बड़कागांव, केरेडारी और पतरातू में ITI-पॉलिटेक्निक खोलने की मांग
स्थानीय युवाओं को नहीं मिल रहा उद्योगों में रोजगार
बड़कागांव विधायक रोशन लाल चौधरी ने विधानसभा में बड़कागांव, केरेडारी और पतरातू क्षेत्र में तकनीकी शिक्षा संस्थानों की कमी का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि खनन और उद्योगों से राजस्व देने वाला यह क्षेत्र आज भी ITI और पॉलिटेक्निक कॉलेज से वंचित है, जिससे स्थानीय युवाओं को रोजगार नहीं मिल पा रहा।
हजारीबाग : बड़कागांव विधानसभा क्षेत्र के बड़कागांव, केरेडारी और पतरातू ये सिर्फ तीन प्रखंडों के नाम नहीं हैं, बल्कि झारखंड के राजस्व और औद्योगिक प्रगति के मजबूत स्तंभ हैं। जहाँ एक दर्जन से अधिक विशाल खनन परियोजनाएं और दर्जनों छोटे-बड़े उद्योग चौबीसों घंटे धुआं उगलते हुए राज्य की तिजोरी भर रहे हैं। वहीं इसी धरती के नौजवान आज भी 'तकनीकी बेरोजगारी' का दंश झेलने को मजबूर हैं।
संसाधन हमारे, पर अवसर बाहरी क्यों?

उन्होंने स्पष्ट किया है कि पूरे क्षेत्र में आज तक एक भी सरकारी आईटीआई, पॉलिटेक्निक कॉलेज या स्किल डेवलपमेंट सेंटर स्थापित नहीं किया गया है। इसका सीधा परिणाम यह हो रहा है कि प्रशिक्षण का अभाव है स्थानीय युवाओं के पास प्रतिभा है, लेकिन उनके पास डिग्री या तकनीकी प्रमाण पत्र नहीं है।
बाहरी लोगों को वरीयता, उद्योग प्रबंधन 'प्रशिक्षित मैनपावर' के नाम पर बाहर के युवाओं को नियुक्त करता है, जबकि स्थानीय युवा अपनी ही जमीन पर मजदूरी करने को विवश हैं।
पलायन और हताशा, उच्च तकनीकी शिक्षा के लिए गरीब परिवारों के बच्चे बाहर जाने का खर्च नहीं उठा पाते, जिससे उनमें कुंठा बढ़ रही है।
विकास का पहिया तभी घूमेगा, जब हाथ में हुनर होगा
सिर्फ कारखाने लगा देने से क्षेत्रीय विकास की परिभाषा पूरी नहीं होती। वास्तविक विकास तब है जब उन कारखानों में चलने वाली मशीनों को चलाने वाले हाथ स्थानीय हों। यदि बड़कागांव, केरेडारी और पतरातू में अविलंब तकनीकी संस्थानों की स्थापना की जाती है, तो स्थानीय युवाओं को रोजगार के सीधे अवसर मिलेंगे। युवा आत्मनिर्भर बनेंगे और क्षेत्र में स्वरोजगार को बढ़ावा मिलेगा। औद्योगिक शांति बनी रहेगी, क्योंकि स्थानीय भागीदारी बढ़ने से असंतोष कम होगा।
आगे विधायक रोशन लाल चौधरी ने झारखंड विधानसभा के माध्यम से सरकार से पुरजोर मांग की है कि इन क्षेत्रों की संवेदनशीलता और इनके योगदान को देखते हुए यहाँ तकनीकी शिक्षा के केंद्र खोले जाएं। यह केवल एक मांग नहीं, बल्कि इस क्षेत्र के हजारों युवाओं के भविष्य का सवाल है।
"जब राजस्व हमारा है और संसाधन हमारे हैं, तो तकनीकी शिक्षा पर पहला हक भी हमारे युवाओं का ही होना चाहिए।"
Susmita Rani is a journalist and content writer associated with Samridh Jharkhand. She regularly writes and reports on grassroots news from Jharkhand, covering social issues, agriculture, administration, public concerns, and daily horoscopes. Her writing focuses on factual accuracy, clarity, and public interest.
