4 साल बाद घर लौटा गुरवा, मां की दुआ और प्रयासों ने रचा चमत्कार

बालगृह में रह रहा था गुरवा, पहचान बनाना था चुनौती

4 साल बाद घर लौटा गुरवा, मां की दुआ और प्रयासों ने रचा चमत्कार
परिवार से मिलकर भावुक हुआ गुरवा

बोकारो में 4 साल से लापता गुरवा आखिरकार अपने परिवार से मिल गया। मानसिक रूप से कमजोर होने के कारण उसकी पहचान करना मुश्किल था, लेकिन बाल कल्याण समिति, जिला बाल संरक्षण इकाई और UNICEF समेत कई संस्थाओं के प्रयास से यह संभव हो सका।

बोकारो: कभी उम्मीद लगभग खत्म हो चुकी थी, लेकिन एक मां की दुआ और लगातार प्रयासों ने आखिर चमत्कार कर ही दिया। करीब 4 साल से अपने परिवार से बिछड़ा गुरवा जब अपने घर लौटा, तो उसे देखते ही पूरे परिवार की आंखों से खुशी के आंसू छलक पड़े। घर का माहौल मानो त्योहार में बदल गया।

यह भावुक कर देने वाली कहानी चास स्थित सहयोग विलेज बालगृह से सामने आई है, जहां गुरवा पिछले कई वर्षों से रह रहा था। बाल कल्याण समिति, जिला बाल संरक्षण इकाई, सहयोग विलेज, UNICEF और सेंटर फॉर चाइल्ड राइट्स, NUSRL के संयुक्त प्रयासों से यह संभव हो सका।

जानकारी के अनुसार, लगभग 20 वर्षीय गुरवा वर्ष 2022 में पिंड्राजोरा इलाके में भटकते हुए मिला था। ग्रामीणों ने उसे पुलिस को सौंपा, जहां से आवश्यक प्रक्रिया पूरी कर उसे बाल कल्याण समिति के समक्ष प्रस्तुत किया गया। समिति के निर्देश पर उसे बालगृह में आश्रय दिया गया।

गुरवा मानसिक रूप से कमजोर था और अपने घर-परिवार के बारे में स्पष्ट जानकारी नहीं दे पाता था। यही कारण था कि उसकी पहचान करना और परिवार तक पहुंचना एक बड़ी चुनौती बन गया। इस दौरान उसका लगातार इलाज कराया गया, जिससे उसकी स्थिति में धीरे-धीरे सुधार हुआ।

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आधार कार्ड बनाने की कई बार कोशिश की गई, लेकिन हर बार कोई न कोई समस्या सामने आती रही। बाद में पता चला कि उसका आधार पहले से बना हुआ है, लेकिन उसकी जानकारी उपलब्ध नहीं थी। अंततः UNICEF और सेंटर फॉर चाइल्ड राइट्स, NUSRL के सहयोग से आधार से जुड़ी जानकारी प्राप्त हुई और उसी के आधार पर गुरवा के घर का पता चल सका।

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जिला बाल संरक्षण इकाई ने भी हार नहीं मानी। अखबारों में सूचना प्रकाशित की गई, ऑनलाइन पोर्टल पर जानकारी साझा की गई और हर संभव प्रयास किया गया। लंबे इंतजार और अथक मेहनत के बाद आखिरकार गुरवा को उसके परिवार के सुपुर्द कर दिया गया।

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गुरवा की मां ने भावुक होकर कहा, “वह बारात गया था और लौटते समय कहीं खो गया। हमें लगा अब शायद कभी नहीं मिलेगा… लेकिन आज वह हमारे सामने है, इससे बड़ी खुशी कोई नहीं हो सकती।”

बाल कल्याण समिति, बोकारो की अध्यक्ष लीलावती देवी ने कहा कि यह केवल एक बच्चे की घर वापसी नहीं, बल्कि उम्मीद, धैर्य और निरंतर प्रयासों की जीत है। यह कहानी साबित करती है कि सच्चे प्रयासों से बिछड़े अपने भी एक दिन जरूर मिल जाते हैं।

Edited By: Mohit Sinha
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