जयंत 479548, बीडी राम 477606 व अन्नपूर्णा 455600 वोट से जीतकर सुपरस्टार बने
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स्टेट ब्यूरो: झारखंड की तीन सीटों हजारीबाग, पलामू व कोडरमा ने भाजपा प्रत्याशियों ने रिकार्ड मतों से चुनाव जीतकर एक नया इतिहास लिखा है। हजारीबाग ने भाजपा प्रत्याशी व पूर्व केंद्रीय मंत्री जयंत सिन्हा ने कांग्रेस प्रत्याशी गोपाल साहू को 4 लाख 79 हजार 548 मतों से, पलामू में विष्णु दयाल राम ने राजद के घूरन राम को 4 लाख 77 हजार 606 मतों से और कोडरमा में अन्नपूर्णा देवी ने बाबूलाल मरांडी को 4 लाख 55 हजार 600 मतों से पराजित कर दिया है। यह अब तक झारखंड में सर्वाधिक बड़ा जीत का अंतर है।
सबसे पहले चर्चा में हजारीबाग, जो कि लोकसभा चुनाव 2019 में झारखंड की हाई प्रोफाइल सीटों में से एक है। इस सीट से जयंत सिन्हा लगातार दूसरी बार संसद पहुंचे हैं। उन्होंने कांग्रेस के गोपाल प्रसाद साहू को करारी पटखनी दी है। पिता यशवंत सिन्हा के 2014 में सीट छोड़ने के बाद ये यहां से सांसद बनने के बाद मोदी सरकार में राज्य मंत्री भी बने। सियासत में आने से पहले जयंत सिन्हा 25 साल तक फंड मैनेजर के रूप में फिलाडेल्फिया और अमेरिका के बॉस्टन और दिल्ली में काम किया। सिन्हा ने डेली हंट, डी लाइट, आईमेरिट और जनग्राह सहित कई कंपनियों और संगठनों में बोर्ड के सदस्य के रूप में काम किया।
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उन्हें अंतर्राष्ट्रीय वित्त निगम, वाशिंगटन डीसी के अंतर्राष्ट्रीय सलाहकार बोर्ड में सेवा के लिए भी आमंत्रित किया गया था। जयंत सिन्हा का जन्म 21 अप्रैल 1963 को झारखंड के गिरिडीह में हुआ था। सियासत में आने से पहले उनके पिता यशवंत सिन्हा आईएएस अधिकारी थे। पिता के तबादले के कारण उन्हें बचपन में एक स्थान से दूसरे स्थान पर जाना पड़ा। उन्होंने स्कूली शिक्षा पटना के सेंट माइकल स्कूल व दिल्ली के सेंट कोलंबस स्कूल से पूरी की। पहली कोशिश में ही जेईई पास करने के बाद 1980 में आईआईटी दिल्ली में दाखिला लिया। आईआईटी दिल्ली से ग्रेजुएशन के बाद जयंत ने यूनिवर्सिटी ऑफ पेनसिल्वेनिया से अपना एमएस इनर्जी मैनेजमेंट एंड पॉलिसी पूरा किया। उन्होंने दुनिया के प्रतिष्ठित बिजनेस स्कूलों में से एक, हार्वर्ड बिजनेस स्कूल से 1992 में एमबीए की डिग्री हासिल की। आईआईटी के दिनों में ही उनकी मुलाकात पुनिता से हुई और दोनों 1986 में शादी के बंधन में बंध गये। दोनों की चार संतानें हैं।
दूसरी बड़ी जीत गुरुवार को पलामू से भाजपा प्रत्याशी बीडी राम ने दर्ज की व वे भी दूसरी बार संसद जायेंगे। श्री राम एक आईपीएस अधिकारी रहे हैं। देशभर में पुलिस विभाग के विभिन्न पदों को संभालनेवाले श्री राम झारखंड के डीजीपी पद से सेवानिवृत हुये। इसके बाद इन्होंने राजनीति में पर्दापण किया व भाजपा का दामन थामा। शुरुआत काफी बेहतर रही व पलामू से ये 2014 में संसद पंहुच गये। उनकी इतनी बड़ी जीत के पीछे मोदी लहर सर्वाधिक मायने रखता है।
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https://samridhjharkhand.com/influence-of-new-tribal-face-in-dumkaतीसरी और धमाकेदार जीत कोडरमा लोकसभा क्षेत्र से भाजपा प्रत्याशी अन्नपूर्णा देवी ने हासिल की है। उनके निकटतम प्रतिद्वंद्वी झाविमो सुप्रीमो सह सूबे के पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी को वोटरों ने पूरी तरह से नकार दिया है। इसके साथ ही लोकसभा क्षेत्र में एक बार फिर भगवा लहर चल पड़ा है। अन्नूपर्णा देवी 4 लाख 55 हजार 600 वोटों से चुनाव जीत गई हैं। पूरे कोडरमा संसदीय क्षेत्र में भाजपा कार्यकर्ता खुशी से झूम रहे हैं। भाकपा माले के राजकुमार यादव तीसरे स्थान पर हैं। गौरतलब हो कि कोडरमा के निवर्तमान सांसद डॉ. रवींद्र राय का टिकट कटने के बाद उपजे कई तरह के अंतर्विरोध के बावजूद चुनाव के ठीक पहले राजद छोड़कर भाजपा में शामिल हुईं अन्नपूर्णा देवी भाजपा के इस किले को बचाने में कामयाब होती दिख रही थीं, आखिरकार उन्होंने झारखंड के बड़े नेता बाबूलाल मरांडी को हराकर अपनी धमक भी पेश की।

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भाजपा का प्रदेश नेतृत्व व स्वयं मुख्यमंत्री रघुवर दास ने इसे चुनौती के रूप में लिया। मुख्यमंत्री ने यहां करीब आधा दर्जन चुनावी सभाएं की, पीएम भी पंहुचे। 1998 में अपने पति एकीकृत बिहार की राबड़ी देवी सरकार में मंत्री रहे स्व. रमेश प्रसाद यादव की असामयिक निधन के बाद घर की देहरी लांघकर राजनीति में आई अन्नपूर्णा देवी वर्ष 1998 का विधानसभा उपचुनाव वर्ष 2000, 2005 और 2009 का विधानसभा चुनाव लगातार कोडरमा विधानसभा क्षेत्र से जीतती रहीं। 2013 में हेमंत सोरेन की सरकार में वो प्रदेश में मंत्री भी बनी। लेकिन 2014 में उन्हें पहली बार भाजपा प्रत्याशी नीरा यादव से हार गईं। चुनाव में प्रदेश में राजद का सूपड़ा साफ हो गया था। इसके बाद वे राजद के प्रदेश अध्यक्ष रहीं, लेकिन 2019 के अप्रैल में ही सभी को चौंकाते हुए राजद छोड़ भाजपा में शामिल हो गईं। ऐसे में इन्होंने एक नया रिर्काड दर्ज कर अपनी दमदार मौजूदगी का अहसास कराया है।
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Edited By: Samridh Jharkhand
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