गाँव की बैंकिंग दीदी: उर्मिला कुमारी की आत्मनिर्भरता की कहानी

BC Point और स्टेशनरी दुकान से मिली नई पहचान

गाँव की बैंकिंग दीदी: उर्मिला कुमारी की आत्मनिर्भरता की कहानी
उर्मिला कुमारी (फाइल)

रामगढ़: झारखंड राज्य के रामगढ़ जिले की कुंदरूकला पंचायत के लोधमा गाँव की रहने वाली उर्मिला कुमारी आज गाँव में आत्मनिर्भर महिला के रूप में पहचानी जाती हैं। कभी वे गाँव में साधारण महिला थीं, जिन्हें लोग पहचानते तक नहीं थे। लेकिन स्वयं सहायता समूह और जेएसएलपीएस के सहयोग ने उनकी ज़िंदगी को एक नई दिशा दी, जो आज उनकी पहचान बन गयी।

प्रारंभिक जीवन और संघर्ष

समूह से जुड़ने से पहले उर्मिला कुमारी का जीवन संघर्षों से भरा हुआ था। गाँव में उनकी कोई पहचान नहीं थी। वे अधिकतर समय घर के कामकाज में ही व्यस्त रहती थीं और बाहर की गतिविधियों से उनका कोई जुड़ाव नहीं था। परिवार की आर्थिक स्थिति बहुत अच्छी नहीं थी। पति की आय से ही घर चलता था, लेकिन बच्चों की पढ़ाई, स्वास्थ्य और दैनिक आवश्यकताओं को पूरा करना मुश्किल हो जाता था। उस समय उर्मिला अपने भविष्य को लेकर असमंजस में थीं और उनके पास आत्मनिर्भरता का कोई साधन नहीं था।

समूह से जुड़ने का कदम

28 दिसम्बर 2016 को जब गाँव में शांति आजीविका महिला समूह का गठन हुआ, तो उर्मिला भी समूह से जुड़ीं। समूह से जुड़ना उनके जीवन का सबसे अहम निर्णय था। समूह की बैठकों में उन्होंने सीखा कि महिलाएँ संगठित होकर किस तरह अपनी स्थिति बदल सकती हैं। धीरे-धीरे उनमें आत्मविश्वास आया और वे अपनी राय खुलकर रखने लगीं। समूह से उन्हें 5,000 रुपये का छोटा ऋण मिला, जिससे उन्होंने घर की जरूरतें पूरी कीं। फिर आगे चलकर उन्हें 50,000 रुपये का बड़ा ऋण मिला, जिससे उन्होंने BC Point (बैंकिंग कॉरस्पॉन्डेंट पॉइंट) की शुरुआत की।

BC Point से मिली नई पहचान

BC Point खोलने के बाद उर्मिला कुमारी की जिंदगी में बड़ा बदलाव आया। अब वे गाँव के लोगों का खाता खोलतीं, आधार लिंक करातीं, पैसे का लेन-देन करातीं और सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने में मदद करतीं। गाँव के लोगों को अब बैंक तक जाने की जरूरत नहीं पड़ता था। वे सीधे उर्मिला के पास जाते और आसानी से काम निपटा लेते हैं। अपने व्यवसाय को और विस्तार करने के लिए उन्होंने साथ में ही छोटा सा स्टेशनरी का दुकान भी बढाया। इससे उर्मिला को भी स्थायी आमदनी मिलने लगी। आज वे हर महीने 8,000 से 10,000 रुपये तक की आय कमा लेती हैं। सालाना 1 से 1.5 लाख तक की आमदनी हो जाती है। इससे उनका परिवार आर्थिक रूप से सशक्त हुआ और बच्चों की शिक्षा सुचारू रूप से होने लगी।

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आत्मविश्वास और सामाजिक पहचान

समूह और जेएसएलपीएस से जुड़ने के बाद उर्मिला का आत्मविश्वास बढ़ा। पहले जो महिला बोलने से हिचकिचाती थी, अब वही गाँव की बैठकों में आत्मविश्वास से अपनी बात रखती हैं। गाँव की अन्य महिलाएँ उन्हें प्रेरणा मानती हैं। उर्मिला कहती हैं "समूह और JSLPS (झारखण्ड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी) ने मुझे अवसर दिया। पहले मैं चुप रहती थी, पर अब आत्मविश्वास से समाज के बीच खड़ी हो सकती हूँ।"

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चुनौतियाँ और समाधान

सफलता का यह सफर आसान नहीं था। शुरुआत में बैंकिंग कार्य करना उनके लिए कठिन था। तकनीकी दिक्कतें आती थीं और लोगों का भरोसा जीतना भी चुनौती थी। लेकिन JSLPS के प्रशिक्षण और समूह की बहनों के सहयोग से उन्होंने धीरे-धीरे सब सीख लिया। अब वे बिना किसी झिझक के काम करती हैं और गाँववाले भी उन पर पूरा विश्वास करते हैं।

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वर्तमान स्थिति

आज उर्मिला कुमारी का BC Point गाँव के लिए बैंक जैसी सुविधा बन चुका है। लोग उन्हें "गाँव की बैंकिंग दीदी" कहकर बुलाते हैं। उनकी मेहनत और लगन से न सिर्फ उनका परिवार खुशहाल हुआ है, बल्कि पूरे गाँव को सुविधा मिली है। अब उनके बच्चे अच्छी शिक्षा पा रहे हैं और परिवार आर्थिक रूप से स्थिर हो गया है।

भविष्य की योजना

उर्मिला सिर्फ वर्तमान तक सीमित नहीं रहना चाहतीं। वे आगे और बढ़ना चाहती हैं। उनका सपना है कि अन्य महिलाओं को भी समूह से जोड़कर आत्मनिर्भर बनाएँ। वे चाहती हैं कि उनके बच्चे बेहतर शिक्षा पाकर समाज में सम्मानजनक स्थान बनाएं।

उर्मिला कहती हैं- "मैं अपनी आजीविका को और मजबूत बनाना चाहती हूँ, बच्चों को अच्छी शिक्षा दिलाना और परिवार को सम्मानजनक जीवन देना ही मेरा सपना है।"

आज वे साबित कर चुकी हैं कि सही मार्गदर्शन, आत्मविश्वास और मेहनत से महिलाएँ अपने जीवन की दिशा बदल सकती हैं। JSLPS और स्वयं सहायता समूह ने उन्हें आत्मनिर्भरता का जो अवसर दिया, उसने न सिर्फ उनके परिवार बल्कि पूरे गाँव की तकदीर बदल दी।

Edited By: Samridh Desk
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