Putin India Visit: क्यों दुनिया के सबसे ताकतवर नेताओं में से एक नहीं रखते स्मार्टफोन?

Putin India Visit: क्यों दुनिया के सबसे ताकतवर नेताओं में से एक नहीं रखते स्मार्टफोन?
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टेक डेस्क: रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के भारत दौरे से पहले उनकी निजी ज़िंदगी का एक दिलचस्प पहलू फिर चर्चा में है – वह न तो स्मार्टफोन रखते हैं और न ही निजी तौर पर मोबाइल फोन का इस्तेमाल करते हैं। आज के डिजिटल दौर में, जहां आम लोग से लेकर बड़े नेता तक लगातार मोबाइल से जुड़े रहते हैं, वहां दुनिया की सबसे ताकतवर शख्सियतों में से एक का फोन से दूरी बनाकर रखना सबको चौंकाता है।

पुतिन के पास स्मार्टफोन क्यों नहीं है?

एक फ्रेंच चैनल की रिपोर्ट और क्रेमलिन की आधिकारिक जानकारी के मुताबिक, पुतिन के पास कोई स्मार्टफोन नहीं है और वे इसे अपने पास रखना भी पसंद नहीं करते। क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने एक इंटरव्यू में कहा था कि राष्ट्रपति स्मार्टफोन इसलिए नहीं रखते, क्योंकि इससे उनकी निजता और सुरक्षा दोनों पर गंभीर खतरा पैदा हो सकता है, खासकर इतने ऊंचे पद पर बैठे व्यक्ति के लिए।

साल 2018 में वैज्ञानिकों के साथ मुलाकात के दौरान, जब एक वैज्ञानिक ने कहा कि आज हर किसी की जेब में स्मार्टफोन होता है, तो पुतिन ने साफ कहा था कि उनके पास कोई स्मार्टफोन नहीं है। यह बयान खुद इस बात की पुष्टि करता है कि वे जानबूझकर डिजिटल गैजेट्स से दूरी बनाए रखते हैं।

नई तकनीक से दूरी और काम करने का तरीका

पुतिन कई मौकों पर कह चुके हैं कि वे नई तकनीक में बहुत माहिर नहीं हैं और इंटरनेट का बेहद सीमित इस्तेमाल करते हैं। उन्होंने रूसी समाचार एजेंसी तास को बताया था कि क्रेमलिन परिसर में मोबाइल फोन ले जाना पूरी तरह प्रतिबंधित है, क्योंकि वहीं उनका दफ्तर भी है और आवास भी, और वे ज्यादातर बातचीत सरकारी लैंडलाइन फोन पर ही करते हैं।

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इसका मतलब यह है कि दिन‑प्रतिदिन के कामकाज, आधिकारिक चर्चाओं और गोपनीय बातचीत के लिए पुतिन पारंपरिक और सुरक्षित संचार माध्यमों पर भरोसा करते हैं। उनकी टीम और सरकारी ढांचा उन्हें जरूरी सूचनाएं सीधे रिपोर्ट्स और लिखित दस्तावेजों के जरिए उपलब्ध कराता है, जिससे डिजिटल हैकिंग या डेटा लीकेज का जोखिम घट जाता है।

इंटरनेट के बारे में पुतिन की सोच

स्कूली बच्चों से बातचीत के दौरान पुतिन ने कहा था कि वे इंटरनेट का इस्तेमाल भी बहुत मुश्किल से करते हैं और इसे पूरी तरह सुरक्षित माध्यम नहीं मानते। उनका मानना है कि इंटरनेट से जुड़ी चीजें कई तरह के खतरों और निगरानी से घिरी रहती हैं, इसलिए वे ऐसे उपकरणों से दूरी रखना ही बेहतर समझते हैं।

उन्होंने इंटरनेट को एक बार अमेरिकी खुफिया एजेंसी CIA के खास प्रोजेक्ट की तरह बताया था और कहा था कि ऑनलाइन दुनिया में मौजूद लगभग आधी चीजें “गंदी” या नकारात्मक सामग्री वाली हैं। इसी सोच के चलते उनके आसपास भी मोबाइल या इंटरनेट‑कनेक्टेड डिवाइस नहीं रखे जाते, ताकि साइबर जासूसी या निगरानी की कोई गुंजाइश न बचे।

बिना मोबाइल के भी कैसे रहते हैं अपडेट?

सवाल उठता है कि जब पुतिन न स्मार्टफोन चलाते हैं और न इंटरनेट, तो वैश्विक घटनाओं और ताज़ा खबरों से खुद को कैसे अपडेट रखते हैं। वास्तव में उनके पास एक मजबूत इंटेलिजेंस नेटवर्क, विस्तृत खुफिया रिपोर्ट्स, कूटनीतिक दस्तावेज और टीवी न्यूज चैनलों का चयनित कंटेंट नियमित रूप से भेजा जाता है, जिनके माध्यम से उन्हें देश‑दुनिया की हर जरूरी जानकारी मिलती रहती है।

हालांकि, आलोचकों का तर्क है कि स्मार्टफोन और इंटरनेट से इतनी दूरी के कारण पुतिन तक पहुंचने वाली जानकारी फ़िल्टर होकर आती है और वे सीधे आम लोगों की ऑनलाइन राय या सोशल मीडिया का मूड महसूस नहीं कर पाते। इसके बावजूद, सुरक्षा और गोपनीयता को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की उनकी नीति यही बताती है कि वे तकनीक की सहज सुविधा से ज़्यादा, उसकी संभावित जोखिमों पर ध्यान देते हैं।

Edited By: Samridh Desk
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