Biodiversity
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Read More... संथाल परगना के लिट्टो बालूघाटू में जैव विविधता संरक्षण की अनूठी पहल, कुलेश भंडारी ने जगाई वन ज्ञान की अलख
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By Mohit Sinha
संथाल परगना के रामगढ़ प्रखंड के लिट्टो बालूघाटू गांव में जैव विविधता शोधकर्ता कुलेश भंडारी के नेतृत्व में 'Wild Food Forest in Tribal Jharkhand' परियोजना के तहत सामुदायिक संवाद कार्यक्रम आयोजित किया गया। असम में मिली दुर्लभ ‘बेंट-टोएड गेको’ छिपकली, वैज्ञानिक भी हुए हैरान
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By Mohit Sinha
असम के ग्वालपारा जिले स्थित उरपाद बील में दुर्लभ बेंट-टोएड गेको छिपकली देखी गई है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह पहली बार है जब इस प्रजाति को राज्य में आधिकारिक रूप से दर्ज किया गया है। टाटा स्टील जूलॉजिकल पार्क में मित्रता दिवस के उपलक्ष्य में कार्यक्रम का आयोजन
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By Sujit Sinha
मित्रता दिवस के अवसर पर टाटा स्टील जूलॉजिकल पार्क में हैंड-रीयर्ड मैंड्रिल ‘रंगा’ का जन्मदिन उत्साहपूर्वक मनाया गया जिसमें फ्रेंडशिप बैंड’ बांधकर पर्यावरण और जैव विविधता के साथ आत्मीयता व मित्रता का प्रतीकात्मक संदेश प्रस्तुत किया. Climate कहानी: जैव विविधता, जलवायु परिवर्तन और स्वास्थ्य को जोड़ने वाला IPBES का 'नेक्सस असेसमेंट': भारत के लिए एक सबक
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By Climate कहानी
भारत जैसे देश, जहां कृषि अर्थव्यवस्था की रीढ़ है और जनसंख्या का बड़ा हिस्सा प्राकृतिक संसाधनों पर निर्भर है, इस रिपोर्ट में सुझाए गए उपाय बेहद प्रासंगिक हैं. जल संकट, प्रदूषण, वनों की कटाई और अनियमित शहरीकरण जैसे मुद्दे यहां न केवल जैव विविधता को प्रभावित कर रहे हैं, बल्कि स्वास्थ्य और खाद्य सुरक्षा पर भी गंभीर प्रभाव डाल रहे हैं. पृथ्वी पर जीवन का अस्तित्व जैव विविधता पर निर्भर करता है: डॉ रणजीत कुमार सिंह
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By Samridh Jharkhand
साहिबगंज : मानव अस्तित्व के लिए खाना, पानी और अन्य बुनियादी चीजें प्रकृति द्वारा ही संभव हैं।ं इसलिए इसके महत्व पर लोगों का ध्यान आकर्षित करना बेहद जरूरी है। जैव विविधता लोगों की सुरक्षा कैसे करता है, यह जानना जरूरी... जैव विविधता : विकासशील देशों में विकल्पों के अभाव में वन्य जीवों का गैर सतत उपयोग अधिक
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By Samridh Jharkhand
हर पांच में से एक व्यक्ति अपनी आमदनी और भोजन के लिए वन्यजीव प्रजातियों पर है निर्भर। इंसान के भोजन के लिए 10 हजार वन्यजीव प्रजातियों का होता है दोहन अक्सर ‘जैव-विविधता के लिए आईपीसीसी’ के तौर पर वर्णित की... केंदू पत्ता के लिए जंगल में लगायी जाने वाली आग से हर साल निकलता है 56 लाख कार के बराबर धुआं
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By Samridh Jharkhand
नयी दिल्ली : आइफॉरेस्ट द्वारा उपग्रह डेटा विश्लेषण से पता चलता है कि बीड़ी बनाने के लिए तेंदू पत्ता संग्रहण के लिए भारत में हर साल वन भूमि के बड़े हिस्से को जलाया जा रहा है। बढते जलवायु आपदा को... ब्लॉग : आदिवासियों के अधिकार और अस्मिता के अनुत्तरित अध्याय
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By Samridh Jharkhand
रमेश शर्मा 28 मई 1830 को तत्कालीन अमेरिका की संसद में एक क़ानून पारित हुआ जिसे ‘इंडियन रिमूवल एक्ट’ के नाम से जाना जाता है। लेकिन यह संसद मे पारित होने वाले तमाम कानूनों से अलहदा था। वह इसलिये कि... संयुक्त राष्ट्र का यह महा सम्मलेन कस सकता है जैव विविधता के नुकसान पर लगाम
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By Samridh Jharkhand
लिविंग इन हार्मनी विद नेचर के 2050 के लक्ष्य लेकर बढ़ेगा कल से चीन में वर्चुअल रूप से शुरू होने वाला यह जैव विविधता महा सम्मलेन मानव इतिहास में किसी भी वक़्त की तुलना में हम आज सबसे तेज़ी से... 