जेटेट नियमावली में भोजपुरी, मगही और अंगिका को शामिल करे सरकार : धर्मेंद्र तिवारी
जेटेट नियमावली में स्थानीय भाषाओं की उपेक्षा पर चिंता
जदयू के वरिष्ठ नेता धर्मेंद्र तिवारी ने झारखंड शिक्षक पात्रता परीक्षा (जेटेट) की नियमावली में भोजपुरी, मगही और अंगिका जैसी जनभाषाओं को शामिल नहीं किए जाने पर गहरी चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि इन भाषाओं को राज्य के कई क्षेत्रों में व्यापक रूप से बोला और समझा जाता है, लेकिन नियमावली में इन्हें उचित स्थान नहीं मिलना दुर्भाग्यपूर्ण है।
रांची : जनता दल यूनाइटेड के वरिष्ठ नेता धर्मेंद्र तिवारी ने झारखंड शिक्षक पात्रता परीक्षा (जेटेट) की नियमावली में स्थानीय एवं जनभाषाओं की उपेक्षा पर गहरी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि झारखंड के पलामू, गढ़वा, लातेहार, चतरा, हजारीबाग, साहिबगंज तथा संताल परगना सहित कई क्षेत्रों में भोजपुरी, मगही और अंगिका व्यापक रूप से बोली, समझी और व्यवहार में लाई जाती हैं, लेकिन इन्हें जेटेट नियमावली में समुचित स्थान नहीं दिया जाना दुर्भाग्यपूर्ण है।

उन्होंने कहा कि यदि सरकार वास्तव में स्थानीयता, मातृभाषा और झारखंडी अस्मिता की बात करती है, तो उसे व्यवहार में भी भाषाई न्याय सुनिश्चित करना चाहिए। धर्मेंद्र तिवारी ने कहा कि शिक्षा व्यवस्था में मातृभाषा और जनभाषाओं को सम्मान देने से न केवल अभ्यर्थियों का आत्मविश्वास बढ़ेगा, बल्कि प्राथमिक एवं बुनियादी शिक्षा भी अधिक प्रभावी होगी। उन्होंने स्पष्ट कहा कि यह केवल भाषा का प्रश्न नहीं, बल्कि समान अवसर, सामाजिक न्याय और लोकतांत्रिक संवेदनशीलता का मुद्दा है।
जदयू नेता ने मुख्यमंत्री से आग्रह किया कि इस विषय पर गंभीर पहल करते हुए संबंधित विभाग को आवश्यक संशोधन का निर्देश दें, ताकि भविष्य में किसी भी क्षेत्र या भाषा-समुदाय के साथ भेदभाव की भावना न पनपे।
Mohit Sinha is a writer associated with Samridh Jharkhand. He regularly covers sports, crime, and social issues, with a focus on player statements, local incidents, and public interest stories. His writing reflects clarity, accuracy, and responsible journalism.
