशन वर्तमान में झारखंड में तीन और ओडिशा में एक आईटीआई का संचालन कर रहा है, और इस साझेदारी के माध्यम से हम लुधियाना के दो सरकारी आईटीआई में श्नाइडर इलेक्ट्रिक समर्थित इलेक्ट्रिकल लैब स्थापित करने के साथ-साथ सॉफ्ट स्किल्स के लिए समर्पित प्रशिक्षकों का सहयोग भी प्रदान कर रहे हैं। हम लुधियाना में रोजगारोन्मुख कौशल प्रशिक्षण भी प्रदान कर रहे हैं, जिससे यह सुनिश्चित हो सके कि तकनीकी शिक्षा के साथ-साथ कार्यस्थल से जुड़ी क्षमताओं का भी विकास हो। यह पहल युवाओं की तकनीकी क्षमता को सही दिशा देने और उसे और सशक्त बनाने के लिए सुदृढ़ प्रणालियाँ विकसित करने का हमारा प्रयास है, साथ ही ऐसे सशक्त संस्थानों का निर्माण भी, जो उन्हें प्रासंगिक कौशल और आत्मविश्वास से लैस कर सकें। हमें उम्मीद है कि इसके माध्यम से युवा क्षेत्र के विकास की दिशा में सार्थक योगदान दे सकेंगे।”
यह पहल टाटा स्टील फाउंडेशन के उस सतत प्रयास को रेखांकित करती है, जिसके माध्यम से शिक्षा के माध्यम से रोजगार के बीच की खाई को पाटा जा रहा है, साथ ही कुशल, आत्मविश्वासी और भविष्य के लिए तैयार युवा कार्यबल के निर्माण में योगदान दिया जा रहा है।
