हथियार छोड़ मुख्यधारा की ओर लौटे ग्रामीण: पलामू टाइगर रिजर्व और बूढ़ापहाड़ क्षेत्र में दिखा बड़ा बदलाव

सीमावर्ती इलाकों से हथियारों की तस्करी और नक्सली लिंक की जांच

हथियार छोड़ मुख्यधारा की ओर लौटे ग्रामीण: पलामू टाइगर रिजर्व और बूढ़ापहाड़ क्षेत्र में दिखा बड़ा बदलाव
(फोटो)

कभी नक्सली हिंसा और अवैध शिकार के लिए चर्चित पलामू टाइगर रिजर्व (PTR) और बूढ़ापहाड़ क्षेत्र में अब शांति की बयार बह रही है। प्रशासन की जागरूकता और ग्रामीणों के भरोसे के चलते पिछले सात महीनों में 40 से अधिक देसी हथियार (12 बोर) बरामद किए गए हैं। ग्रामीणों ने स्वेच्छा से शिकार और सुरक्षा के लिए रखे पुराने हथियार सौंप दिए हैं, जिससे वन्यजीव संरक्षण को मजबूती मिली है।

मेदिनीनगर: टाइगर रिजर्व (PTR) और पूर्व नक्सल प्रभावित क्षेत्र बूढ़ापहाड़ के जंगलों से एक सुखद तस्वीर सामने आ रही है। कभी अशांत रहने वाले इन इलाकों में अब ग्रामीण स्वेच्छा से अपने देसी हथियार छोड़ रहे हैं। पिछले सात महीनों के भीतर प्रशासन ने जंगल और गुप्त सूचनाओं के आधार पर लगभग 40 हथियार बरामद किए हैं।

इस बदलाव की नींव अक्टूबर 2025 में 'वन्यजीव सप्ताह' के दौरान रखी गई थी। पलामू टाइगर रिजर्व प्रशासन ने ग्रामीणों से अपील की थी कि वे वन्यजीवों की सुरक्षा और क्षेत्र में शांति के लिए अपने पुराने और अवैध हथियार सरेंडर कर दें। उस दौरान 23 ग्रामीणों ने आगे आकर हथियार जमा किए थे, जिसके बाद से यह सिलसिला लगातार जारी है।

प्रशासनिक जांच में यह बात सामने आई है कि ग्रामीण इन देसी हथियारों (ज्यादातर 12 बोर की बंदूकें) का इस्तेमाल जंगली जानवरों के शिकार और अपनी सुरक्षा के लिए करते थे। हालांकि, इनमें से कुछ हथियारों का उपयोग नक्सली गतिविधियों में भी होने की आशंका रहती थी।

बरामदगी: पिछले एक साल में छापेमारी और सरेंडर के जरिए कुल 42 से अधिक हथियार बरामद किए गए हैं। तकनीकी विवरण: ये सभी हथियार 12 बोर के हैं, जिनकी मारक क्षमता लगभग 30 मीटर तक होती है। 
इनका कनेक्शन छत्तीसगढ़ के सीमावर्ती इलाकों से भी जुड़ा पाया गया है।

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पलामू और झारखंड-छत्तीसगढ़ सीमा के गांवों में पारंपरिक शिकार की एक लंबी परंपरा रही है। 70 के दशक से ही यह इलाका वन्यजीव शिकार का केंद्र रहा था। नक्सली हिंसा के दौर में कई ग्रामीणों ने डर या प्रभाव में आकर हथियार छुपा लिए थे। लेकिन अब नक्सली गतिविधियों में कमी आने और प्रशासन के बढ़ते भरोसे के कारण लोग पारंपरिक शिकार छोड़ मुख्यधारा में शामिल हो रहे हैं।

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"क्षेत्र में जन भागीदारी बढ़ाने के लिए लगातार जागरूकता कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। यह बहुत अच्छी बात है कि ग्रामीण अब खुद गोपनीय रूप से हथियारों की जानकारी साझा कर रहे हैं। जो लोग स्वेच्छा से हथियार छोड़ रहे हैं, उनका स्वागत है, लेकिन जो अब भी अवैध हथियार छिपाकर रखेंगे, उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।" सभी बरामद हथियारों को वर्तमान में टाइगर रिजर्व के गोदाम में सुरक्षित रखा गया है। प्रशासन को उम्मीद है कि इस पहल से न केवल क्षेत्र में अपराध कम होगा, बल्कि दुर्लभ वन्यजीवों के संरक्षण को भी मजबूती मिलेगी।

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Edited By: Anjali Sinha

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