Pamban Bridge: समुद्र के ऊपर उड़ती ट्रेन का रोमांच, जानिए भारत के पहले सी रेल ब्रिज की कहानी
चेन्नई: तमिलनाडु के रामेश्वरम द्वीप को मुख्यभूमि से जोड़ने वाला पंबन रेलवे ब्रिज भारत का पहला समुद्री रेल पुल है, जहां से गुजरने वाली ट्रेनें यात्रियों को ऐसा लगता है जैसे वे पानी के ऊपर उड़ रही हों। चारों ओर नीला समुद्र, तेज हवाएं और लहरों की थाप के बीच यह सफर किसी साहसिक फिल्म का दृश्य बन जाता है। रामेश्वरम धाम के तीर्थयात्रियों के लिए यह पुल न सिर्फ जरूरी रास्ता है, बल्कि यादगार अनुभव भी।
ब्रिटिश काल का इंजीनियरिंग चमत्कार

1964 का भयानक हादसा और चुनौतियां
1964 के भयंकर चक्रवात में धनुषकोडी बंदरगाह तबाह हो गया और पंबन ब्रिज को भारी नुकसान पहुंचा, जिसमें एक पैसेंजर ट्रेन बह गई थी। फिर भी, इसका लिफ्ट स्पैन बच गया, जो इंजीनियरिंग की ताकत दिखाता है। समय के साथ जंग और मौसम ने इसे कमजोर कर दिया, इसलिए रामेश्वरम आने-जाने वाले रास्ते पर खतरा बढ़ गया। यात्रियों को रूह कांपने वाली वो हलचल अब इतिहास बन चुकी है।
नया आधुनिक पुल: मोदी का तोहफा
पुराने पुल की जगह अब 2.07 किलोमीटर लंबा नया पंबन ब्रिज बनकर तैयार है, जिसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 6 अप्रैल 2025 को राम नवमी के दिन उद्घाटित किया। 700 करोड़ से ज्यादा लागत से बना यह भारत का पहला वर्टिकल लिफ्ट सी ब्रिज है, जो 17 मीटर ऊंचा होकर बड़े जहाजों को रास्ता देता है। 80 किमी/घंटा स्पीड वाली ट्रेनें 100 साल तक सुरक्षित चल सकेंगी, भले ही 80 किमी/घंटा हवाएं चलें। रेल विकास निगम लिमिटेड ने इसे कठोर समुद्री हालात के लिए डिजाइन किया।
रोमांच और धार्मिक महत्व
इस ब्रिज से गुजरना आज भी थ्रिलिंग है नीचे पाल्क स्ट्रेट की लहरें टकराती हैं, हवा तेज चलती है और दूर तक सिर्फ समुद्र दिखता है। रामेश्वरम के भक्तों के लिए यह पुल श्रद्धा का प्रतीक है, जो द्वीप को मंडापम से जोड़ता है। पुराने पुल ने फिल्मों में जगह बनाई, तो नया वाला विकास की मिसाल। पर्यटक इसे देश के सबसे अनोखे इंजीनियरिंग आकर्षणों में गिनते हैं।
