Sahebganj News: जियोलॉजी छात्रों ने राजमहल पहाड़ियों में शुरू किया फील्ड ट्रिप, कर रहे ज्वालामुखीय संरचनाओं का अध्ययन
600 मीटर से अधिक मोटी लावा की परतों और ज्वालामुखीय संरचनाओं का प्रत्यक्ष अवलोकन
झारखंड की राजमहल पहाड़ियाँ इन दिनों पटना विश्वविद्यालय के M.Sc. जियोलॉजी छात्रों के लिए एक जीवंत प्रयोगशाला बनी हुई हैं। प्रख्यात भू-विज्ञानी डॉ. रणजीत कुमार सिंह के नेतृत्व में छात्र 117 मिलियन वर्ष पुराने 'राजमहल ट्रैप्स' और ज्वालामुखीय बेसाल्टिक लावा प्रवाह का अध्ययन कर रहे हैं। मंडरो फॉसिल पार्क में मेसोज़ोइक युग के जीवाश्मों के जरिए प्राचीन पर्यावरण और जैव विविधता को समझने का यह प्रयास क्षेत्रीय भूवैज्ञानिक विरासत के संरक्षण की दिशा में एक बड़ा कदम है।
साहिबगंज: झारखंड के ऐतिहासिक एवं भूवैज्ञानिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण राजमहल पहाड़ियाँ इन दिनों शैक्षणिक गतिविधियों का केंद्र बनी हुई हैं। पटना विश्वविद्यालय के M.Sc. जियोलॉजी के छात्रों का चार दिवसीय शैक्षणिक फील्ड ट्रिप 29 मार्च से प्रारंभ हुआ है, जो 1 अप्रैल 2026 तक चलेगा। इस फील्ड ट्रिप का नेतृत्व मॉडल कॉलेज राजमहल, साहिबगंज के प्राचार्य सह प्रख्यात भू-विज्ञानी डॉक्टर रणजीत कुमार सिंह कर रहे हैं। यह फील्ड ट्रिप ख्यातिप्राप्त राजमहल की पहाड़ी क्षेत्र में संचालित हो रहा है, जो अपनी अद्वितीय ज्वालामुखीय संरचनाओं और भू-आकृतिक विशेषताओं के लिए विश्व प्रसिद्ध है।

डॉ. सिंह के अनुसार यह फील्ड ट्रिप छात्रों के लिए एक “ओपन लैबोरेटरी” के समान है, जहाँ वे बेसाल्टिक लावा प्रवाह, वेसिकुलर एवं स्तंभाकार संरचनाओं तथा इंटरट्रैपियन अवसादी परतों का प्रत्यक्ष अध्ययन कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि कक्षा में पढ़ाए गए सैद्धांतिक ज्ञान को व्यावहारिक रूप में समझने के लिए ऐसे फील्ड भ्रमण अत्यंत आवश्यक होते हैं।
इस शैक्षणिक भ्रमण में डॉक्टर सईद मोहम्मद सलीम एवं डॉक्टर कृति यादव भी छात्रों के साथ उपस्थित हैं और उन्हें सतत मार्गदर्शन प्रदान कर रहे हैं। फील्ड ट्रिप के दौरान छात्रों ने मंडरो फॉसिल पार्क तथा सकरीगली क्षेत्र का भ्रमण किया, जहाँ उन्हें मेसोज़ोइक युग के महत्वपूर्ण पादप एवं जंतु जीवाश्मों का अध्ययन कराया गया। इन जीवाश्मों के माध्यम से उस समय के पालीओपर्यावरण एवं जैव विविधता को समझने में महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त होती है।
डॉ. सिंह ने बताया कि इस क्षेत्र में पाए जाने वाले जीवाश्म, जीवाश्मिकरण प्रक्रिया का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत करते हैं, जिसमें ज्वालामुखीय राख एवं सिलिका युक्त द्रवों के कारण जीवों की सूक्ष्म संरचनाएँ लाखों वर्षों तक सुरक्षित रहती हैं। यह फील्ड ट्रिप छात्रों को केवल सैद्धांतिक ज्ञान तक सीमित नहीं रखता, बल्कि उन्हें भू-मानचित्रण, खनिज संसाधनों के अध्ययन एवं बायोस्ट्रेटिग्राफी जैसे व्यावहारिक पहलुओं से भी जोड़ता है। साथ ही यह पहल क्षेत्रीय भूवैज्ञानिक विरासत के संरक्षण एवं उसके शैक्षणिक उपयोग की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखी जा रही है।
इस दौरान रिसर्च स्कॉलर गणेश मिश्रा, प्रिंस, प्रणव, ज्ञान, हर्षिता, अभिषेक, श्रुति, ईमाम, सिमरन, आकाश, वैभव व अन्य छात्र-छात्राएं सक्रिय रूप से अध्ययन में भाग ले रहे हैं। जीवाश्म गाइड के रूप में लक्ष्मण मुर्मू भी टीम के साथ जुड़े हुए हैं। फील्ड ट्रिप के आगामी चरण में सकरीगली, बोरियो, राजमहल एवं महाराजपुर क्षेत्रों का विस्तृत अध्ययन किया जाएगा, जहाँ छात्रों को क्षेत्र की विविध भूवैज्ञानिक संरचनाओं का गहन अवलोकन कराया जाएगा।
