ईरान-यूएस तनाव से भारत में हीलियम संकट की आशंका, MRI सेवाएं हो सकती हैं प्रभावित

कतर के रास लफान संयंत्र पर हमले के बाद सप्लाई पर असर

ईरान-यूएस तनाव से भारत में हीलियम संकट की आशंका, MRI सेवाएं हो सकती हैं प्रभावित
हीलियम संकट से MRI सेवाओं पर मंडराता खतरा

ईरान-अमेरिका तनाव के कारण कतर से हीलियम सप्लाई प्रभावित होने की आशंका है, जिससे भारत में MRI सेवाओं पर असर पड़ सकता है। हीलियम की कीमतें बढ़ने से जांच महंगी हो सकती है। हालांकि, आधुनिक मशीनें कुछ राहत दे रही हैं, लेकिन लंबा संकट स्वास्थ्य सेवाओं को प्रभावित कर सकता है।

नई दिल्ली: ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते युद्ध जैसे हालात ने अब भारत के स्वास्थ्य क्षेत्र की चिंताएं बढ़ा दी हैं। तेल और एलपीजी की कीमतों में अस्थिरता के बाद अब एमआरआई मशीनों के संचालन के लिए आवश्यक हीलियम गैस की सप्लाई चेन बाधित होने की खबरें सामने आ रही हैं। दरअसल, ईरान द्वारा कतर के रास लफान संयंत्र पर किए गए हमले के बाद वहां से हीलियम का उत्पादन और निर्यात प्रभावित हुआ है।

कतर सप्लाई पर असर, भारत में हीलियम संकट की आशंका

भारत अपनी हीलियम जरूरतों का लगभग 100 प्रतिशत आयात कतर से करता है। ऐसे में इस गैस की कमी भारतीय अस्पतालों के लिए चिंता का विषय बन सकती है। कतर के रास लफान संयंत्र पर असर पड़ने से सप्लाई चेन कमजोर होने लगी है, जिसका सीधा असर भारत पर पड़ सकता है।

MRI सेवाओं पर खतरा, पुरानी मशीनें हो सकती हैं बंद

हीलियम एक रंगहीन और गंधहीन गैस है, जिसका तरल रूप एमआरआई मशीनों में लगे सुपरकंडक्टिंग मैग्नेट को ठंडा रखने के लिए कूलेंट के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। इसका बॉइलिंग पॉइंट शून्य से 269 डिग्री सेल्सियस नीचे होता है।

यदि इसकी आपूर्ति लंबे समय तक बाधित रहती है, तो पुरानी तकनीक वाली एमआरआई मशीनें बंद हो सकती हैं, जिन्हें नियमित गैस रिफिलिंग की आवश्यकता होती है।

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नई तकनीक से राहत, लेकिन महंगी हो सकती है जांच

राहत की बात यह है कि आधुनिक एमआरआई मशीनें अब हीलियम-फ्री या कम गैस खपत वाली तकनीक पर आधारित हैं। हालांकि, कुछ निजी स्कैन केंद्रों ने बताया है कि हीलियम के दाम दोगुने हो चुके हैं, जिससे भविष्य में एमआरआई जांच महंगी हो सकती है।

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विशेषज्ञों के अनुसार, भारत के 60 प्रतिशत से अधिक एमआरआई सिस्टम कम गैस खपत वाली तकनीक पर आधारित हैं, लेकिन यदि संकट लंबा चला तो कीमतें 15,000 रुपये तक बढ़ सकती हैं।

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होर्मुज जलडमरूमध्य पर टिकी नजरें

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि यदि होर्मुज जलडमरूमध्य का समुद्री मार्ग जल्द नहीं खुला और तनाव लंबा खिंचा, तो सप्लाई चेन पूरी तरह प्रभावित हो सकती है। फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है, लेकिन सरकार और स्वास्थ्य क्षेत्र की नजरें मध्य पूर्व के हालात पर टिकी हुई हैं।

Edited By: Mohit Sinha
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Mohit Sinha is a writer associated with Samridh Jharkhand. He regularly covers sports, crime, and social issues, with a focus on player statements, local incidents, and public interest stories. His writing reflects clarity, accuracy, and responsible journalism.

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