स्वास्थ्य और रोजगार के लिए गिरिडीह में आयुर्वेद संस्थान जरूरी: खंडेलवाल
आयुष मंत्रालय को पत्र लिखकर उठाई गई मांग
सुनील खंडेलवाल ने गिरिडीह में आयुर्वेद संस्थान खोलने की मांग की, जिससे स्वास्थ्य सेवाओं, रोजगार और पर्यटन को बढ़ावा मिल सके।
गिरिडीह : सामाजिक कार्यकर्ता सुनील खंडेलवाल ने गिरिडीह जिले में राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान की स्थापना की मांग की है। इस संबंध में खंडेलवाल ने आयुष विभाग के सचिव को पत्र लिखकर कहा है कि आयुर्वेद, जो भारत की प्राचीन एवं समृद्ध चिकित्सा पद्धति का आधार है, आज पुनः वैश्विक स्तर पर अपनी प्रभावशीलता और महत्व के कारण तेजी से स्थापित हो रहा है। भारत सरकार द्वारा आयुर्वेद के संरक्षण, संवर्धन एवं प्रसार के लिए किए जा रहे प्रयास अत्यंत सराहनीय हैं।

गिरिडीह जिले में यदि राष्ट्रीय स्तर का आयुर्वेद संस्थान स्थापित किया जाता है, तो इसके महत्वपूर्ण लाभ होंगे। इससे आयुर्वेद चिकित्सा, शोध एवं शिक्षा को एक सशक्त मंच प्राप्त होगा। स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे। झारखंड सहित पूर्वी भारत के लाखों लोगों को सुलभ एवं किफायती उपचार मिल सकेगा।
औषधीय पौधों के संरक्षण एवं संवर्धन को बढ़ावा मिलेगा, क्षेत्रीय विकास के साथ-साथ स्वास्थ्य पर्यटन (Health Tourism) को भी नई दिशा मिलेगी। गिरिडीह का शांत एवं प्राकृतिक वातावरण रोगों के उपचार एवं मानसिक स्वास्थ्य के लिए अत्यंत अनुकूल है, जो आयुर्वेद की मूल अवधारणा “प्रकृति के साथ संतुलन” के अनुरूप है।
खंडेलवाल ने अपने पत्र में सरकार से अनुरोध किया है कि जनहित एवं देशहित को ध्यान में रखते हुए गिरिडीह जिले में राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान की स्थापना हेतु आवश्यक पहल की जाए। सरकार की सकारात्मक पहल से न केवल आयुर्वेद को नई ऊँचाइयाँ मिलेंगी, बल्कि झारखंड के विकास को भी एक नई दिशा प्राप्त होगी। खंडेलवाल के पत्र पर आवश्यक कार्रवाई करने हेतु इसे डॉ सुरेश कुमार, संयुक्त सलाहकार (आयुर्वेद), राष्ट्रीय आयुष मिशन, नई दिल्ली के पास अग्रसारित कर दिया गया है।
