फिलिस्तीन यात्रा के अनुभव साझा कर विनीत तिवारी ने बताई जमीनी सच्चाई
चेक पोस्ट और सुरक्षा व्यवस्था ने बढ़ाई आम लोगों की परेशानी
मेदिनीनगर में आयोजित कार्यक्रम में विनीत तिवारी ने फिलिस्तीन यात्रा के अनुभव साझा करते हुए वहां के संघर्षपूर्ण जीवन, पाबंदियों और संसाधनों की कमी की वास्तविक स्थिति को सामने रखा।
पलामू : इप्टा पलामू द्वारा आयोजित साक्षात्कार कार्यक्रम में प्रगतिशील लेखक संघ के राष्ट्रीय सचिव एवं इप्टा राष्ट्रीय कार्यकारिणी के वरिष्ठ सदस्य विनीत तिवारी ने अपनी फिलिस्तीन यात्रा के अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि फिलिस्तीन जाने से पहले उन्हें काफी तैयारी करनी पड़ी। वीजा प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए उन्होंने स्वयं को धर्म-दर्शन के शोधार्थी के रूप में प्रस्तुत किया और सोशल मीडिया से फिलिस्तीन समर्थक पोस्ट हटाने पड़े, क्योंकि इसराइल के रास्ते ही वहां पहुंचना संभव था।

विनीत तिवारी ने ऐतिहासिक संदर्भ देते हुए बताया कि आर्थर बालफोर के पत्र के बाद फिलिस्तीन की जमीन पर यहूदियों के लिए देश बसाने की अवधारणा बनी। आज फिलिस्तीन गाजा और वेस्ट बैंक में विभाजित है और दोनों के बीच इजराइल का नियंत्रण है।
उन्होंने बताया कि बेथलहम से जेरूसलम जाने के दौरान 67 चेक पोस्ट पार करने पड़ते हैं, जहां इजरायली सैनिकों की सख्त निगरानी रहती है। पर्यटकों को अपेक्षाकृत आसानी होती है, लेकिन फिलिस्तीनियों को घंटों इंतजार करना पड़ता है और कई बार अपमानजनक व्यवहार का सामना भी करना पड़ता है।
वेस्ट बैंक में ए, बी और सी श्रेणियों में विभाजन का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि सीमित प्रशासनिक अधिकार होने के बावजूद फिलिस्तीनियों के पास अपनी मुद्रा तक नहीं है। पानी जैसी बुनियादी सुविधाओं में भी भारी असमानता है—जहां इजरायली घरों में निरंतर जलापूर्ति होती है, वहीं फिलिस्तीनियों को कई दिनों में एक बार पानी मिलता है।
उन्होंने यह भी बताया कि आवाजाही पर कड़ी पाबंदियों के कारण कई परिवार दशकों से एक-दूसरे से नहीं मिल पाए हैं, भले ही दूरी महज कुछ किलोमीटर ही क्यों न हो। महिलाओं और पुरुषों के साथ सुरक्षा बलों का व्यवहार भी चिंताजनक बताया गया।
कार्यक्रम में अध्यक्षता प्रेम भसीन ने की तथा संचालन शैलेंद्र कुमार ने किया। मौके पर भाकपा जिला सचिव रुचिर तिवारी, कांग्रेस प्रवक्ता गोपाल सिंह, अधिवक्ता संजय कुमार अकेला सहित कई सामाजिक व राजनीतिक कार्यकर्ता उपस्थित थे। समग्र रूप से, विनीत तिवारी के अनुभवों ने फिलिस्तीनियों के कठिन जीवन, संसाधनों की कमी और जारी संघर्ष की गंभीर तस्वीर प्रस्तुत की।
